मीठे प्रसाद पर कड़वी सियासत
लड्डू विवाद की जांच रिपोर्ट सामने आते ही सियासत फिर गरमाई. इससे सत्तारूढ़ टीडीपी और विपक्षी वाइएसआरसीपी दोनों को टकराव के लिए नई खुराक मिल गई. दूसरी ओर श्रद्धालु पहले से कहीं ज्यादा लड्डू खरीद रहे

- प्रसाद निचेनमेटला
करीब डेढ़ साल से आंध्र प्रदेश की सियासत में हर चर्चा लड्डू के इर्द-गिर्द घूमती रही. यह कोई साधारण लड्डू नहीं, बल्कि दिव्य प्रसाद है जिसे पहले राज्य के सबसे पूजनीय देवता तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर को चढ़ाया जाता है. फिर उसे रोज लाखों श्रद्धालु महाप्रसादम के रूप में ग्रहण करते हैं.
तिरुपति का लड्डू देश और दुनिया भर के हिंदुओं की धार्मिक आस्थाओं से गहरे जुड़ा है. मंदिर परिसर में स्थित विशेष रसोई 'पोटु' में लड्डू बनाने की परंपरा और उसकी प्रक्रिया इतनी अनूठी है कि साल 2009 में 'तिरुपति लड्डू' को अपना अलग जीआइ टैग मिला था. मंदिर का प्रशासनिक निकाय तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) इसी मान्यता का हवाला देकर उसके नाम पर बेचे जाने वाले नकली लड्डू विक्रेताओं पर कार्रवाई भी करता है.
अब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पिछले मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की सरकार पर इससे भी गंभीर आरोप लगा रहे हैं. उनका आरोप है कि घटिया सामग्रियों, खासकर नकली घी से तिरुपति लड्डू तैयार होने दिए गए. तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रमुख और केंद्र में भाजपा के अहम सहयोगी नायडू का आरोप है कि युवजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (वाइएसआरसीपी) सरकार के 2019 से 2024 के कार्यकाल के दौरान मिलावटी घी से कुल 20.01 करोड़ लड्डू बनाए गए.
पिछले हफ्ते अमरावती में विधानसभा को संबोधित करते हुए नायडू ने आरोप लगाया कि लगभग 59.7 लाख किलो मिलावटी घी का इस्तेमाल हुआ और इस तरह टीटीडी के 234.5 करोड़ रुपए का दुरुपयोग किया गया. यह आरोप ऐसे वक्त में लगाया गया है जब जगन समेत वाइएसआरसीपी के सभी 11 विधायक 'विपक्ष का दर्जा' न दिए जाने के विरोध में विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार कर रहे हैं. नायडू के दिए आंकड़े जनवरी में नेल्लोर की एक स्थानीय अदालत में दाखिल अंतिम पूरक आरोपपत्र पर आधारित हैं.
उसे सीबीआइ की निगरानी में गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) की रिपोर्ट सौंपने के बाद दायर किया गया था. रिपोर्ट ने नायडू और उनके उपमुख्यमंत्री जन सेना पार्टी के पवन कल्याण के इस दावे को खारिज कर दिया कि घी में पशुओं की चर्बी का इस्तेमाल हुआ था. मगर इसने उस समय टीटीडी के अध्यक्ष रहे वाइ.वी. सुब्बा रेड्डी और भूमना करुणाकर रेड्डी सरीखे वाइएसआरसीपी नेताओं को जांच के घेरे में जरूर ला दिया.
एसआइटी की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि टीटीडी की ओर से नियुक्त कुछ निजी डेयरी कंपनियों ने ट्रस्ट के कर्मचारियों और डेयरी विशेषज्ञों की मिलीभगत कर तकरीबन 234 करोड़ रुपए का नुक्सान पहुंचाया. दिंडुक्कल स्थित एआर डेयरी सरीखी कंपनियों को महज 320 रुपए प्रति किलो की अव्यावहारिक दर पर घी आपूर्ति का ठेका दिया गया था.
जुलाई 2024 में एआर डेयरी से भेजे गए चार टैंकरों से प्राप्त घी के नमूनों में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की सीएएलएफ लैब ने खराब गुणवत्ता का घी पाया था. उसी से विवाद की शुरूआत हुई. नायडू ने 'पशु-चर्बी' के इस्तेमाल का दावा किया जिससे देशभर में हंगामा मच गया. फिर अक्तूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआइटी का गठन किया गया. पशु-चर्बी के इस्तेमाल का आरोप तो साबित न हो सका मगर लैब की जांच में वनस्पति तेलों के उपयोग और कुछ रासायनिक तथा कृत्रिम तत्वों की मौजूदगी के सबूत जरूर मिले.
जगन पर आस्था के तीर
पशुओं की चर्बी का इस्तेमाल भले न हुआ हो पर पिछले कुछ वक्त से नायडू का आरोप यही रहा है कि वाइएसआरसीपी सरकार को घी में मिलावट के बारे में पता था. उनका आरोप है कि सुब्बा रेड्डी के टीटीडी के अध्यक्ष रहने के दौरान गुणवत्ता मानकों में गिरावट आई और लड्डू की गुणवत्ता संबंधी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया.
नायडू का आरोप है कि केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआइ) की लैब रिपोर्ट अगस्त में सुब्बा रेड्डी के साथ साझा की गई थी. उसमें प्लांट स्टेरॉल बीटा-सिटोस्टेरॉल की मौजूदगी की पुष्टि की गई थी मगर सुब्बा रेड्डी ने उस रिपोर्ट को दबा दिया. मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि उस समय सुब्बा रेड्डी के निजी सहायक कडूरू चिन्नप्पन्ना ने कुछ सप्लायरों से 25 रुपए किलो की दर से कमीशन की मांग की थी. चिन्नप्पन्ना एसआइटी के आरोपपत्र में नामजद 36 आरोपियों में शामिल हैं. इस मामले के दूसरे आरोपियों में भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी, ए.आर. डेयरी, श्री वैष्णवी डेयरी के निदेशक और अन्य लोग शामिल हैं.
सुब्बा रेड्डी जगन के रिश्तेदार और राज्यसभा सांसद हैं. वे 2019 से 2023 तक टीटीडी के अध्यक्ष रहे हैं. सुब्बा रेड्डी हिंदू हैं मगर विधानसभा में अपने भाषण के दौरान नायडू ने जगन की ईसाई आस्था का बार-बार जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रहते हुए जगन ने तिरुमला प्रवेश संबंधी नियमों का उल्लंघन किया और गैर-हिंदुओं के लिए अनिवार्य आस्था घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया, फिर भी मंदिर में दर्शन किए.
नायडू का आरोप है कि ''उनकी साजिशें सिर्फ घी तक सीमित नहीं थीं, बल्कि वह धर्म, आस्था और हमारी भावनाओं पर सुनियोजित हमला था.'' मसलन, उन्होंने परकामनी (हुंडी में प्राप्त दान के गणना केंद्र) से श्रद्धालुओं की भेंट की कथित चोरी, धर्मांतरण की कथित कोशिशों, और राज्यभर के मंदिरों में दर्ज ''2,032 अपराधों'' का जिक्र किया. उनका कहना था कि ये सब जगन सरकार की ओर से 'हिंदू आस्था और भावनाओं को रौंदने' का सबूत हैं.
वहीं, वाइएसआरसीपी नेता नायडू को ही 'असली हिंदू-द्रोही' बता रहे हैं. वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक मल्लादि विष्णु कहते हैं, ''नायडू के पिछले कार्यकाल के दौरान विजयवाड़ा में तोड़े गए 48 मंदिरों का पुनर्निर्माण जगन ने कराया था. यह दिखाता है कि जगन ही हिंदू धर्म के असली रक्षक हैं.'' वाइएसआरसीपी नायडू से उनके 'पशुओं की चर्बी' के इस्तेमाल संबंधी दावों पर माफी भी मांगने को कह रही है. उसने यह भी आरोप लगाया कि नायडू और टीडीपी सियासी फायदे के लिए इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं.
यही नहीं, नायडू के तीखे हमले के एक दिन बाद ही जगन अपने गृह जिले कडप्पा के श्री नंदीश्वर मंदिर में मूर्ति प्रतिष्ठा और कुंभाभिषेक कार्यक्रम के तहत आयोजित वैदिक अनुष्ठान में बैठे नजर आए. देवस्थानम के पूर्व अध्यक्ष करुणाकर रेड्डी ने भी तिरुपति में एक बड़ा हवन आयोजित कराया जिसमें जगन को 'झूठे आरोपों से मुक्ति' दिलाने की प्रार्थना की गई.
मुद्दा पुराना, तमाशा नया
एसआइटी रिपोर्ट की समीक्षा के लिए नायडू ने एक-सदस्यीय समिति गठित की है जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त मुख्य सचिव दिनेश कुमार कर रहे हैं. वाइएसआरसीपी ने इस समिति पर भी आपत्ति जताई और इसे मुख्यमंत्री का 'नया ड्रामा' करार दिया है. करुणाकर रेड्डी कहते हैं, ''करीब साल भर तक आठ राज्यों में चली सीबीआइ-एसआइटी जांच ने हमें क्लीन चिट दे दी है...अब चंद्रबाबू नायडू हमारे खिलाफ नया मोर्चा खोलने की कोशिश कर रहे हैं.''
सियासी विश्लेषक भी ऐसा ही मानते हैं. नव्यांध्र इंटेलेक्चुअल फोरम के अध्यक्ष एस. डोगीपार्थी का कहना है कि टीडीपी इस मुद्दे को जिंदा रखकर हिंदू मतदाताओं को अपने पाले में एकजुट करने की उम्मीद कर रही है. वे कहते हैं, ''टीडीपी 2029 के चुनाव तक इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहती है, मगर इस राज्य के सांप्रदायिक और धार्मिक नैरेटिव से प्रभावित होने का कोई खास इतिहास रहा नहीं है, ऐसे में हो सकता है कि टीडीपी ने यह दांव जरूरत से ज्यादा खेल दिया हो.''
टीडीपी की सहयोगी भाजपा फिलहाल इस तमाशे को किनारे से देखती नजर आ रही है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, ''नायडू थोड़े बेचैन दिखाई दे रहे हैं और जगन को नुक्सान पहुंचाने के लिए कोई भी मुद्दा गंवाना नहीं चाहते.'' पिछले कार्यकाल के दौरान संसद और खासकर राज्यसभा में कुछ अहम विधेयकों के पारित होने सरीखे कई कठिन मौकों पर भाजपा को वाइएसआरसीपी का साथ मिला था. लगता है भाजपा उसे भूली नहीं है. भाजपा नेता कहते हैं, ''किसे पता तीन साल बाद आंध्र प्रदेश का सियासी परिदृश्य क्या होगा?''
वाइएसआरसीपी को भी पलटवार का मुद्दा मिल गया और उसने टीटीडी के मौजूदा अध्यक्ष बी.आर. नायडू के कुछ वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद उन्हें पद से हटाने की मांग की है. दरअसल, उन वीडियो में बी.आर. नायडू को एक महिला के साथ कथित रूप से आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया है. बी.आर. नायडू ने उस वीडियो को 'डीपफेक' बताते हुए खारिज किया है.
इस बीच, टीटीडी अपनी व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटा है (देखें बॉक्स). जांच मानकों को और सख्त किया गया है तथा 75 लाख रुपए की लागत से गुणवत्ता जांच उपकरण स्थापित किए गए हैं. इनमें गैस क्रोमैटोग्राफ (जीसी) और हाइ परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफ (एचपीएलसी) शामिल हैं. टीटीडी तिरुमला में एक अत्याधुनिक फूड जांच प्रयोगशाला भी स्थापित कर रहा.
टीटीडी अधिकारियों के अनुसार, श्रद्धालुओं के फीडबैक से पता चलता है कि लड्डू के स्वाद तथा गुणवत्ता को लेकर संतोष बढ़ा है. सियासी टकराव अपनी जगह हैं, मगर मंदिर प्रशासन और श्रद्धालु फिलहाल इस बात से निश्चिंत हो सकते हैं कि तिरुमला का प्रसादम लड्डू यथासंभव शुद्ध और स्वादिष्ट है.