आया रोबोटिक चेला डॉक्टर का

भारत दुनिया की डायबिटीज राजधानी है. उसे उचित नीतिगत दिशा-निर्देशों की जरूरत है. वे बताते हैं, ''मैं अपने मरीजों को ज्यादा से ज्यादा सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करता हूं.

AI & HEALTH: Doctor vs Internet
डॉ. अंशुमान कौशल

डॉ. अंशुमान कौशल: रोबोटिक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन और शिक्षक

एआइ पहले ही स्वास्थ्य सेवा में प्रवेश कर चुका है. यह निदान में, पेशेंट फ्लो प्रबंधन में, बीमा स्वीकृत करने में सहयोग कर रहा है और हमें सुझा रहा है कि ऑपरेशन कहां करना है.

अब हमारे पास डिजिटल जुड़वां होंगे, जिससे किसी इंसान के वास्तविक इलाज से पहले उपचार और दवाओं के प्रभाव का डिजिटल जुड़वां पर प्रयोग कर हम देख सकेंगे.

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन और नई तकनीकों को अपनाने वाले डॉ. अंशुमान कौशल का कहना है कि रोबोट और एआइ बीमारियों के निदान, सर्जरी, बीमा और मरीज प्रबंधन के तरीकों को बदल रहे हैं ''लेकिन अगर आप सोचते हैं कि कोई रोबोट मेरी यानी डॉक्टर की जगह ले लेगा, तो आप गलत हैं.’’

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में डॉ. कौशल ने एल्डस हक्सले के ट्रांसह्यूमनिस्ट भविष्य का जिक्र  किया जिसे 1932 के उपन्यास ब्रेव न्यू वर्ल्ड में दर्शाया गया है. उन्होंने बताया कि कैसे तकनीक मेडिकल प्रोफेशनल्स के कौशल की पूरक बन सकती है और उनकी क्षमताओं से आगे भी जा सकती है.

वे उन मरीजों से चिढ़ने वाले डॉक्टर नहीं जो उनकी सलाह से पहले अपने लक्षणों के आधार पर गूगल से जानकारी जुटा लेते हैं. हालांकि वे सावधानी बरतने की सलाह जरूर देते हैं. वे जीएलपी-1 (ग्लूकागॉन-लाइक पेप्टाइड-1) की मिसाल देते हैं, जो डायबिटीज के मरीजों में भूख और ब्लड शुगर के नियंत्रण के लिए होता है और जिसे गलती से वजन घटाने का विकल्प माना जा रहा है.

वे कहते हैं, ''यह ऐसी दवा है जिसे कड़ी देखरेख में बेहद जिम्मेदारी के साथ लेना चाहिए. पर बड़ा सवाल यह है, क्या वाकई ऐसा हो रहा है? इस बारे में काफी हाइप बना हुआ है. जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है, वे डर और गलत सूचनाओं के चलते आगे नहीं आ रहे जबकि जिन्हें जरूरत नहीं है, वे लाइन में लगे पड़े हैं.’’

भारत दुनिया की डायबिटीज राजधानी है. उसे उचित नीतिगत दिशा-निर्देशों की जरूरत है. वे बताते हैं, ''मैं अपने मरीजों को ज्यादा से ज्यादा सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करता हूं. मरीज हमारे पास सिर्फ सलाह या जानकारी पाने नहीं आते, बल्कि विश्वास और ईमानदारी की उम्मीद भी करते हैं.’’

यह डॉक्टर बनाम इंटरनेट की लड़ाई नहीं है. वे कहते हैं, ''यह ऐसा जागरूक समाज बनाने की बात है जो तकनीक से सशक्त हो और जिसकी बुनियाद ईमानदार-जिम्मेदार चिकित्सकों पर टिकी हो.’’

खास बातें

एआइ डॉक्टरों की मदद जरूर कर सकता है लेकिन उनकी जगह नहीं ले सकता. बुरी खबर देने या मरीज का हौसला बंधाने के लिए तो मानव स्पर्श ही चाहिए ना!

जीएलपी-1 मेटाबोलिक दवाएं स्वस्थ आहार और जीवनशैली का विकल्प नहीं. गलत जानकारी से गैरजरूरतमंद लोग इनकी ओर आकर्षित हो सकते हैं और जिन्हें जरूरत है, वे इससे दूर भाग सकते हैं.

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