काकू नखाटे: जिन्होंने बैंक ऑफ अमेरिका को बनाया भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का ठिकाना

काकू नखाटे के समूचे चमकदार करियर के दौरान उनकी मां की एक सलाह ने रौशनी दिखाने का काम किया: "अपना माप-तौल खुद अपने से ही करो और हरेक दिन बेहतर करने के लिए जी-जान लगा दो"

बैंक ऑफ अमेरिका की प्रेसिडेंट और कंट्री हेड काकू नखाटे
बैंक ऑफ अमेरिका की प्रेसिडेंट और कंट्री हेड काकू नखाटे

काकू नखाटे ने कई साल से बैंक ऑफ अमेरिका (बीओए) को भारतीय बाजार में दिलचस्पी रखने वाले विदेशी निवेशकों का अंतिम ठिकाना बना दिया है—मसलन, 2020 में फेसबुक के 5.7 अरब डॉलर के निवेश के लिए रिलायंस जियो का रास्ता तैयार करना. इसी तरह इन्होंने भारतीय स्टार्ट-अप्स को भी रास्ता खोजने में मदद की.

मगर बैंक ऑफ अमेरिका की प्रेसिडेंट और कंट्री हेड काकू नखाटे को सबसे ज्यादा गर्व तब होता है जब वे भारत के नेट जीरो लक्ष्य में अच्छा योगदान दे सकने वाले सौदे हासिल करती हैं. बैंक ऑफ अमेरिका की निवेश बैंकिंग शाखा बीओएफए सिक्योरिटीज ने हाल में मलेशिया की दिग्गज ऊर्जा कंपनी पेट्रोनास की अक्षय या नवीकरणीय ऊर्जा शाखा जेनटारी को अपने 1.5 अरब डॉलर भारतीय हरित हाइड्रोजन/अमोनिया प्लेटफॉर्म एएम ग्रीन में निवेश करने की सलाह दी, जिसका लक्ष्य 2030 तक सालाना 50 लाख टन ग्रीन अमोनिया का उत्पादन करना है.

नखाटे कहती हैं, "यह हमारे और हमारे देश के लिए गर्व का विषय है. अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में यह हमारा 11वां सौदा है और अब 70 फीसद बाजार हिस्सेदारी पर हमारा नियंत्रण है." बीओए ने 2021 में एक मानक सौदे को अंजाम दिया, जिसमें टीपीजी राइज क्लाइमेट को टाटा मोटर्स में उसके इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार के लिए 1 अरब डॉलर का निवेश करना था.

नखाटे सस्टेनेबिलिटी या सतत विकास को न केवल निवेश बैंकिंग बल्कि कॉर्पोरेट बैंकिंग और पूंजी बाजारों से भी जोड़ने के बैंक के मिशन को आगे बढ़ा रही हैं. उनका बैंक सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड लोन (एसएलएल) प्रदान करने में बाजार का अगुआ है. उधार लेने वाले अगर उनके ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और राजकाज) लक्ष्यों को पूरा करते हैं, तो बैंक उन्हें कम ब्याज दरों पर धन की पेशकश करता है.

इस तरह एलऐंडटी को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी से जुड़े पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों के साथ 15 करोड़ डॉलर का एसएलएल जारी किया गया. नखाटे की अगुआई में बैंक के खालिस मुनाफों में भारत 17 से 18 फीसद का योगदान देता है. उनके समूचे चमकदार करियर के दौरान उनकी मां की एक सलाह ने रौशनी दिखाने का काम किया. सलाह थी "अपना माप-तौल खुद अपने से ही करो और हरेक दिन बेहतर करने के लिए जी-जान लगा दो."

हरी-भरी धरती के प्रति नखाटे की प्रतिबद्धता समुदाय को वापस देने के उनके विश्वास से जुड़ी है. यह वह सबक है जो उन्होंने अपने माता-पिता से सीखा. यही वह मूल्य है जिससे उन्होंने अपनी तनख्वाह का पहला चेक दृष्टिहीनों के लिए काम कर रहे एनजीओ को दान कर दिया था.

उनके मातहत बीओए मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय में बच्चों के म्यूजियम को प्रायोजित कर रहा है. वे कहती हैं, "हम बच्चों को सांस्कृतिक शिक्षा सुलभ करवाने के लिए कार्यशालाएं लगाने की दिशा में काम कर रहे हैं." बैंक ने पंचतंत्र के अरबी संस्करण कलीला व दिक्वना के 15वीं सदी में किए गए फारसी अनुवाद अनावर-ए-सुहैली की अनमोल पांडुलिपि बहाल करने के लिए भी सहायता दी है.
 

फाल्गुनी नायर
 

बेटी अद्वैता ने फाल्गुनी को यूनानी कवि सी.पी. कैफेवी की एक कविता 'इथाका' से रू-ब-रू कराया, जिसने उनके दिलोदिमाग की खिड़कियां ही खोल दीं. कविता की पंक्तियां कुछ इस प्रकार थीं—इथाका हमेशा अपने दिमाग में रखो/लक्ष्य तक पहुंचना तुम्हारी किस्मत तय करेगा/लेकिन यात्रा में कोई हड़बड़ी न दिखाना—और इन्होंने फाल्गुनी को एहसास कराया कि मंजिल की तुलना में वहां तक पहुंचने का सफर कहीं ज्यादा मायने रखता है.

फाल्गुनी नायर, संस्थापक और सीईओ, नायका

और इस तरह 'नायका' के साथ उनके सफर की शुरुआत हुई. यह एक ओमनी चैनल ब्यूटी रिटेल कंपनी है, जिसकी स्थापना फाल्गुनी ने अपने जीवन का अर्धशतक पूरा करने से कुछ समय पहले 2012 में की थी. जब 2021 में उन्होंने आइपीओ लॉन्च करने का फैसला किया, तो इसे 82 गुना अधिक सब्सक्राइब किया गया और इसके जरिए कंपनी ने 53.5 अरब रुपए जुटाए. फाल्गुनी कहती हैं, "महिलाओं के जरिए स्थापित नए जमाने की डिजिटल देसी कंपनी के पब्लिक होने का यह एक ऐतिहासिक क्षण था."

आज नायका टाइम की 100 सबसे प्रभावशाली कंपनियों में शामिल है. फाल्गुनी 2022 में लगातार चौथे साल फोर्ब्स इंडिया की दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शामिल हुईं और ब्लूमबर्ग 50 में भी उन्हें जगह मिली. 2022 में ईवाइ आंत्रप्रेन्योर ऑफ द इयर का खिताब उनके हाथ में था.

फाल्गुनी के लिए यह उनकी व्यक्तिगत पहचान है. कोटक महिंद्रा के साथ एक इनवेस्टमेंट बैंकर के तौर पर अपने 2 साल के सफल करियर से मुंह मोड़कर उद्यमिता में कदम रखना विश्वास की छलांग थी. वे कहती हैं, "लेकिन मैं हमेशा से एक ऐसा उद्यम बनाना चाहती थी जिसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व हो."

उनके इस नए सफर के पहले कुछ साल उतार-चढ़ाव भरे रहे. ब्रांड सौदों पर बातचीत से लेकर पैकिंग-शिपिंग ऑर्डर तक और उपभोक्ता अनुसंधान तक कई रुकावटें भी आईं. वे बताती हैं, "अक्सर ऐप क्रैश हो जाता था. कई बार जैसे ही हमारे ऑर्डर बढ़ते, सिस्टम साथ देना बंद कर देता."

लोग ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं पर आसानी से भरोसा नहीं करते. इसलिए नायका ने अपने कैटलॉग में प्रामाणिकता पर जोर दिया और सिर्फ अधिकृत रिसेलर के साथ काम किया. आज नायका बड़ी कंपनी बन चुकी है. नायका फैशन, नायका मैन और सुपरस्टोर—एक बी2बी उद्यम है.

परिवार फाल्गुनी की यात्रा का अभिन्न हिस्सा है. पति संजय से उनकी मुलाकात बिजनेस स्कूल में हुई थी, वे निवेश बैंकर भी हैं. जुड़वां बच्चे अद्वैता और अंचित अब व्यवसाय में मां की मदद करते हैं.

- चुमकी भारद्वाज

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