रोएं भर का रूहानी पुल

लिवर लैक्स की स्पेनिश भाषा की यह रचना एक बेटी को खोजने के बहाने हर किसी के लिए बन जाती है खुद की तलाश की फिल्म. ऑस्कर में यह बेस्ट इंटरनेशनल फीचर और बेस्ट साउंड श्रेणी में दावेदार.

Cinema/Sirat
सिनेमा सिरात का दृश्य

फुरसतः सिनेमा/सिरात

पहले फिल्म के नाम को ही थोड़ा स्पष्ट कर लें. इस्लाम में सिरात का अर्थ बताते हैं जहन्नुम पर बना वह पुल जो मरने पर पार करने से जन्नत में ले जाता है. यूरोप और फिर पूर्वी अफ्रीका के मोरक्को में पढ़े-बढ़े, दिल्ली की दरगाहों तक चक्कर लगाने वाले सूफियाना मिजाज के फिल्मकार, स्पेन के ओलिवर लैक्स ने अपनी फिल्म में इसी का रूपक साधा है. मोरक्को में रहने और अपनाए जाने के लिए जैसे शुकराने की तरह उन्होंने इसको वहीं की जमीन पर खड़ा किया है.

एक अधेड़ बाप लुई (सर्गी लोपेज) दसेक साल के बेटे एस्तेबान और कुतिया पीपा को अपनी एक वैननुमा कार में लेकर जवान बेटी मार को खोजने निकला है. दक्षिणी मोरक्को के रेगिस्तानी इलाके में नौजवानों की मौज-मस्ती के लिए होने वाली किसी रेव पार्टी में वह गई और महीनों से लौटी नहीं है. उसकी तलाश में रेव पार्टियों में जा-जाकर वे उसकी फोटो और ब्योरे दिखाते-बांटते भटक रहे हैं. ऐसी ही एक पार्टी के दौरान फौज आ पहुंचती है और इमरजेंसी का ऐलान करते हुए लोगों को बसों में भरती है.

बंजारेनुमा 4-5 अधेड़ रेवर्स का एक समूह दो बसनुमा ट्रकों में चल रहा है. मौका ताड़कर काफिले से निकल आड़े-तिरछे रास्ते से वे भाग पड़ते हैं. उन्हीं के पीछे मौजूद और ऊहापोह में फंसा लुई बेटे के कहने पर तुरंत उनका साथ पकड़ लेता है. अब शुरू होता है असल सफर. बीहड़ पहाड़, विकट नदी-नाले, दूर-दूर तक जटिल-वीरान भूगोल. उनके बीच डोलते ये दो अलग-अलग मकसद. रेवर्स को मोरक्को के पड़ोसी मुल्क मॉरितानिया से लगी रेगिस्तानी सीमा पर एक दूसरी रेव पार्टी में पहुंचना है और लुई को उम्मीद है कि शायद बेटी वहां मिल जाए.

दरअसल यह कई पुलों की रूहानी कहानी है. पहला पुल तो इन दो अजनबी परिवारों के बीच बनता है. झगड़ते-मदद करते, खाना-पीना साझा करते और बहुत कुछ खोते-पाते वे जैसे जिंदगी सीख रहे हैं. एक नदी पर ट्रक वाले पार करके चले गए पर यह कार कैसे निकले. लुई बेटे से कहता है: ''सत्यानाश हो! अब क्या करें? कहां फंसा दिया सालों ने!’’

लैक्स ने कहीं कहा भी है कि इन्हीं लम्हों को पकड़ने के लिए उन्होंने फिल्म बनाई है, जहां आप जिंदगी और मौत के बीच एक धागे पर खड़े हैं और दूर तक कोई उम्मीद नहीं. इस महीन धागे के भी रेशे जैसे-जैसे उधड़ते हैं, फिल्म दर्शक की सांसों के रास्ते नसों में उतर जाती है. सब कुछ गंवाकर सम भाव पर पहुंचे लुई की तरह दर्शक भी आखिरी दृश्य तक मौत के डर से उबर आता है.

इस ढंग से आध्यात्मिक अंदाज देते हुए लैक्स ने सिरात को सही मायनों में सार्वभौमिक बना दिया है. यह जहन्नुम और जन्नत से ज्यादा रोने और हंसने, रंग और बेरंगेपन तथा होश और बेहोशी के बीच का पुल है. रेव पार्टियां वैध हैं या अवैध? खुद हमारे दिमाग में उठने वाले विचार कितने नैतिक हैं और कितने अनैतिक? ऐसे कितने ही पुल बनाती चली जाती है सिरात.

करीब दो घंटे की सिरात ओटीटी प्लेटफॉर्म मुबी पर उपलब्ध.

सिने-सुझाव
गजेंद्र सिंह भाटी

सिसु, 2023 
कहानी 1944 में स्थित है. नाजी सैनिक पीछे हट रहे हैं. इसी बीच फिनलैंड में एक आदमी अपने कुत्ते और घोड़े के साथ भटकते हुए सोना खोज रहा है. उसे सोने का एक भारी भंडार मिलता है लेकिन कुछ नाजी सैनिक उसे लूट लेते हैं. ऐसा करके वे भारी गलती कर बैठते हैं. उन्हें नहीं पता कि जिस मरियल को वे बूढ़ा गोल्ड माइनर समझ रहे हैं, वह असल में फिनलैंड का एक कुख्यात कमांडो रह चुका है, जिसे वन मैन आर्मी कहा जाता है. अब वह कमांडो उन नाजियों पर जंग छेड़ देता है. उन्हें चुन चुनकर यूं मारता है कि देखने वाले आंखें बंद कर लें. खासी वॉयलेंट फिल्म. इनोवेटिव एक्शन थ्रिलर.
कहां देखें: सोनी लिव

ग्योंगसाँग क्रिएचर 2023-24
एक बढ़िया, रसीली सीरीज. कॉन्सेप्ट के स्तर पर कोरियन सिनेमा वालों की बहादुरी को दिखाने वाली. कहानी 1945 में ग्योंगसाँग (वर्तमान सोल) में शुरू होती है जिस पर जापानी सेनाओं का कब्जा है. इसी शहर में एक पॉनशॉप यानी कीमती चीजें गिरवी रखने की दुकान है जो शहर का केंद्र है. इसका मालिक खासा चर्चित आदमी है. उससे मिलने एक ट्रैकर आती है, जो एक महिला की फोटो लेकर उसे खोज रही है.

इसी दौरान इनका सामना एक क्रिएचर से होता है, जो बहुत खतरनाक और विशालकाय है. अब वे इस क्रिएचर से लोगों को कैसे बचाएंगे, जापानी सेना का सामना कैसे करेंगे, इनके और दोस्तों के बीच क्या होता है और क्या उस लापता महिला को खोजा जा सकता है, यही कहानी है. कई खतरनाक टकराव और कई बेचैन करने वाले मोड़ कहानी में आते हैं. हर वक्त यह आपके ध्यान को जकड़े रखती है. इस सीरीज के दो सीजन आ चुके हैं जिन्हें हिंदी में भी देखा जा सकता है.
कहां देखें: नेटफ्लिक्स

द गोल, 1999 
एक लड़का है मनु. उसे फुटबॉल खेलना बहुत पसंद है. लेकिन कोई उसे अपने साथ खिलाता नहीं. एक दिन शहर से एक फुटबॉल कोच आता है. वह जब मनु को खेलता देखता है तो उसे टीम में लेना चाहता है पर दूसरे बच्चे यह कहते हुए मनु के साथ खेलने से मना कर देते हैं कि वह चोर का बेटा है और दूसरी जाति से है. अब कोच क्या करेगा? क्या वह मनु को टीम में खिला पाएगा? उनका कैसा रिश्ता पनपता है? यह सब इस इंस्पायरिंग फिल्म में उद्घाटित होता है. द गोल इरफान के करियर की विरली फिल्मों में शुमार है जिस पर बहुत कम ध्यान गया है.
कहां देखें: यूट्यूब

एक्यूज्ड
हाल में नेटफ्लिक्स पर आई फिल्म एक्यूज्ड ने मीटू नैरेटिव को एक नए नजरिए से पेश करती है. कोंकणा सेनशर्मा और प्रतिभा रांटा (लापता लेडीज वाली) इसमें एक युगल के रूप में हैं. सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोपों से घिरी लंदन की एक डॉक्टर के किरदार में कोंकणा को न सिर्फ अपनी छवि बल्कि रिलेशनशिप को भी बचाना है. समलिंगी, स्वार्थी और मुंहफट. सहानुभूति के बजाए समालोचना को न्यौता देने वाली. इन्हीं पहलुओं के चलते कोंकणा ने इसे किया, जिनके मुताबिक ऐसे कैरेक्टर अभिनेत्रियों को रोज-रोज नहीं मिलते.

वे हंसते हुए कहती हैं, ''औरत की देह में एक टॉक्सिक मर्द को जीते हुए बहुत मजा आया. महिला, समलैंगिक, अल्पसंख्यक या उपेक्षित समुदाय का होने भर से हम किसी को कठघरे में खड़ा देंगे? उनके साथ भी उसी मानवीयता के साथ पेश आना होगा.’’ वे मानती हैं कि मुख्य धारा की वैसी चालू फिल्म न होने की वजह से शायद यह सिनेमाघरों तक न पहुंचे. फिल्म की निदेशक अनुभूति कश्यप इसके लिए नेटफ्लिक्स का शुक्रिया अदा करती हैं कि ''उन्होंने इसे एक प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट के रूप में लिया.’’ उन्हें इस बात की उम्मीद है कि केंद्रीय रिश्ते को किसी एक ही चश्मे से न देखे जाने वाली इस फिल्म का दर्शक भी नोटिस लेंगे. ''समलैंगिक रिश्ते को सीधा और सरल रखा गया है. कोई खास स्टेटमेंट देने का प्रयास नहीं है इसमें.

कोंकणा सेनशर्मा और प्रतिभा रांटा बतौर एक युगल मीटू जैसे नैरेटिव में.

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