फरेबी फिक्सर

मॉडर्न अमेरिका के सबसे प्रचुर और ताकतवर फिल्ममेकर्स में से एक टेलर शैरिडन की यह सीरीज लीक से हटकर है, कमाल है. ऐसी है कि देखकर आप घनघोर फैन हो सकते हैं, नाइत्तेफाकी रख सकते हैं लेकिन दरकिनार नहीं कर सकते.

Leisure: Cinema / Landman
लैंडमैन के दृश्यों में मुख्य पात्र टॉमी   

- गजेंद्र सिंह भाटी

गुड, द बैड एंड द अग्ली’ (1966) में कन्फेडरेट सेना का गड़ा खजाना खोजते हुए एक-दूजे को धोखा देते और लड़ते वे तीन धूर्त गनमैन सिनेमा के वेस्टर्न जॉनरा में मेरा अतिप्रिय आहार थे. भरपेट तृप्ति. इस महान मनोरंजक फिल्म को रचा महान डायरेक्टर सर्जियो लियोने ने. बरसों बाद ऐसा ही भीषण संतृप्तिदायक अनुभव टेलर शैरिडन ने अपनी कहानियों के जरिए दिया.

उनकी येलोस्टोन तो मस्ट वॉच है. ऐसी नीयो-वेस्टर्न और इमर्सिव सीरीज कभी नहीं बनी. ग्रामीण अमेरिका में स्थित डटन रेंच और वहां गायें टोरने, चराने वाले काउबॉयज की कहानी. हार्डकोर भी, भीनी-भीनी भी, शॉकिंग भी. सुंदर लिखाई. मन को बांध लेने वाली. उन्होंने और क्रिश्चन वॉलेस ने मिलकर फिर बनाई लैंडमैन. एक और प्रिय सीरीज. हाल ही में इसका सीजन 2 आया है.

कहानी पश्चिमी टेक्सस के पर्मियन बेसिन में स्थित है. कोई 30 करोड़ वर्ष पूर्व यहां एक उथला समुद्र था. समुद्री जीव, वनस्पतियां और जैविक पदार्थ लाखों वर्ष तक दबते गए. सड़ते गए. उनकी परतें बनीं. वही आज के तेल और गैस हैं. हजारों की संख्या में घोड़े के सिर जैसी लोहे की मशीन रात-दिन इन्हें पंप करके बाहर निकाले जा रही हैं. यहां के तेल उद्योग की यह पंपिंग कभी बंद न हो, इसे सुनिश्चित करता है टॉमी. एम-टेक्स ऑयल कंपनी का लैंडमैन. एक फिक्सर.

जमीनी स्तर पर हर संकट दूर करना उसका जिम्मा है. एक ही दिन में वह बॉस को करोड़ों डॉलर की डील के लिए मना रहा होता है, अपने ड्रिलिग रिग के मजदूर को स्टील के दैत्याकार पाइपों के नीचे कुचलकर मरता देख रहा होता है और मैक्सिकन ड्रग कार्टेल द्वारा किडनैप किया जा रहा होता है. यह एक अद्भुत आदमी है.

कोई सख्त लहजा, स्टाइल, मोह, लालच नहीं. बस जुनून, अपने काम का. हर संकट पर फ्रस्ट्रेट होता है, परिवार को वक्त नहीं दे पाता है, लेकिन यह काम भी छोड़ना नहीं है. तर्कों का धनी. मुंह से चार लाइन बोलकर ड्रग कार्टेल को मरोड़ देने वाला. मैंने सुना है मॉरल हाई ग्राउंड पर रात को हवाएं बहुत ज्यादा ठंडी चलती हैं, यह कहने वाला. लेकिन फिर वह सुपरमैन भी नहीं है. 

नवरसों के बीच  लैंडमैन के दो अलग दृश्यों में हर पहर समय से जूझता मुख्य पात्र टॉमी.

टॉमी का यह रोल पानी जैसे घुलनशील, कभी बासी न लगने वाले ढंग से प्ले किया है बिली बॉब थॉर्नटन ने. बिली को आप नासपीटे 'बैड सेंटा’ के रूप में देख चुके हैं. लेकिन स्लिंग ब्लेड (1996) उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है. उन्होंने ही लिखा और डायरेक्ट किया. स्क्रीनप्ले को ऑस्कर मिला. इसमें बच्चे जैसे भोले दिमाग वाले कार्ल का रोल थॉर्नटन ने यूं किया है कि फिल्म देखकर भी उन्हें पहचान न सकेंगे.

कहानी में टॉमी की पूर्व-पत्नी एंजेला और बेटी ऐंसली के अप्रतिम से पात्र भी हैं.वे पूंजीवादी अमेरिका की 'कॉस्मेटिक स्त्री’ की प्रतिनिधि भी हैं. वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ टाइम बिताते हुए वे ड्रिंक पिलाने से लेकर स्ट्रिपटीज तक तमाम, जीवन को 'सेलिब्रेट’ करने जैसी चीजें करती हैं. रोज महंगी शॉपिंग करती हैं. वे अच्छी भी हैं, तार्किक भी, स्वच्छंद भी और छिछली भी.

शैरिडन अपनी इस प्रामाणिक दुनिया में तेल उद्योग के प्रति जजमेंटल नहीं हैं. वे सबकी आलोचना करते हैं. एक ऑयलकर्मी के पेशे की. परिवार और जीवन से कटते जाने की. पूंजीवादी व्यवस्था की. लिबरल्स की. वह बस मूल काउबॉयज से प्रेम करते हैं. वह उनकी सादगी, वैयक्तिकता, स्वतंत्रता, कठोर परिश्रम और पैसे से ज्यादा जीवन को महत्व देने की प्रशंसा करते हैं.

शैरिडन अपनी इस प्रामाणिक दुनिया में तेल उद्योग के प्रति जजमेंटल नहीं हैं. वे सबकी आलोचना करते हैं लेकिन मूल काउबॉयज से प्रेम करते हैं.

सिने-सुझाव- सुमित सिंह

भ्रमयुगम  2024 

दाना चुगती सुनहरी चिड़िया के सतरंगी पंख. अपने दोस्त से नजारा सुनते दृष्टिहीन व्यक्ति को जैसे ही मालूम पड़ता है कि उसका दोस्त ये अद्भुत दृश्य देख तो रहा है, मगर एक तनी हुई गुलेल के पीछे से. ठीक तभी खेल बदल जाता है. बेगारी से भागकर बीच जंगल एक जर्जर कोठी में पहुंचे थेवन को जो आदमी तारणहार लगता है, वो थेवन को कथाओं, पहेलियों, चौपड़ और माया की ऐसी सियाह सफेद दुनिया में खींच लेता है जहां सिर्फ और सिर्फ एक ही चीज सच है, भ्रम. अमरता के शाप से पीड़ित चातन, दो नौकर और हैरत को गाढ़ा करती लगातार बारिश. आंख में आंख डाले किया गया सवाल 'डर तो नहीं रहे?’    
कहां देखें: सोनी लिव

प्लुरिबस  2025 
एक सुबह कैरल स्टुर्का जागती है, तो दुनिया खुशहाली की चपेट में आ चुकी होती है. किसी का किसी से कोई झगड़ा नहीं. अपराध और पुलिसिंग, दोनों खत्म. छीना झपटी झूमाझटकी कुछ नहीं. सबको बराबर खाना. सबका बराबर काम. इंसानी लार के सहारे पूरी दुनिया में फैले इस 'हैप्पिनेस वायरस’ से कुल तेरह लोग अब भी अछूते हैं.

कैरल समेत इन तेरह लोगों को दुनिया में मौजूद हर चीज, मतलब हर एक चाही गई चीज हासिल है. लेकिन, कैरल की कोशिश है कि दुनिया पहले जैसी हो जाए. इस जबरन खुश दुनिया में किसी का कोई खयाल आजाद नहीं. पूरी दुनिया एक साझी स्मृति और कल्पना पर टिकी हुई है. पाला चुनने के दबाव का इकहरा और कारगर जवाब है ये सीरीज.   
कहां देखें: एप्पल टीवी

ऑल दी एम्प्टी रूम्स  2025 
अपने पॉजिटिव नजरिए और खुशपसंदगी के लिए मशहूर अमरीकी पत्रकार स्टीव हार्टमैन का अतीव अनोखा प्रोजेक्ट. फोटोग्राफर लू बौप के साथ स्टीव अमरीका भर के उन बच्चों के घर पहुंचे जो किसी न किसी स्कूली गोलीबारी में मारे गए. उनके खाली कमरों की तस्वीरें लेने.

देश भर में फैले कमरे, जिनसे बच्चे रोज की तरह निकले, लेकिन लौटे नहीं. हथियारों की खुली बिक्री से उपजी सनक जब शिकार पर निकलती है, तो उसकी कीमत कौन चुकाता है, बताती है ये डॉक्यूमेंट्री. देश-धर्म-जाति से परे अति के निशाने पर खड़े हर व्यक्ति के लिए सांस की तरह जरूरी.    
कहां देखें: नेटफ्लिक्स

जेखान भूतेर भोय  2012 
हॉरकॉम की इस पीढ़ी से ठीक पहले की बेहद मधुर हॉरर फिल्म. विस्मय को अपनी सिनेमा मेकिंग स्टाइल का स्थायी भाव बनाने में संदीप रे को कई दशक लगे. तीन अलग कहानियों से बुने गए इस शाहकार में एक कहानी संदीप के पिता और भारतीय सिनेमा के पितामह सत्यजीत रे की लिखी हुई है. उपन्यास लिखने में डूबा लेखक, अंग्रेजों के जमाने की कोठी और भूतों का एक शिकारी मिलकर भय की नई परिभाषा गढ़ते दिखाई देते हैं.
कहां देखें: अमेजन प्राइम

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