दोटूक फैसला
अव्वल लॉ कॉलेज ने तीन साल में छात्रों के प्रवेश की संख्या दोगुनी कर दी और नए अत्याधुनिक कोर्स भी शुरू किए. अगला कदम वैश्विक रैंकिंग में जगह बनाना है

भारत के बेस्ट कॉलेज 2023 : लॉ
नं. 1 नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलूरू
अजय सुकुमारन
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआइयू) में बीते साल विस्तार का नारा गूंजता रहा. संस्थान जुलाई में नया अकादमिक सत्र 1,200 छात्रों के साथ शुरू करेगा, जो 2019 में विकास की राह पर कदम रखते वक्त छात्रों की गिनती के मुकाबले दोगुने हैं. इसका अनिवार्य तकाजा था कि सभी क्षेत्रों में इसी के अनुपात में बढ़ोतरी हो—मसलन, संकाय के सदस्यों की संख्या साल भर पहले के 45 के मुकाबले अब 68 है.
तिस पर भी भारत के इस अव्वल लॉ संस्थान ने अभी महज आधा रास्ता ही तय किया है. वाइस-चांसलर प्रो. सुधीर कृष्णास्वामी कहते हैं, ''हमारी वृद्धि की प्रस्तावित योजना यह है कि 2028 तक हम 2,200 से 2,400 के बीच छात्रों की अधिकतम संख्या पर पहुंच जाएंगे. यह जुलाई 2023 में हमारे छात्रों की संख्या के मुकाबले दोगुनी होगी.'' वृद्धि की यह रफ्तार उससे बिल्कुल अलग है जिसका एनएलएसआइयू अब तक अभ्यस्त रहा है. फिर भी यह वक्त की जरूरत थी. संस्थान 1988 में स्थापना के वक्त से ही कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में अगुआ रहा है.
मगर बीते पूरे तीन दशकों में यह पथप्रदर्शक होते हुए भी अपेक्षया छोटा और जैविक संस्थान था. वी-सी सुधीर कृष्णस्वामी कहते हैं, ''अहम यह है कि हम अपनी उत्कृष्टता को कायम रखते हुए अपने को बढ़ाने में कामयाब हुए.'' वे बताते हैं कि बात महज छात्रों और शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि उतनी ही व्यापक सामाजिक विविधता और अलग-अलग पृष्ठभूमियों से उनके आने की है. हाल के नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआइआरएफ) में एनएलएसआइयू के प्रदर्शन का एक प्रमुख घटक उसके शोध परिणाम थे, जो, कृष्णास्वामी के शब्दों में, ''उस किस्म के शिक्षकों से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है जिन्हें हम भर्ती करते रहे हैं.''
पढ़ाई-लिखाई में बीते साल दो अहम पहल की गईं. एक तो यूनिवर्सिटी संरचित इंटर्नशिप लेकर आई जिसमें छात्र उस अवधि के दौरान लॉ फर्म और सिविल सोसाइटी के संगठनों के साथ काम करते हैं. दूसरे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के विनियमन और नीतिशास्त्र, ब्लॉकचेन और क्रिप्टो सरीखी उभरती टेक्नोलॉजी में 5-8 कोर्स शुरू किए.
इस बीच यूनिवर्सिटी ने मुकदमेबाजी, कॉर्पोरेट लॉ की प्रैक्टिस और सिविल सोसाइटी क्षेत्र में विकल्पों का दायरा बढ़ाने के लिए प्लेसमेंट प्रक्रिया को पेशेवर बनाना शुरू किया. कृष्णास्वामी कहते हैं, ''आज ज्यादातर छात्र कॉर्पोरेट लॉ फर्म में नौकरी पर जोर दे रहे हैं. हम उस पर जोर नहीं देते...एक यूनिवर्सिटी होने के नाते हमारी भूमिका विकल्पों का दायरा बढ़ाने की है.''
बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर लाइब्रेरी को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया और बैठक क्षमता दोगुनी की गई. यह लाइब्रेरी परोपकारी सुधा मूर्ति के अनुदान से चलती है. कृष्णास्वामी कहते हैं, ''मेरी राय में यह आज हमें देश की सबसे बड़ी और बेहतरीन अकादमिक लाइब्रेरी में से एक बना देता है.'' इस परियोजना ने प्रशासन सहित यूनिवर्सिटी की अन्य शाखाओं के डिजिटल कायातंरण को भी रफ्तार दे दी.
मगर चुनौतियां कायम हैं. कृष्णास्वामी बताते हैं कि निजी विश्वविद्यालयों के विपरीत एनएलएसआइयू सरीखे सार्वजनिक संस्थान राजस्व और पूंजीगत वृद्धि में धन लगाने के लिए फीस पर निर्भर नहीं रह सकते. वे कहते हैं, ''हमें संसाधन उगाहने का ऐसा मॉडल खोजने की जरूरत है जिसमें यूनिवर्सिटी में धन लगाने के लिए दूसरे हितधारक आगे आएं. संसाधनों की चुनौती बनी हुई है, पर हमें आगे बढऩे से नहीं रोक पाई.'' ज्यादा प्रबुद्ध चुनौती छात्र संस्कृति की है—''एनएलएसआइयू को परंपरागत रूप से इसका फायदा मिला है. हमारे यहां बहुत अच्छी और सक्रिय छात्र संस्कृति है. यूनिवर्सिटी ज्यों-ज्यों बढ़ती जाती है, हमें इसे (छात्र संस्कृति को) बचाना और सुधारना होता है.'' कृष्णास्वामी मानते हैं कि एनएलएसआइयू कुछ सालों में अपने बढ़े हुए कद और शोध पर जोर के बूते ग्लोबल रैंकिंग के दरवाजे खटखटा पाएगी.
गुरु वाणी
''यूनिवर्सिटी के शुरुआती तीन दशकों में यह एक छोटा, मौलिक लेकिन बेहद कामयाब संस्थान रहा. मुझे लगता है, सबसे अहम बात यह है कि हमने अपनी उत्कृष्टता बनाए रखते हुए खुद को आगे बढ़ाया''
सुधीर कृष्णस्वामी, वाइस चांसलर, एनएलएसआइयू
पूर्व छात्र की राय
''मुझे एनएलएसआइयू में पढ़ने का सौभाग्य तब हासिल हुआ जब संस्थान कई बदलाव लाने वाले एन.आर माधव मेनन के नेतृत्व में था. छात्रों से उत्कृष्टता और विचारों की विविधता की उम्मीद की जाती है''
के. शशि किरण शेट्टी, एडवोकेट जनरल, कर्नाटक
उपलब्धियां
मजबूत एक्सटर्नशिप, जहां छात्र एक अवधि तक लॉ फर्म और सिविल सोसाइटी के संगठनों के साथ काम करते हैं
आधुनिकतम तकनीक से जुड़े कोर्स शुरू हुए, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) रेगुलेशन और एथिक्स, ब्लॉकचेन और क्रिप्टो
लाइब्रेरी बन गई पूरी तरह डिजिटल और बैठक क्षमता हुई दोगुनी. लगातार हो रहे हैं डिजिटल बदलाव
छात्र की राय
''एनएलएसआइयू ऐसी जगह है जहां आप सोचते हैं, चर्चा करते हैं और दूसरों से अपने विचार साझा करैते हैं. मुझे सिर्फ एनएलएसआइयू ही नहीं बल्कि उनसे भी सीखने का मौका मिला जो बाहर वकालत कर रहे हैं. मैंने कोर्स के चौथे साल में लीगल सर्विसेज क्लिनिक का नेतृत्व भी किया''
लक्ष्मी टी. नाम्बियार, बीए एलएलबी, बैच 2023