तकनीक के तुर्रम खां
बिट्स पिलानी अव्वल दर्जे की तकनीकी शिक्षा मुहैया कर रहा जो भारत की तकनीकी निपुणता का प्रतीक है. यह उस उद्यमिता की भावना का भी परिचायक है जो यह जताती है कि 'हां हममें है कर दिखाने का माद्दा’.

भारत के बेस्ट कॉलेज 2023
इंजीनियरिंग (प्राइवेट)
1 बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ऐंड साइंस पिलानी
निजी क्षेत्र की कोई एक संस्था इंजीनियरिंग की अच्छी तालीम देने में लगातार शीर्ष आइआइटी के बराबर आंकी जाती रही है, तो वह है बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ऐंड साइंस (बिट्स या बीआइटीएस) पिलानी. प्रतिष्ठित उद्योगपति जी.डी. बिरला ने वर्ष 1900 के दशक के शुरू में जब राजस्थान के इस सुदूर कोने में छोटा-सा स्कूल खोला, तब उन्होंने उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के एक केंद्र का सपना देखा था. वह संस्था धीरे-धीरे बढ़कर मानविकी और इंजीनियरिंग के कोर्स की पेशकश करने वाले उच्च शिक्षा के एकाधिक कॉलेजों में विकसित हुई.
1964 में फिर इन्हीं संस्थानों को एक जगह करके एक अनूठी संस्थागत रचना का नाम दिया गया, जिसे हम आज अंतरराष्ट्रीय स्तर की डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी के रूप में जानते हैं. शुरुआत में ही बिट्स पिलानी ने अमेरिका में बोस्टन के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ हाथ मिलाया. इसने सेमेस्टर प्रणाली, कोर्स का मॉड्यूलर ढांचा, सतत और आंतरिक मूल्यांकन, लेटर ग्रेडिंग सरीखी प्रणालियां अपनाईं. इसने उद्योग से रिश्ते भी कायम किए, जिसने शिक्षा के अभिन्न अंग के रूप में 'प्रैक्टिस स्कूल’ के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया.
साल दर साल बिट्स पिलानी ने योग्यता के आधार पर दाखिल छात्रों को उच्चतम गुणवत्ता की तकनीकी शिक्षा प्रदान की, जो भारत में तकनीकी निपुणता और 'हां हम करके दिखा सकते हैं’ की उद्यमशील भावना का प्रतीक है. अंडरग्रेजुएट कोर्स में छात्रों को भर्ती करते समय पूरी पारदर्शिता पक्की की गई. इसके लिए बिट्स ने दाखिले के वास्ते छात्रों का इम्तिहान लेने वाली ऑनलाइन परीक्षा बिटसैट का गठन किया.
इसी साल इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रूमेंटेशन में बीई के साथ ग्रेजुएट होकर निकले और एनटीयू सिंगापुर की हायस्केल लैब, तथा पॉलीगॉन की तरफ से जॉब ऑफर हासिल करने वाले अंशुल शुक्ल कहते हैं, ''कॉलेज जीरो परसेंट अटेंडेंस नीति के साथ छात्रों को जो स्वतंत्रता देता है, वह बेजोड़ है. कॉलेज छात्रों को अपने यहां मौजूद निश्चित टाइमटेबल या शिक्षकों या कोर्स से बांधता नहीं और छात्र अपनी रुचियों के आधार पर करीब 40 फीसद कोर्स चुन सकते हैं.’’
बिट्स उद्योग की मांगों को ध्यान में रखते हुए कोर्स में लगातार संशोधन पर बहुत ध्यान देता है. बिट्स पिलानी के वाइस-चांसलर प्रो. वी. रामगोपाल राव कहते हैं, ''हमारे पाठ्यक्रम में लगातार नवोन्मेषी और नवीनतम परिवर्तन किए जाते हैं जिससे उनमें उद्योग के भीतर हो रहे टेक्नोलॉजी के ताजातरीन विकास और रुझान प्रतिबिंबित हों.’’
संस्थान का मुख्य जोर लचीले पाठ्यक्रम के साथ छात्रों में उद्यमशील मानसिकता विकसित करने पर है. राव कहते हैं, ''उद्यमशीलता का निर्माण और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने वाला इन्क्यूबेशन बिट्स पिलानी के पाठ्यक्रम के मूल में ही है.’’ 2004 में टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेटर की स्थापना की गई थी. यह नवाचार, व्यावसायीकरण और उद्यमशीलता के पारिस्थितिकी तंत्र को परिभाषित करने और सहारा देने में बेहद मददगार साबित हुआ.
टॉप 10 बिट्सियन के उद्यमों की मार्केट कैप 65 अरब डॉलर है. संस्था से विभिन्न उद्यमों के 7,500 संस्थापक और 6,300 सीईओ निकले हैं. यहां के छात्रों में से 3,400 अकादमिक जगत में और 33 फीसद विदेशों में बसे हैं. बिट्स पिलानी ने बीते तीन साल में 80 और अपनी स्थापना के बाद 170 स्टार्ट-अप को इन्क्यूबेट किया.
शोध और शिक्षण में साझेदारी के उपक्रम के तहत पैठ बढ़ाने के लिए बिट्स पिलानी ने देश और विदेश के कई विश्वविद्यालयों और उद्योगों के साथ एमओयू पर दस्तखत किए. कैंपस का इंटरनेशनल प्रोग्राम ऐंड कोलैबरेशन डिविजन शीर्ष विदेशी यूनिवर्सिटी/उद्योगों के साथ करार करने को बढ़ावा देता है ताकि छात्र वहां ऑफ-कैंपस थीसिस/सेमेस्टर एब्रॉड प्रोग्राम (एसएपी) में पढ़ सकें. एसएपी या सैप के तहत क्यूएस/टीएसई विश्व रैंकिंग के शीर्ष 400 में आने वाले विदेशी विवि से क्रेडिट ट्रांसफर पर विचार किया जा सकता है, फिर भले ही उस यूनिवर्सिटी और बिट्स पिलानी के बीच एमओयू हो या न हो.
संस्था ने शोध में गहरी रुचि रखने वाले शिक्षकों को भर्ती कर अपनी अनुसंधान क्षमता के निर्माण पर बहुत अधिक ध्यान दिया. कुल 1,800 से ज्यादा पीएचडी छात्रों और 150 पेटेंट के साथ 33 फीसद लेख अंतरराष्ट्रीय सह-लेखकों के साथ लिखे गए हैं और 25 साइटेशन तथा 65 फीसद प्रकाशन शिमागो क्यू1/क्यू2 रैंक की पत्रिकाओं में हैं. संस्थान ने कई संस्थाओं के साथ छात्रों, शिक्षकों और सूचना के आदान-प्रदान की सहकारी व्यवस्थाएं कायम की हैं. हर साल करीब 30 फीसद छात्र ऑफ-कैंपस थीसिस, सैप कार्यक्रम और इंटर्नशिप करने के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों में जाते हैं.
गुरु वाणी
‘‘सफल उद्यमियों के निर्माण के लिए बिट्स पिलानी का नजरिया बहुत व्यावहारिक है. इस साल उसे 1,200 प्री-प्लेसमेंट ऑफर मिले, जो शायद तमाम इंजीनियरिंग कॉलेजों में सबसे ज्यादा है. इसके अलावा शोध क्षमताओं को मजबूत करने पर नए सिरे से जोर दिया जा रहा है’’
प्रो. वी. रामगोपाल राव, वाइस-चांसलर
पूर्व छात्र की राय
‘‘बिट्स पिलानी टेक्नोलॉजी पढ़ाने से कहीं आगे बढ़कर है. मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैं बिट्स और आइआइटी दोनों का छात्र रह चुका हूं. पिछले 55 साल में बदला यही है कि छात्रों, कक्षाओं और शिक्षकों की संख्या बढ़ गई. मगर नहीं बदला तो वह पढ़ाई का माहौल, छात्रों का उत्साह और रचनात्मकता’’
कमोडोर (रिटा.) हर्ष भार्गव, बीई (ऑनर्स), 1968 बैच
सबसे लोकप्रिय कोर्स
बिट्स का डुअल डिग्री प्रोग्राम
इसमें छात्र पहली इंटीग्रेटेड डिग्री चार साल में और दूसरी 12 से 18 महीने में अलग से पूरी कर सकते हैं
छात्र की राय
‘‘बिट्स पिलानी पढ़ाई से इतर जाकर छात्रों को कैंपस संभालने में शामिल करते हुए उनका बहुआयामी विकास करता है. मुझे स्टूडेंट वेलफेयर डिविजन में काम करते हुए नवोन्मेषी विचारों को लागू करने का सुखद अनुभव है ’’
अंशल शुक्ल, बीई (इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड इंस्ट्रूमेंटेशन), इस साल ग्रेजुएट हुए और प्लेसमेंट भी हासिल किया.