"डेडलाइन के लिए काम करता हूं, हेडलाइन के लिए नहीं"

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन और प्रधान संपादक अरुण पुरी तथा वाइस-चेयरपर्सन और कार्यकारी प्रधान संपादक कली पुरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन और प्रधान संपादक अरुण पुरी तथा वाइस-चेयरपर्सन और कार्यकारी प्रधान संपादक कली पुरी

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2024 नए भारत की नई कहानी

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2024 का आयोजन 15 और 16 मार्च को राजधानी दिल्ली के ताज पैलेस में हुआ. इसमें आखिरी दिन यानी 16 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना भाषण दिया, जिसे हम यहां आपके साथ साझा कर रहे हैं. 

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक पर्व शुरू होने जा रहा है. आज जब सारी दुनिया अनिश्चितता के भंवर में फंसी है, एक बात निश्चित है कि भारत तेज गति से बढ़ता रहेगा. आज 'मूड ऑफ द नेशन' भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है. आज 'मूड ऑफ द नेशन' विकसित भारत का निर्माण करना है.

जब भी मैं ऐसे कॉन्क्लेव में आता हूं, मुझसे उम्मीद की जाती है कि मैं आपको कई सारी हेडलाइन देकर जाऊंगा. हालांकि मैं ऐसा व्यक्ति हूं जो "हेडलाइन के लिए नहीं बल्कि डेडलाइन के लिए काम करता है." और इसलिए आज मैं उन चीजों के बारे में बात करूंगा जो मीडिया को आकर्षक नहीं लगतीं.

मीडिया भले उन्हें छूना पसंद न करे, पर ये ऐसे मुद्दे हैं जो आम मानव को छूते हैं. उदाहरण के लिए स्टार्ट-अप. दस साल पहले बहुत कम स्टार्ट-अप थे, मुश्किल से 100 रहे होंगे. आज करीब 1.25 लाख रजिस्टर्ड स्टार्ट-अप हैं. मगर भारत की स्टार्ट-अप क्रांति को महज संख्याओं से नहीं पहचाना जाता, असल ताकत इस बात में है कि ये स्टार्ट-अप भारत के 600 से ज्यादा जिलों में हैं, एक तरीके से देश के 90 प्रतिशत क्षेत्र में. यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है.

अन्यथा लोग सोचते हैं स्टार्ट-अप का मतलब है बेंगलूरु. लेकिन टियर 2 और टियर 3 शहरों के युवा स्टार्ट-अप क्रांति का नेतृत्व कर रहे हैं. और जिन्होंने (विपक्षी दलों ने) कभी स्टार्ट-अप की चर्चा नहीं की, अब स्टार्ट-अप के बारे में बात करने को मजबूर हैं.

एक और योजना के बारे में बात करना जरूरी है, जो जमीन पर नौकरियों और स्व-रोजगार में भारी बदलाव ला रही है. मुद्रा योजना. हमारे देश में बैंकों से मदद लेने के लिए युवाओं को कई जगहों पर कई गारंटियां देनी पड़ती थीं. मगर मुद्रा योजना की बदौलत ऐसे युवा भी बैंक लोन ले सकते हैं जिनके पास कोई गारंटी नहीं है. 26 लाख करोड़ रुपए के बैंक लोन किसी गारंटी के बिना छोटे उद्यमियों को बांटे गए हैं. इनमें से मुद्रा के 8 करोड़ लाभार्थी वे हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार कारोबार शुरू किए.

पीएम स्वनिधि एक और ऐसी ही योजना है, जिसके माध्यम से स्ट्रीट वेंडरों को पहली बार गारंटी के बिना सस्ते और आसान कर्ज मिले. मेरे जीवन के अनुभवों ने मुझे यह योजना शुरू करने के लिए प्रेरित किया. मैंने गरीबों की अमीरी और अमीरों की गरीबी देखी है. यही कारण है कि मुझे गारंटी के बिना स्ट्रीट वेंडरों को कर्ज देने की हिम्मत मिली. आपको याद होगा कि कोविड के दौरान इन्हीं स्ट्रीट वेंडरों के बिना जिंदगी कैसे ठहर गई थी. उसी दिन मैंने तय कर लिया कि वे सच्ची शक्ति हैं, मैं उनके लिए कुछ न कुछ करूंगा.

जिस तरह उन्होंने डिजिटल इंडिया को अपनाया है, उसकी वजह से भी मैं उनकी सराहना करता हूं. जिन्हें अनपढ़ कहकर अपमानित किया गया, आज वे भारत की डिजिटल क्रांति का चेहरा हैं. दुनिया भारत की डिजिटल क्रांति की बात इसलिए करती है क्योंकि जब यहां उनके दूतावासों में अपने देशों से मेहमान आते हैं तो वे इन्हीं स्ट्रीट वेंडरों के पास जाते हैं और कुछ खरीदकर उन्हें डिजिटल लेनदेन दिखाते हैं. यह मार्केटिंग की केस स्टडी बन गया है. मीडिया को चाहिए कि उनकी कड़ी मेहनत को हाईलाइट करे.

कई लोगों को शायद नमो ड्रोन दीदी योजना के बारे में पता न हो. गांवों में महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को 1,000 से ज्यादा ड्रोन दिए गए हैं. ये वे ड्रोन नहीं हैं जो आप टीवी पर देखते हैं, ये वे ड्रोन हैं जो गांवों, किसानों और महिलाओं की किस्मत बदल देंगे. गांव की महिलाएं, जिन्होंने कभी साइकिल भी नहीं चलाई, अब ड्रोन पायलट के रूप में पहचानी जाती हैं. आज भी अगर कोई लड़की गांव में ट्रैक्टर चलाते दिखाई देती है, तो इसे विसंगति की तरह देखा जाता है. मैं इस मानसिकता को तोड़ना चाहता हूं. और यह ग्रामीण मानसिकता को बदलने का मेरा तरीका है. मैं मानता हूं कि जब वह ड्रोन उड़ाएगी, खेतों में काम करेगी, वह कृषि की अर्थव्यवस्था को बदल देगी. 

जब मैं गुजरात में था, मैंने फैसला किया कि आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की यूनिफॉर्म एयर होस्टेस की यूनिफॉर्म से भी बेहतर होनी चाहिए. पहले जब गांवों के लोग पुलिसवाले को देखते थे तो उसे सरकार के चेहरे की तरह देखते थे. आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की यूनिफॉर्म में बदलाव का अर्थ यह था कि गांव वाले उन्हें भी सरकार की तरह देखने लगे. यही बात तब भी मेरे दिमाग में थी जब मैंने नमो ड्रोन दीदी अभियान शुरू किया.

आपने आयुष्मान भारत योजना के बारे में सुना होगा, जो 5 लाख रुपए तक का मुफ्त मेडिकल इलाज देती है. आज अगर आप किसी गांव में जाएं, आप एक और चीज पाएंगे, आयुष्मान आरोग्य मंदिर. हमारी कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि गांव के हर ब्लॉक में एक आधुनिक हेल्थकेयर सुविधा हो.

इसीलिए हमने गांवों में 1.5 लाख से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए हैं. कुछ लोगों को मंदिर शब्द के उपयोग से परेशानी हो सकती है, पर यह उनकी समस्या है, मेरी नहीं. इन आरोग्य मंदिरों में आप न केवल सामान्य टेस्ट बल्कि डायबिटीज और कैंसर के शुरुआती टेस्ट भी करवा सकते हैं.

हम इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को डिजिटल माध्यम से बड़े अस्पतालों से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि गांव के लोगों को सीमलेस ट्रीटमेंट मिल सके. आज हम टेलीमेडिसिन का उपयोग कर रहे हैं. यह डिजिटल क्रांति है. ई-संजीवनी ऐप की मदद से लोगों ने अपने घरों में बैठकर 24 करोड़ कंसल्टेशन किए.

पिछले दस साल में हमने राजकाज का एक नया मॉडल विकसित किया है. हमने उन लोगों पर ध्यान दिया है जो सरकार की प्राथमिकताओं के बिल्कुल निचले स्तर पर थे. सरकार का गठन करते ही हमने देश के 100 से ज्यादा पिछड़े जिलों के विकास का अभियान छेड़ा. एस्पायरेशनल ड्रिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम की बदौलत आज ये जिले कई मानदंडों पर कई दूसरे जिलों से आगे निकल गए हैं. अब हम जिलों की कामयाबी को ब्लॉक स्तर पर दोहराएंगे. हमने एस्पायरेशनल ब्लॉक कार्यक्रम शुरू भी कर दिया है.

भारत का नॉर्थ-ईस्ट पिछली सरकारों की प्राथमिकता में हमेशा आखिरी होता था. 2014 से केंद्रीय मंत्रियों ने करीब 700 बार इस क्षेत्र का दौरा किया. प्रधानमंत्री के रूप में मैं इस क्षेत्र में इतनी बार गया हूं जितनी बार पिछले प्रधानमंत्री कुल मिलाकर भी नहीं गए होंगे. हमने मानसिकता बदली.

पहले जिन गांवों को भारत के आखिरी गांव माना जाता था, अब उन्हें देश के पहले गांव कहा जाता है. जिन जिलों को पहले पिछड़े कहकर खारिज कर दिया जाता था, अब उन्हें आकांक्षी जिले कहा जाने लगा है. पूर्व में हैं तो सूर्य की किरणें सबसे पहले इन्ही जिलों में पहुंचती हैं. पश्चिम में हैं तो सूर्य यहीं से विदा लेता है. 

यह योजना लॉन्च किए हमें एक साल हुआ. इस अरसे में 17 कैबिनेट मंत्री इन सुदूर गांवों में गए और रात वहीं गुजारी. कुछ गांवों में तापमान माइनस 15 डिग्री था. हम यह चुनाव जीतने के लिए करते हैं? ऐसे गांव जहां की आबादी बामुश्किल 50-100 है, जहां पहुंचने में तीन दिन लगते हैं? हम यह वोटों के लिए नहीं करते. चुनाव आते और जाते हैं, यह हमारी प्रतिबद्धता, हमारी जिम्मेदारी है.

जब सरकार का फोकस स्पष्ट होता है, यह चारों तरफ दिखाई देता है. हमने कौशल विकास, पशुपालन और मछलीपालन और सहकारी क्षेत्र के लिए अलग मंत्रालय बनाए. और परिणाम वही रहे जैसे हम चाहते थे. कौशल विकास से मेरा लक्ष्य इंडस्ट्री 4.0 है. इसका मतलब अपने गैरेज में स्क्रूड्राइवर से मरम्मत करना नहीं है. भारत का मछली उत्पादन आज दोगुना हो गया है. आज हमारा मछली निर्यात तकरीबन हमारे सॉफ्टवेयर निर्यात के स्तर पर है.

आप सब कोविड वैक्सीन के बारे में जानते हैं क्योंकि आपकी जिंदगी दांव पर लगी थी. लेकिन मैंने पहली बार पशुओं के टीके के लिए 15,000 करोड़ रुपए की योजना लॉन्च की. मेरा अंतिम मिशन, जिसे मैं दुनिया भर में प्रचारित करना चाहता हूं, एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करना है. चाहे वह पौधे का स्वास्थ्य हो, पशु का स्वास्थ्य हो, या मनुष्य का स्वास्थ्य हो.

पहली बार मछुआरे और पशु चरवाहे किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ ले सकते हैं. सहकारिता मंत्रालय के तहत गांवों में 60,000 से ज्यादा प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) का कंप्यूटरीकरण किया गया है. इसी मंत्रालय ने दुनिया की सबसे बड़ी भंडारण योजना शुरू की है. दो लाख गोदामों का काम  चल रहा है. इनके कारण किसान अपनी फसल बेचने को मजबूर नहीं होंगे, वे उस इन गोदामों में रख सकेंगे और बाजार में कीमतें बढ़ने पर बेच सकेंगे. आमदनी पक्की होगी, और बर्बादी कम से कम होगी.

पिछली सरकारों के दौरान आपने "ईज ऑफ लिविंग" के बारे में सुना भी नहीं होगा. चूंकि वे इस ढंग से सोचते ही नहीं थे, तो नागरिकों को ईज ऑफ लिविंग भला दे भी कैसे सकते थे? पहले की सरकारों के समय सरकारी सेवाओं पर पहला दावा ताकतवर, समर्थ लोगों का होता था. इन्हें हासिल करने के लिए वे हर तरकीब, साम, दाम, दंड, भेद और जरूरत पड़े तो प्रभाव और रिश्वत का भी इस्तेमाल करते थे. और इसकी तकलीफ कौन उठाता था? आम मानव. वह आम मानव जिसे हम आर.के. लक्ष्मण के कार्टूनों से जानते हैं. मैं आम मानव के साथ रहा हूं. सरकारों ने कभी उनके समय को महत्व नहीं दिया, न ही उनकी समस्याएं समझीं. इसलिए हमने आम मानव की ईज ऑफ लिविंग को अपनी सरकार की टॉप प्रायोरिटी बनाया.

मैं कुछ आंकड़े साझा करना चाहता हूं. पहले पासपोर्ट बनवाने में औसतन 50 दिन लगते थे, आपको स्थानीय पुलिस को घूस भी देनी पड़ती थी, 50 कॉल करने पड़ते थे, 50 लोगों से सिफारिश करवानी पड़ती थी. आज औसतन 5-6 दिन लगते हैं और पासपोर्ट आपके घर आ जाता है. यह बदलाव कैसे आया? वही अफसर हैं, वहीं फाइलें, यहां तक कि बजट भी वही है.

यह इसलिए आया क्योंकि सरकार ने ईज ऑफ लिविंग पर बल दिया. हमने इन्फ्रास्ट्रक्चरल सपोर्ट भी दिया. 2014 से पहले देश में केवल 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे. आज करीब 525 हैं. आप ऐसे बदलाव चारों तरफ देखेंगे. 2014 से पहले आयकर रिटर्न का औसत समय 93 दिन था. अब यह औसत समय घटकर 10 दिन से नीचे आ गया है. 2014 से पहले हमारे टोल प्लाजा पर इंतजार का औसत समय 12 मिनट से ज्यादा था. अब फास्टैग शुरू होने के बाद यह 30-40 सेकंड है.

हमारी दंड संहिताएं औपनिवेशिक युग की विरासत थीं. उनके मूल में दंड था, न्याय नहीं, क्योंकि वे ब्रिटिश मानसिकता से निकले थे. उन्हें बदलना था. हमने उन्हें अपने गर्वनेंस मॉडल के अनुरूप न्याय-केंद्रित बनाया है. जो तीन नई संहिताएं पारित की गई हैं, वे ज्यादा तेजी से न्याय पाने में साधारण नागरिक की भी सहायता करेंगी. बीते 10 वर्षों में सरकार ने 1,500 से ज्यादा पुराने कानून खत्म किए हैं, जिनमें से कई औपनिवेशिक जमाने के थे.

मैं अक्सर कहता हूं कि नागरिकों को न ही सरकार का दबाव और न ही उसकी अनुपस्थिति महसूस होनी चाहिए. गरीबों को ऐसा नहीं लगना चाहिए कि उनके संकट के समय कोई उनकी मदद के लिए नहीं था. सरकार वहीं मौजूद होनी चाहिए जहां जरूरी है, पर जीवन के हर पहलू में उसे दखल नहीं देना चाहिए. अगर 2047 तक मेरा मिशन पूरा होता है, तो आम मानव के जीवन में सरकार नहीं होगी. उसे अपना जीवन जीने की स्वतंत्रता होगी, अपने सपने के उड़ान भरने के लिए पूरा आसमान होगा.

इस ईज ऑफ लिविंग के लिए हमने 40,000 से ज्यादा अनावश्यक अनुपालन समाप्त किए. हम यह पक्का करने का प्रयास कर रहे हैं कि आम मानव को किसी भी सरकारी दफ्तर में न जाना पड़े, कतार में न खड़ा होना पड़े, चाहे बिजली का बिल हो, या हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, प्रॉपर्टी का काम या छात्रवृत्ति. ऐसे दर्जनों काम अब ऑनलाइन किए जा सकते हैं. अब आप रेलवे स्टेशनों पर कतारें नहीं देखेंगे. दुनिया बदल चुकी है.

ईज ऑफ लिविंग का मतलब ऐसी सेवाओं का विस्तार भर नहीं है. ईज ऑफ लिविंग तभी बेहतर होती है जब गरीब और मिडिल क्लास की जेब में पैसा होता है. हमारी सरकार की योजनाएं पैसा बचाने में कैसे लोगों की मदद कर रही हैं, यह अपने आप में केस स्टडी है. 2014 में आपको 2 लाख रुपए वार्षिक आय पर कर देना होता था. आज 7 लाख रुपए से कम कमाने वाले लोगों को एक रुपए का भी टैक्स नहीं देना पड़ता. इसके कारण नागरिक प्रत्यक्ष कर के रूप में 2.5 लाख करोड़ रुपए बचाते हैं.

कई बार सरकार डिस्काउंट देती है, पर आम मानव को पता भी नहीं चलता. उदाहरण के लिए पिछले 10 वर्षों में अकेले रेलवे टिकटों पर 4.5 लाख करोड़ रुपए का डिस्काउंट दिया गया है. गरीब और मिडिल क्लास ने यह धन बचाया.

स्वच्छ भारत अभियान भी धन बचाने में गरीब और मिडिल क्लास की मदद कर रहा है. इस अभियान के कारण कई बीमारियों का फैलना रुका है. एक अध्ययन से पता चला कि स्वच्छ भारत अभियान हर वर्ष 60,000 करोड़ रुपए से ज्यादा बचाने में गरीबों की मदद कर रहा है. अन्यथा उन्हें यह धन इन बीमारियों का इलाज करवाने पर खर्च करना पड़ता.

इसी तरह आयुष्मान भारत योजना ने 1 लाख करोड़ रुपए बचाने में गरीबों की मदद की, जो उन्हें अस्पताल की देखभाल पर खर्च करने पड़ते. सरकार जन औषधि केंद्र चला रही है, जहां हम क्वालिटी से समझौता किए बिना उन्हीं दवाइयों पर 80 प्रतिशत तक डिस्काउंट देते हैं. इन केंद्रों के कारण गरीबों और मिडिल क्लास ने 30,000 करोड़ रुपए बचाए, जो उन्हें दवाइयों पर खर्च करने पड़ते.

मोबाइल डेटा को लीजिए. दस साल पहले मोबाइल डेटा की कीमत थी 250 रुपए प्रति जीबी. आम मानव आज जितने जीबी का इस्तेमाल करता है, उसको देखते हुए उस कीमत पर उनका मासिक बिल 4,000-5,000 रुपए से ऊपर होता. अब भारत में मोबाइल डेटा की दर करीब 10 रुपए प्रति जीबी है. परिणाम यह है कि मोबाइल पर हर महीने लगभग 3,000-4,000 रुपए की, या हर वर्ष लगभग 50,000 रुपए की बचत हो रही है.

कुछ दिन पहले हमने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की. सरकार हर परिवार को अपने घरों में सोलर पैनल लगाने के लिए 78,000 रुपए की सहायता दे रही है. हमने इस योजना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्री शुरू कर दी और कुछ ही हफ्तों के भीतर 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने आवेदन किए हैं. ज्यादा आवेदक मिडिल क्लास परिवार हैं, जिनके पास एक एसी, 2-3 पंखे, शायद एक फ्रिज और वाशिंग मशीन हैं. इसलिए उन्हें 300 यूनिट बिजली की जरूरत होती है. अब ये 300 यूनिट उन्हें मुफ्त मिलेगी. इसके अलावा, सरकार अतिरिक्त सौर बिजली खरीद लेगी और हर परिवार को आमदनी का एक स्रोत देगी.

मेरे लिए यह बहुत आसान था कि मैं करदाताओं की गाढ़े पसीने की कमाई से खैरात बांटता और वाहवाही बटोरता. लेकिन हमारी सरकार ने दिखाया है कि धन बचाने में लोगों की सहायता करके उनके जीवन को आसान बनाया जा सकता है. यह रास्ता थोड़ा कठिन हो सकता है, पर लंबे समय के लिए और देश के हित में यही रास्ता है. मुझे इसके लिए भले ज्यादा कड़ी मेहनत करनी पड़े, पर मैंने यह रास्ता इसलिए चुना है क्योंकि मैं आपके बच्चों के हाथों में समृद्ध भारत सौंपना चाहता हूं.

अगर आप हमारे राजकाज के मॉडल को समझना चाहें तो आपको पीएसयू सेक्टर के बदलावों को देखना चाहिए. अब तक बहुत कम पीएसयू देश के लिए उपयोगी रहे हैं, ज्यादातर बर्बादी ही लाए. जिस तरह उनकी परिकल्पना की गई थी, उसी में यह निहित था.

पिछली सरकारों के शासन के दौरान बीएसएनएल और एमटीएनएल दोनों बर्बाद हो गए थे. एचएएल भी. एलआईसी के बारे में भी झूठ फैलाए गए. आज क्या स्थिति है? आज बीएसएनएल मेड इन इंडिया 5जी की शक्ति से आगे बढ़ रहा है. आज एयर इंडिया का विस्तार उसकी नई भूमिका में हो रहा है. एचएएल में रिकॉर्ड मैन्यूफैक्चरिंग हो रही है, रिकॉर्ड राजस्व उत्पन्न हो रहा है. एचएएल के पास अब एशिया की सबसे बड़ी हेलिकॉप्टर बनाने वाली फैक्टरी है. आज एलआईसी भी प्रति दिन ज्यादा मजबूत बन रहा है.

हमारी सरकार के प्रभावी राजकाज के कारण आज ज्यादातर पीएसयू रिकॉर्ड प्रतिफल दर्ज कर रहे हैं और उनमें निवेशकों का विश्वास भी दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है. दस साल पहले इन पीएसयू का निवल लाभ लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपए था. अब यह दोगुना होकर लगभग 2.50 लाख करोड़ रुपए है. दस वर्षों में पीएसयू की शुद्ध संपत्ति 9.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 70 लाख करोड़ रुपए हो गई है. जब आप राष्ट्र को पहले रखते हैं, यही परिणाम आपको मिलते हैं. परिवार को पहले रखिए, और आपको पता ही है परिणाम क्या होते हैं.

हमारे राजकाज का एक और बड़ा पहलू भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस रहा है. हर एजेंसी भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है. ईडी को देखिए. 2014 तक पीएमएलए के तहत 1,800 मामले दर्ज किए गए थे. पिछले 10 साल में 4,700 मामले दर्ज किए गए हैं. 2014 तक मात्र 5,000 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की गई थीं. पिछले 10 वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्तियां अटैच की गई हैं.

ईडी ने बड़ी संख्या में टेरर फाईनैंसिंग, साइबर क्राइम और नार्कोटिक्स से जुड़े अपराधियों का गिरफ्तार किया है. हजारों करोड़ रुपए की संपत्तिया अटैच की गई हैं. कई नौकरशाहों के विरुद्ध ईडी कार्रवाई और नकदी की बरामदगी ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है. जब इतनी फुर्ती से कार्रवाई की जाती है, तो स्वाभाविक ही कुछ लोग परेशान और नाराज होते हैं. इसीलिए वे दिन-रात मोदी को गाली देने का अभियान चला रहे हैं. देश भी देख रहा है. उनकी नीति, इरादे और प्रतिबद्धता संदेह के घेरे में है. राष्ट्र उनके साफ कह रहा है, "सो सॉरी."

चुनाव का समय है. इसलिए विपक्ष के हमारे मित्र कागजों पर सपने रचने में व्यस्त हैं. लेकिन मोदी सपनों से आगे देखता है और संकल्प के साथ आगे बढ़ता है. मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि आने वाले पांच साल भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना देंगे.

आने वाले पांच साल अनिश्चित दुनिया में स्थिर, सक्षम और मजबूत भारत की गारंटी देंगे. आने वाले पांच साल भारत के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे. आने वाले पांच साल भारतीय रेलवे का कायाकल्प कर देंगे. आने वाले पांच साल बुलेट ट्रेनों और वंदे भारत ट्रेनों के विस्तार के साल होंगे. आने वाले पांच साल वाटरवेज के अभूतपूर्व उपयोग के साल होंगे.

आने वाले पांच सालों में आप भारत के रक्षा निर्यात को नया रिकॉर्ड बनाते देखेंगे. आने वाले पांच सालों में आप भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को उड़ान भरते देखेंगे. आने वाले पांच सालों में आप देश के युवाओं के लिए नए क्षेत्रों को उभरता देखेंगे. आने वाले पांच सालों में आप सौर ऊर्जा को हर घर में पहुंचता देखेंगे. आने वाले पांच सालों में आप भारत में ईवी मैन्यूफैक्चरिंग की रिकॉर्ड वृद्धि देखेंगे. आने वाले पांच सालों में आप सेमीकंडक्टर और हाइड्रोजन मिशनों का जमीन पर असर देखेंगे. और आने वाले पांच सालों में आप निर्णायक नीतियां और फैसले लेते भी देखेंगे.

यह और इससे ज्यादा पूरा करने के लिए मैंने बहुत पहले काम शुरू कर दिया था. यह आगे चलकर खुलने वाली चीज है, इसलिए इसके बारे में अभी नहीं बोलूंगा. मैं इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में फिर आऊंगा और तब विस्तार से इनकी चर्चा करूंगा.

नरेंद्र मोदी, भारत के प्रधानमंत्री

उपहार अगले पांच साल के

प्रगतिशील विकास का वादा करते हुए, प्रधानमंत्री ने तीसरे कार्यकाल के लिए अपना एजेंडा बताया

> भारत वैश्विक स्तर पर तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाएगा

> अनिश्चित दुनिया में, भारत एक स्थिर, सक्षम और मजबूत ताकत होगा

> हमारे बुनियादी ढांचे में उछाल को नई ऊंचाइयां मिलेंगी

> बुलेट ट्रेन, वंदे भारत सेवाओं के विस्तार के साथ भारतीय रेलवे में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा

> भारत के जलमार्गों का अभूतपूर्व उपयोग देखने को मिलेगा

> सेमीकंडक्टर, हाइड्रोजन मिशन का जमीन पर दिखेगा असर

> अंतरिक्ष क्षेत्र उड़ान भरेगा; गगनयान की सफलता इसे सुनिश्चित करेगी

> नए क्षेत्र युवाओं के लिए अवसर खोलेंगे

> हर घर तक पहुंचेगी सौर ऊर्जा

> ईवी मैन्युफैक्चरिंग में रिकॉर्ड वृद्धि

> रक्षा निर्यात नए कीर्तिमान स्थापित करेगा

> निर्णायक नीतियां और निर्णय हमारे भविष्य को आकार देंगे

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