हिना नागराजन: शराब बनाने वाली कंपनी वो सीईओ जो लेडी चीफ से बिजनेस लीडर बनीं

डियाजियो इंडिया का लक्ष्य 2025 तक 50 फीसद महिला कार्यबल हासिल करना है. महिला प्रमुख होने से बिजनेस लीडर तक की यात्रा तय कर हिना अब इस दिशा में बदलाव कर रही हैं

स्त्री शक्ति बिजनेस
हिना नागराजन, एमडी और सीईओ, डियाजियो इंडिया; सदस्य, डियाजियो ग्लोबल एग्जीक्यूटिव कमेटी; गैर-कार्यकारी निदेशक, बीपी पीएलसी

वर्ष 2021 में हिना नागराजन जब डियाजियो इंडिया की सीईओ बनीं तो अल्कोबेव (अल्कोहल या शराब बनाने वाले) उद्योग के साथ-साथ देश में भी हलचल मच गई. वे कहती हैं, ''अल्कोबेव उद्योग में महिला सीईओ के नाते मेरी सराहना की कई मीडिया रिपोर्टों से लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई और मेरा फोन तथा लिंक्डइन बधाई संदेशों से भर गए थे. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से यह बदलाव आया कि वे 'महिला प्रमुख' से 'बिजनेस लीडर' बन गईं.'' 

महिलाओं के लिए अवसर पैदा करने की प्रबल पैरोकार नागराजन कार्यस्थल पर सबके समावेश और विविधता कार्यक्रमों में योगदान देती हैं. सबका समावेश व्यक्तिगत लक्ष्य से बढ़कर अब कंपनी के अनाधिकारिक वर्क एथिक में बदल गया है. ''भारत में सबसे बड़ी अल्कोबेव कंपनी की अगुआ महिला के नाते मैं महिला श्रेणी को नया आकार देना चाहती हूं और कंपनी को विविध प्रतिभाओं और उपभोक्ताओं के लिए खोलना चाहती हूं, जो खास अनुभवों का आनंद लेते हैं.''

डियाजियो इंडिया का लक्ष्य 2025 तक 50 फीसद महिला कार्यबल हासिल करना है. नागराजन कहती हैं, ''इसके लिए हमने विभिन्न नेतृत्व भूमिकाओं में महिलाओं को नियुक्त करके ऊपर से नीचे बदलाव लाने का दृष्टिकोण अपनाया है.'' नागराजन 30 साल से एफएमसीजी उद्योग में हैं. भारत में डियाजियो का मैनेजमेंट देखने के अलावा नागराजन डियाजियो वैश्विक डिजिटल परिवर्तन पहल स्टीयरको में भी हैं. वे भारतीय विज्ञापन मानक परिषद के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की सदस्य हैं.

लगभग सभी कामयाब व्यावसायिक यात्राओं की तरह, उनकी यात्रा भी मजबूत वैल्यू सिस्टम की नींव पर खड़ी है, ''और यह आकांक्षा, सक्रियता (जोखिम लेना और कंफर्ट जोन से बाहर निकलना) और सीखने और बढ़ने की इच्छा से शुरू होती है. मैं खुद से लगातार कहती हूं कि कभी हार न मानो.'' नागराजन ने उसी तरह की बाधाओं का सामना किया, जिनका सामना महिलाएं आमतौर पर अपने पेशे में करती हैं, चाहे वह मातृत्व के साथ काम का संतुलन बैठाना हो या पारंपरिक बाधाओं को तोड़ना हो. उनका उद्देश्य प्रभावशाली और अर्थपूर्ण जीवन जीना है.
 
                                                                                                                                                                     —चुमकी भारद्वाज

आज भी डेजी चितिल्लापिल्ली को याद है कि कैसे उनके पिता पूरे छह साल तक स्कूल बस में बैठाने के लिए उनके साथ आया करते थे. वह तिरुवनंतपुरम में उनके नए स्कूल का पहला दिन था. जब वे स्कूल पहुंचीं तो कंडक्टर ने उनसे कहा था, ''बस इन तीन लड़कियों के पीछे-पीछे चलते रहना.'' उन्होंने वैसा ही किया. लेकिन उन्हें ये देखकर बड़ी हैरानी हुई कि तीनों लड़कियां स्कूल से बाहर चौड़ी, व्यस्त सड़क पर आ गई थीं.

वे बमुश्किल ही उनका पीछा कर पा रही थीं और उनके आंसू निकल आए. लेकिन जल्द ही वे सभी दूसरे गेट पर पहुंच गए. डेजी याद करती हैं, ''मैंने देखा कि 6 फुट 1 इंच लंबे मेरे पिता वहां खड़े थे. उन्होंने मुझे बस में बैठाया लेकिन यह भी सुनिश्चित किया कि मैं खुद अपने रास्ते पर चलूं.'' डेजी अब सिस्को, इंडिया ऐंड सार्क के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. इस तरह की परवरिश ने किसी से प्रभावित हुए बिना निर्णय स्वयं लेने की क्षमता विकसित की.

डेजी चितिल्लापिल्ली, सिस्को इंडिया ऐंड सार्क

जब डेजी 12वीं कक्षा में थीं, तो उनका इरादा टीचिंग में करियर बनाने का था. लेकिन उन्होंने होली एंजल्स में अपनी सीनियर फ्रीडा के कहने पर इंजीनियरिंग एंट्रेंस परीक्षा दी. फ्रीडा ने स्कूल टॉपर होने के कारण डेजी को इसमें हिस्सा लेने का सुझाव दिया था. डेजी ने इसे पास कर लिया और आगे चलकर तिरुवनंतपुरम के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक किया. 1995 में 22 वर्ष की उम्र में उन्हें पुणे में विप्रो में नौकरी मिल गई. वे 1997 में बेंगलूरू में सिस्को में आ गईं.

जब कोविड महामारी विकराल रूप ले चुकी थी तब डेजी ने अगस्त 2021 में सिस्को इंडिया प्रमुख के तौर पर पदभार संभाला. वे कहती हैं, ''इसने मुझे लीडर के तौर पर उभरने का मौका दिया. जब आप चारों ओर अस्पष्टता के बीच नेतृत्व ग्रहण करते हैं, तो किसी डेटा और नतीजे को ध्यान में रखे बिना निर्णय लेने की क्षमता भी निखारते हैं.''

कोविड ने भारत में स्वास्थ्य, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया. डेजी कहती हैं, ''इसका मतलब है कि भारत सिर्फ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एक नहीं होगा, बल्कि तकनीकी खर्च भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं की तरह होगा. अगर आप टेक क्षेत्र में हैं तो यहां अवसरों की कोई कमी नहीं है.''
                                                                                                                                                                     —अजय सुकुमारन

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