नयनतारा, ज़ोया अख्तर और गुनीत मोंगा : एक्टिंग, डायरेक्शन और प्रोडक्शन का परफेक्ट कॉकटेल
नयनतारा, ज़ोया अख्तर और गुनीत मोंगा फिल्म इंडस्ट्री में एक भरोसेमंद स्तम्भ की तरह उभरकर सामने आई हैं

नयनतारा, 39 वर्ष, अभिनेत्री
फिल्म निर्माता, उद्यमी
दक्षिण की सभी भाषाओं में फिल्में करने वाली नयनतारा को हिंदी सिनेमा के दर्शक बखूबी पहचानते हैं. 'लेडी सुपरस्टार’ कहलाने वाली नयनतारा ने शायद ही कभी कोई इंटरव्यू दिया हो, उनकी फिल्म का प्रोमोशन भी फीका ही रहता है. अपनी बॉलीवुड डेब्यू जवान से जुड़ी किसी भी महफिल में वे नजर नहीं आईं.
नयनतारा को एक अभिनेत्री के तौर पर काम करते 20 साल पूरे हो गए हैं. बचपन में उनका नाम डायना मरियम कुरियन था जिसे बाद में उन्होंने बदल लिया. जहां कलाकारों को एक अदद ब्रेक और हिट के लिए कई साल इंतजार करना पड़ता है, वहीं नयनतारा को शुरुआत में ही ब्रेक (और हिट भी) मिला.
2014-15 के आसपास अनामिका और माया जैसी सुपरहिट फिल्मों के साथ वे दर्शकों की चहेती बन गईं. इसके बाद तो फिल्मों का तांता लग गया- जैसे डोरा, अराम, कोलामावु कोकिला, नानुम राउडी धन और इमाइका नोडिगल. पिछले साल उनके पास अपनी दो फिल्में थीं—कनेक्ट और अन्नपूर्णानी.
लेकिन उनका सफर इतना आसान भी नहीं रहा है. उनका निजी जीवन स्थानीय मीडिया के निशाने पर रहा है. उनकी फिल्म कोलाइयुथिर कालम ट्रेलर लॉन्च के दौरान जहां दर्शकों की तालियां बटोर रही थी, वहीं अभिनेता राधा रवि ने नयनतारा के बारे में अपमानजनक बातें कहीं.
अगले ही दिन नयनतारा ने इन टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए ऐक्टर्स एसोसिएशन से पूछा कि आंतरिक शिकायत समिति गठित करने पर उनकी क्या योजना है. नयनतारा आज भी इस तरह की बातों का सामना करने का साहस रखती हैं. किसकी मजाल है कि उनके बारे में उल्टा-सीधा बोल पाए?
—आदित्य श्रीकृष्ण
जोया अख्तर, 50 वर्ष
फिल्मकार
बिजनेस टुडे के मोस्ट पावरफुल विमेन समिट ऐंड अवॉर्ड्स में जोया अख्तर ने तालियों के बीच कहा, ''मैं अपने जेंडर को अल्पसंख्यक नहीं मानती.’’ यही वजह है कि जोया की महिला किरदार हमेशा जगमगाती हैं चाहे वह दहाड़ की जातिगत पूर्वाग्रह झेल रही पुलिसकर्मी हो, मेड इन हेवन की गर्भवती दुल्हन, या तलाश की सेक्स वर्कर. 2017 में उन्होंने रीमा कागती के साथ टाइगर बेबी फिल्म्स शुरू किया.
जोया अपनी फिल्मकारिता पर लेबल चस्पां करने से बचती हैं, पर यह नजरअंदाज कर पाना मुश्किल है कि उनका काम जटिल जगहों में राह तलाशती महिलाओं के अनुभवों को कितनी बारीकी से पकड़ता है. जोया की दुनिया में कला को उसके रचयिता से अलग नहीं किया जा सकता.
वे कहती हैं, ''आप हर उस चीज में होते हैं जो आप करते हैं.’’ अपने 15 साल लंबे करियर में जोया ने महज पांच फीचर फिल्मों का निर्देशन किया. लेकिन जब भी उनकी फिल्म रिलीज होती है, आम तौर पर धमाके के साथ होती है. वे कई अभिनेताओं की विशलिस्ट में हैं.
उनकी लोकप्रियता महज पारिवारिक विरासत का नतीजा नहीं है. अपनी पहली फिल्म लक बाइ चांस (2009) के लिए छह अभिनेताओं ने उन्हें ठुकरा दिया, जिसके बाद उन्होंने अपने भाई फरहान से बात की. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, पर उनके आगमन की इत्तला तो दे ही दी. गली बॉय के साथ उस आगमन का चौतरफा नोटिस लिया गया. वे कहती हैं, ''मुझे वही करना होता है जो मैं करना चाहती हूं. यह मुझे थोड़ा-सा डराता है.’’
गुनीत मोंगा, 40 वर्ष
फिल्म प्रोड्यूसर
आप इस दुनिया में सांस के साथ और नाम के बगैर आते हैं. इसके बाद नाम के साथ और सांस के बगैर जाते हैं.’’ स्वामी गौर गोपाल दास के ये शब्द गुनीत मोंगा के दिल में बसे हैं. वे कहती हैं, ''हमारी पसंद ही हमें परिभाषित करती है, और मेरी पसंद है अच्छे किस्से सुनाना.’’
आज कई शीर्षक उनके नाम हैं—गैंग्ज ऑफ वासेपुर I और II (2012), द लंचबॉक्स, शाहिद (2013), मसान (2015), सूराराई पोटरू (2019), पगलैट (2021), और द एलीफैंट व्हिस्परर्स (2022), जो भारत की पहली ऑस्कर विजेता डॉक्यूमेंटरी शॉर्ट फिल्म बनी. अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों के जरिए भारतीय फिल्मों को दुनिया के नक्शे पर लाने की उनकी फितरत ने उन्हें 'इंडी सिनेमा की रानी’ का खिताब दिलाया.
मोंगा प्रोडक्शन कोऑर्डिनेटर के अपने दिनों से बहुत आगे आ गई हैं. उन्होंने अनुराग कश्यप फिल्म्स के साथ शुरुआत की, जहां उन्होंने वासन बाला (पेडलर्स) और नीरज घेवान (मसान) सरीखे फिल्मकारों की पहली फीचर फिल्मों के लिए धन जमा किया. बाद में उन्होंने अपने बैनर सिख्या एंटरटेनमेंट के तले दसविदानिया (2008) बनाई. उस वक्त वे महज 25 की थीं.
मीटू आंदोलन उनके लिए फैसले का क्षण था. वे कहती हैं, ''जितना भी मेरी पहुंच में है, मैं और ज्यादा महिलाओं को मौका देना चाहती हूं.’’ इस तरह सुधा कोंगारा (सूराराई पोटरू), रायका जेहताब्ची (पीरियड. एंड ऑफ सेंटेंस) और कार्तिकी गोंसाल्वेज (द एलीफैंट व्हिस्परर्स) के साथ प्रोजेक्ट शुरू हुए.
मोंगा की अभी शुरुआत ही है. वे कहती हैं, ''मैं भारत को बेहतरीन ढंग से दुनिया के नक्शे पर रखना चाहती हूं.’