फर्क पड़ता है
जीवन और समाज को बेहतर बनाना मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज का एक सामूहिक लक्ष्य है. सुविख्यात स्कूल ऑफ सोशल वर्क दरअसल संस्थान के उसी दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण अंग है

भारत के बेस्ट कॉलेज 2023 : सोशल वर्क
नं. 1 टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआइएसएस), मुंबई
मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआइएसएस/टिस) के लिए ''मेकिंग अ डिफरेंस'' कोई लच्छेदार जुमला भर नहीं. यह ऐसा मूलमंत्र है जिसे संस्थान अपने हरेक छात्र के भीतर गहराई से पैवस्त कर देता है. यही बात इस प्रतिष्ठित संस्थान को औरों से अलहदा बनाती है. यह छात्रों का सपना है और यहां वे सपने को हकीकत में बदलने का हुनर सीखते हैं.
यही बात होटल मैनेजमेंट के छात्र रहे 25 वर्षीय रौनक गायकवाड़ को टीआइएसएस की ओर खींच लाई. गायकवाड़ नागपुर में क्लाउड किचन चला रहे थे और उनके भीतर ''समाज को कुछ लौटाने'' की इच्छा बलवती हो उठी. और इस भावना को आगे बढ़ाने के लिए टिस से बेहतर जगह भला दूसरी क्या हो सकती है जो पिछले एक दशक से इंडिया टुडे के सर्वश्रेष्ठ कॉलेजों के सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान पर है. गायकवाड़ स्कूल ऑफ सोशल वर्क के दलित और जनजातीय अध्ययन और ऐक्शन प्रोग्राम के छात्र हैं. उन्हें हाल ही में किसी के जीवन में थोड़ा-सा असर छोड़ने का वक्त अवसर मिला. अपने फील्ड वर्क के तहत उन्होंने वंचित युवाओं के लिए समर्पित एनजीओ तरुण सदन के लिए काम करते हुए 18 साल के एक नौजवान को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में दाखिला दिलाया ताकि वह काम और पढ़ाई दोनों साथ-साथ जारी रख सके.
कोविड-19 की वजह से लगभग दो साल के लंबे व्यवधान के बाद कैंपस में 2022 में जाकर सामान्य स्थिति बहाल हो पाई. यह महामारी के बाद पहला ऐसा साल रहा, जब पूरे सत्र के दौरान कक्षाएं परिसर में ही लगीं. स्कूल ऑफ सोशल वर्क के डीन बिपिन जोजो के लिए संस्थान के सबसे अधिक मांग वाले मास्टर्स प्रोग्राम को 400 से ज्यादा छात्रों के साथ चलाना आसान नहीं था. इनमें म्यांमार के भी 19 छात्र थे. इसके लिए उनके सामने कई स्तर की चुनौतियां थीं. परिसर में फैकल्टी के सदस्यों को पहले जैसी सहजता से वापस लाना था; दो साल से बंद पड़े डेस्कटॉप कंप्यूटरों को बदलना पड़ा और पाठ्येतर गतिविधियां जो बंद हो गई थीं, उन्हें फिर से शुरू करना था. साथ ही वार्षिक सार्वजनिक व्याख्यान शृंखलाओं और समीक्षा जैसे उत्सवों को भी फिर से सुचारू रूप से चलाना था.
हालांकि, टिस ने 2020 की नई शिक्षा नीति के अनुसार सामाजिक कार्य में स्नातक के लिए कोर्सतैयार किया जो पिछले साल की उसकी सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण पहल रही. जोजो कहते हैं, ''यह बहस और विचार-विमर्श के लिए एक सक्रिय और आकर्षक समय था और हमारे सामने एक बहुत बड़ा काम है.'' टिस को नए स्नातक कोर्स के लिए लगभग 19,000 अर्जियां मिली हैं जिनमें से 30-40 छात्रों का पहला बैच अगस्त में आ जाएगा.
स्कूल ऑफ सोशल वर्क में मानसिक स्वास्थ्य प्रोग्राम की छात्रा श्रेया वारियर और उनके जैसे अन्य कई न केवल यहां की लाइब्रेरी की बहुत प्रशंसा करते हैं बल्कि वे छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से संबोधित करने वाले संस्थान के परामर्श केंद्र के भी मुरीद हैं. वारियर बताती हैं, ''पिअर सपोर्ट प्रोग्राम में प्रथम वर्ष के छात्रों को तनाव से निबटने के गुर सिखाए जाते हैं.''
सार्थक बनर्जीपुरी के माता-पिता यहां के ही विद्यार्थी रहे हैं. कोविड-19 महामारी के दौरान सार्थक के अनुभवों ने उन्हें माता-पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए यहां आने को प्रेरित किया. सार्थक विशेष रूप से छात्र-शिक्षक संबंधों के मुक्त-प्रवाह की सराहना करते हैं, जिसके चलते अक्सर परिसर के बाहर एक ही चाय की टापरी पर दोनों समूहों को आपस में किसी विषय पर गहन चर्चा करते देखा जा सकता है. वे कहते हैं, ''आपको जब भी और जिस चीज पर जरूरत महसूस होती हो, उनसे (शिक्षकों) संपर्क कर सकते हैं और वे आपके लिए तैयार मिलेंगे. इसने मुझे और ज्यादा करने के लिए प्रेरित किया है.'' वारियर जोड़ती हैं, ''यहां कोई हायरार्की या कि पदानुक्रम नहीं है. दरवाजा वास्तव में सभी के लिए खुला है.'' पिछले शैक्षणिक वर्ष में स्कूल ऑफ सोशल वर्क ने 131 छात्रों की मदद की और उन्हें 61.1 लाख रुपए की वित्तीय सहायता मुहैया की.
ऐसा कोई एक पहलू जिसमें टिस औरों से बहुत आगे नजर आता है, तो वह है कैंपस में विविधता. संस्थान न केवल विभिन्न क्षेत्रों के छात्रों का स्वागत करता है बल्कि उनके अनुभव को भी समृद्ध बनाता है. जोजो कहते हैं, ''यहां एक छोटे भारत के दर्शन होते हैं. अमीर, गरीब, देहाती, शहरी और विभिन्न जातियों, वर्गों, यौन और लिंग उन्मुखताओं के छात्र इस बात को महसूस कर सकते हैं, अपना मत रख सकते हैं और किसी भी विषय पर खुलकर बात कर सकते हैं.''
फील्ड वर्क असल में सोशल वर्क कोर्स की आत्मा है और इसके लिए कोर्स के 30 प्रतिशत अंक आरक्षित हैं. दो साल के कोर्स में छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य 900 घंटे फील्ड वर्क में बिताने होते हैं. इसके दौरान वे अनाथालयों और गोद लेने के केंद्रों से लेकर एनजीओ और यहां तक कि पुलिस स्टेशनों तक के साथ काम करते हैं. सामाजिक कार्य का दायरा बहुत व्यापक हो जाता है. शीतल गामरे और मनीषा रामदासमगर दोनों ही इसके बड़े प्रशंसक हैं. वे कहते हैं, ''किताबों में सीखे गए सिद्धांतों को जमीन पर उतारना अनुभवों से भरा होता है. हर हक्रते हम फील्ड पर्यवेक्षक से मिलते हैं और जो कुछ सीख रहे हैं उस पर अपने अनुभव साझा करते हुए उनके साथ चर्चा करते हैं.'' सरकारी एजेंसियों और विभागों, गैर-सरकारी संगठनों और कॉर्पोरेट्स से टिस का निरंतर जुड़ाव यह पक्का करता है कि यहां के छात्रों को बढ़िया प्लेसमेंट मिले. संस्थान अपनी 16 फील्ड ऐक्शन परियोजनाओं का भी विस्तार कर रहा है. इनमें बाल और किशोर मार्गदर्शन केंद्र, महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर हस्तक्षेप के लिए रिसोर्स सेंटर और टुवर्ड्स एडवोकेसी, नेटवर्किंग ऐंड डेवलपमेंटल ऐक्शन (टीएएनडीए/टांडा) शामिल हैं.
गुरु वाणी
''हमारे प्रोग्राम बदलती वास्तविकताओं को देखते हुए तैयार किए जाते हैं. हम कोर्सों की बराबर समीक्षा करते हैं, छात्रों और पूर्व छात्रों की राय पर गौर करते हैं. (क्लास) टीचिंग में मिल-जुलकर पढ़ाई, साथ में मेहनत वाला फील्ड वर्क हमारी यूएसपी है''
बिपिन जोजो, डीन, स्कूल ऑफ सोशल वर्क, टीआइएसएस, मुंबई
नई पहल
टीआइएसएस का स्कूल ऑफ सोशल वर्क अपना पहला अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम चार साल का बैचलर इन सोशल वर्क शुरू कर रहा है. यहां मास्टर्स और पीएचडी कोर्स पहले से चल रहे हैं
îस्कूल ऑफ सोशल वर्क के सेंटर फॉर कम्युनिटी ऑर्गेनाइजेशन ऐंड डेवलपमेंट प्रैक्टिस ने हाल ही में जलपुरुष के नाम से विख्यात मैग्सेसे पुरस्कार विजेता डॉ. राजेंद्र सिंह के साथ एम. सुब्रह्मण्यम एंडोवमेंट लेक्चर सीरीज शुरू की है
पूर्व छात्रा की राय
''मेरा बचपन टीआइएसएस ने ही गढ़ा है क्योंकि मेरी मां पहले यहां पढ़ीं और फिर यहीं पढ़ाने लगीं, करीब-करीब मेरी ही तरह. उन्होंने और टीआइएसएस की पूर्व डायरेक्टर अरमैती देसाई ने मुझे सिखाया कि आप हमेशा उस समाज को केंद्र में रखें जिसके साथ काम कर रही हैं और उनकी जरूरत के लिहाज से हर चीज को आकार दें. इन्हीं वजहों से टीआइएसएस अद्वितीय है.''
जेरू बिलिमोरिया
सोशल आंत्रप्रेन्योर और चाइल्डलाइन के अग्रणी लोगों में शामिल
छात्र की जबानी
''टीआइएसएस मुंबई में आप कभी भी अपनी किसी भी जरूरत के लिए शिक्षकों से संपर्क कर सकते हैं और वे आपकी मदद भी करते हैं. इसने मुझे ज्यादा प्रयास करने के लिए प्रेरित किया''
सार्थक बनर्जीपुरी
छात्र, टीआइएसएस स्कूल ऑफ सोशल वर्क