कायम है मुस्कराहट
दंत चिकित्सा के क्षेत्र में अत्याधुनिक सुविधाओं और व्यावहारिक दृष्टिकोण के मामले में नई दिल्ली स्थित मौलाना आजाद दंत चिकित्सा विज्ञान संस्थान (मेड्स) का कोई सानी नहीं.

भारत के बेस्ट कॉलेज 2023 : डेंटल साइंसेज
1 मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज, दिल्ली
सोनाली आचार्जी
नई दिल्ली स्थित मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (मेड्स) में बैचलर ऑफ डेंटल स्टडी (बीडीएस) तृतीय वर्ष के छात्र सभ्य शर्मा का आत्मविश्वास कैंपस में मिले अनुभव का ही नतीजा है. पिछले साल, संस्थान ने 4,00,000 से ज्यादा मरीजों का इलाज किया. शर्मा कहते हैं, ''हम औपचारिक प्रशिक्षण के बाद तीसरे वर्ष से ही मरीज देखने लगते हैं.
इससे आप स्नातक होने तक अच्छा-खासा व्यावहारिक प्रशिक्षण हासिल कर चुके होते हैं. कॉलेज में ही एक साल की इंटर्नशिप अनिवार्य है और तीसरे वर्ष से ही हमें प्रत्येक विभाग में तैनात किया जाने लगता है. इसका फायदा यह होता है कि आपको अलग-अलग तरह के अनुभव हासिल होते हैं. और आपके लिए यह तय करना आसान होता है कि आप किसमें कुशलता हासिल करना चाहते हैं.’’
पूर्व छात्र भी पूरे उत्साह के साथ बताते हैं कि कैसे उन्हें मेड्स में खुलकर सीखने का मौका मिला. 2015 की बीडीएस स्नातक और फिलहाल एम्स भुवनेश्वर में सीनियर रेजिडेंट डॉ. निदा नैयर कहती हैं, ''इतने सारे मरीजों से मिलना आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है. यही नहीं, आपको सही मायने में पेशेवरों का एक मजबूत नेटवर्क बनाने का भी मौका मिलता है’’
देश में सबसे बड़े दंत चिकित्सा प्रदाता के नाते, यह छात्रों को उचित बुनियादी ढांचा और अत्याधुनिक उपकरण मुहैया कराता है जो किसी अन्य डेंटल कॉलेज में आसानी से उपलब्ध नहीं होते. मौलाना आजाद दंत चिकित्सा विज्ञान संस्थान मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा दे रहा है. प्रिंसिपल डॉ. संगीता तलवार कहती हैं, ''अभी, भारत में करीब 95 फीसद दंत चिकित्सा सामग्री और प्रौद्योगिकी आयातित होती है.
धन्यवाद तो प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया पहल को दिया जाना चाहिए, जिससे स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भरता हासिल करने में रुचि बढ़ी है. इस साल हमारे संस्थान को डेंटल टेक्नोलॉजी इनोवेशन के लिए एक नोडल सेंटर बनाया गया है.’’ मेड्स ने हाल में भारत का पहला समर्पित डेंटल टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब शुरू किया है, जिसके तहत आठ तकनीक पहले ही इनक्यूबेट की जा चुकी हैं.
डॉ. तलवार बताती हैं, ''उदाहरण के तौर पर हमने एक प्रोजेक्ट को इनक्यूबेट किया जो अल्ट्रासाउंड-आधारित डेंटल इमेजिंग पर केंद्रित है. दूसरा, प्रोजेक्ट बायो-सिरेमिक को फिलिंग मटीरियल के रूप में इस्तेमाल करने के तरीके खोजने से जुड़ा था. एक स्वदेशी इम्प्लांट पहले ही बाजार में आ चुका है.’’
एक मजबूत सोशल आउटरीच प्रोग्राम के तहत छात्रों को समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार किया जाता है. मेड्स का राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण केंद्र दंत चिकित्सकों और अन्य चिकित्सा पेशेवरों को धूम्रपान करने वाले मरीजों को पहचानने और यह लत छुड़ाने में उनकी मदद करने के लिए प्रशिक्षित करता है. डॉ. तलवार के मुताबिक, ''तंबाकू इस्तेमाल का पहला संकेत ओरल कैविटी से मिलता है, और ऐसे में दंत चिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. हम अपने छात्रों को तंबाकू नियंत्रण प्रोटोकॉल के लिए प्रशिक्षित करते हैं.’’
मेड्स का मुख्य उद्देश्य दंत चिकित्सकों को इस तरह प्रशिक्षित करना है कि वे नवाचार की तरफ बढ़ने के साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का भी सम्मान करें. जैसा, डॉ. तलवार कहती हैं, ''दंत चिकित्सा सिर्फ कैविटी भरने और गहरी सफाई करने से कहीं अधिक जिम्मेदारी का काम है.’’
गुरु वाणी
‘‘पाठ्यक्रम नए सुझावों के लिए स्वीकार्यता का नजरिया रखता है. दंत चिकित्सा विज्ञान में होने वाले विकास और आवश्यकताओं के अनुसार मेड्स लगातार स्वयं को सचेत और उन्नत रखता है’’
डॉ. संगीता तलवार, प्रिंसिपल, मेड्स
पूर्व छात्रा की राय
‘‘नौकरियों में व्यक्तिगत विकास और प्रतिष्ठा के मामले में मेड्स का छात्र होने से असर पड़ता है. मेड्स के बराबरी के कम ही कॉलेज हैं. यहां हर विभाग स्पेशिलाइजेशन है, जो भारत के मौजूदा डेंटल कॉलेजों में आज भी आम बात नहीं है’’
डॉ. निदा नैयर
(बीडीएस स्नातक 2015) एम्स, भुवनेश्वर में सीनियर रेजिडेंट
छात्र की राय
‘‘फैकल्टी की गुणवत्ता अच्छी है, अध्यापक - छात्र अनुपात भी 1-30 है जिससे पढ़ाई में मदद मिलती है. कुछ सबसे बेहतरीन कंपनियां अपने डेंटल उपकरण टेस्टिंग के लिए हमें भेजती हैं’’
सभ्य शर्मा
बीडीएस छात्र, तृतीय वर्ष, मेड्स
पहल
मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज ने बोस्टन में टीयूएफटी यूनिवर्सिटी के साथ अकादमिक समझौता किया है. इसके तहत परस्पर अध्यापक-छात्र अदला-बदली और शोध कार्य किया जा रहा है
संस्थान की योजना दिल्ली यूनिवर्सिटी के साथ सभी क्लिनिकल कोर्सेज में पीएचडी प्रोग्राम शुरू करने की है. डॉ. संगीता तलवार कहती हैं कि इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और कुछ ही महीनों में ये प्रोग्राम शुरू हो जाएंगे
संस्थान डेंटल हाइजीन कोर्स भी शुरू करने जा रहा है, साथ ही छात्रों को डेंटल ऑपरेटिंग रूम असिस्टेंट के तौर पर भी प्रशिक्षण देने की योजना है