शांति के वास्ते...

संयुक्त राष्ट्र दफ्तर से 'आइ स्टैंड फॉर पीस’ अभियान छेड़कर शांति का संदेश वैश्विक मंच पर ले गए, और युद्ध विरोधी भावनाओं को स्वर दिया.

श्री श्री रविशंकर
श्री श्री रविशंकर

ऊंचे और असरदार : रसूखदार

34 श्री श्री रविशंकर,  67 वर्ष 
फाउंडर, आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन

क्योंकि दूसरों की मदद करने की उनकी प्रतिबद्धता के बल पर आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने पिछले साल यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद राहत के व्यापक काम किए. इनमें यूरोप के नौ देशों में 22,342 शरणार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य सलाह, 650 से ज्यादा परिवारों को आश्रय, और 32,617 भोजन देना शामिल था

क्योंकि पिछले साल युद्ध की प्रेतछाया से घिरे माहौल में वे जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र दफ्तर से 'आइ स्टैंड फॉर पीस’ अभियान छेड़कर शांति का संदेश वैश्विक मंच पर ले गए, और युद्ध विरोधी भावनाओं को स्वर दिया 

क्योंकि वे स्वदेशी बीजों, वित्तीय साक्षरता और सोशल मीडिया मार्केटिंग के साथ प्राकृतिक खेती अपनाने में कर्नाटक के किसानों की मदद करते रहे हैं

फिजिक्स से मेटाफिजिक्स रविशंकर ने 1977 में भौतिक विज्ञान में बी.एससी. की पढ़ाई की. उन्हें बैंक की नौकरी मिली, पर उन्होंने अपने पिता के आशीर्वाद से वैदिक अध्ययन की पढ़ाई करना तय किया

क्योंकि दुनिया भर में आर्ट ऑफ लिविंग के 180 केंद्रों के साथ वे ध्यान और योग को पूरी दुनिया के लोगों तक ले जाने में सहायक रहे हैं

ग्रीन गुरु

35 सद्गुरु जग्गी वासुदेव, 65 वर्ष 

फाउंडर और प्रमुख, ईशा फाउंडेशन 

क्योंकि प्रकृति के प्रति सजग समाज के निर्माण के अपने मिशन के तहत उन्होंने पिछले साल 100 दिनों में मोटरसाइकिल से 27 देशों में 30,000 किलोमीटर की यात्रा की, जिसका उद्देश्य 'मिट्टी बचाओ’ आंदोलन का प्रचार करना था

'आकर्षक’ व्यक्तित्व के धनी: सरीसृप विशेषज्ञ सद्गुरु का दावा है कि उनकी सांपों के साथ हमेशा 'घनिष्ठ मित्रता’ रही है. जब वे बच्चे ही थे, तभी उनके गृहनगर में लोग अक्सर सांपों को बचाने के लिए उन्हें ही बुलाते थे

क्योंकि वे पर्यावरण संबंधी अपनी सभी पहलों पर पूरी तल्लीनता से काम करते हैं, चाहे भारत की तेजी से सिमटती नदियों को पुनर्जीवन देने के लिए 2017 में शुरू की गई 'रैली फॉर रिवर्स’ हो, या इससे पहले चलाया गया 'कावेरी कॉलिंग’ आंदोलन

क्योंकि वे सोशल मीडिया पर सबसे अधिक फॉलो किए जाने वाले आध्यात्मिक गुरु हैं, जिनके इंस्टाग्राम पर एक करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, और उनका काम नागरिकों और सरकारों दोनों को प्रेरित करता है. उनके 'रैली फॉर रिवर्स’ अभियान के आधार पर ही भारत सरकार ने पिछले साल 13 प्रमुख नदियों के कायाकल्प के लिए 19,000 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था.

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