कड़वा यथार्थ
रूस से सस्ते कच्चे तेल का आयात फिलहाल राहत की बात है लेकिन भारत को अपना घरेलू उत्पादन भी बढ़ाना होगा

4 साल मोदी सरकार 2.0
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस
हरदीप सिंह पुरी, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री
वाकई तेल की खपत में भारी इजाफे के साथ देश में कच्चे तेल का आयात 2022-23 में 23.24 करोड़ टन हो गया, जो साल-दर-साल के हिसाब से 9.4 फीसद की बढ़त है. देश में तेल खपत की 80 फीसद जरूरतें आयात से पूरी होती हैं. सो, कीमत के मामले में यह 13 लाख करोड़ रु. (158.3 अरब डॉलर) की यानी साल-दर-साल के हिसाब से 31 फीसद की वृद्धि है.
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव बना रहा. वर्ष के दौरान यह प्रति बैरल 75 डॉलर से 130 डॉलर के बीच झूलता रहा है. लेकिन केंद्र सरकार ने पश्चिम की धमकियों के बावजूद, अधिक अनुकूल शर्तों पर तेल आयात करने के लिए रूस के साथ सौदे किए. रूस हाल के महीनों में सऊदी अरब की जगह भारत का कच्चे तेल का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है. युद्ध जारी रहने से भारतीय रिफाइनरियों के लिए भी अवसर पैदा हो रहा है. रूस से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर यूरोपीय संघ की रोक के बाद भारतीय रिफाइनरियां उनकी जगह लेने को आगे आई हैं. वित्त वर्ष 2023 के पहले 11 महीनों में भारत ने सात लाख करोड़ रु. (86.21 अरब डॉलर) के पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया, जो भारत के कुल कमोडिटी निर्यात का करीब 21 फीसद है.
युद्ध के आगाज के बाद में कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें बुलंदी पर थीं, अब वे ढलान पर हैं. फिर भी देश के कई हिस्सों में पेट्रोल अब भी 100 रु. प्रति लीटर से ज्यादा पर बिक रहा है. इससे केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का काम कठिन हो जाता है क्योंकि बढ़ती महंगाई में ईंधन की ऊंची कीमतों का बड़ा योगदान है.
पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू खपत 2022-23 में सालाना 10 फीसद बढ़कर रिकॉर्ड 22.23 करोड़ टन हो गईं. दरअसल देश ने इस वित्त वर्ष में सिर्फ 2.92 करोड़ टन कच्चे तेल का उत्पादन किया, जो सालाना आधार पर 1.7 फीसद कम है. यह संकेत है कि तेल में आत्मनिर्भरता की स्थिति में सुधार जरूरी है. पर निजी निवेश को इस ओर लाना चुनौती बना हुआ है.
सरकार को इस साल 30 मार्च तक कई बार अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली के लिए ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम के आठवें दौर के तहत 10 तेल और गैस ब्लॉक के लिए बोली लगाने की अवधि बढ़ानी पड़ी. साथ ही, प्रोत्साहन के तौर पर तेल खोज और उत्पादन कंपनियों को अपने कच्चे तेल को सरकारी रिफाइनर सहित देश की किसी भी कंपनी को बेचने की अनुमति दी गई है.
बड़ी उपलब्धि
16.8 लाख बैरल
कच्चे तेल का आयात रोजाना इस अप्रैल में रूस से किया गया. पश्चिम की धमकियों के बावजूद रूस अब भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है