ताकत इनके हाथ में

अफसरशाह का रोल सूचनाएं और सुझाव देने या विश्लेषण करने से कहीं आगे का होता है. सामाजिक जरूरतों और बदलावों के हिसाब से इसमें फेरबदल करना उनकी जिम्मेदारी है

डी.वाइ. चंद्रचूड़, 63 वर्ष, भारत के प्रधान न्यायाधीश
डी.वाइ. चंद्रचूड़, 63 वर्ष, भारत के प्रधान न्यायाधीश

ऊंचे और असरदार

10 : अफसरशाही

अफसरशाही एक तरह का ऐसा सामाजिक ढांचा है जो कानून बनाने के मकसद और उन्हें लागू करने के बीच की खाई को पाटता है. नीति निर्माण में बुनियादी और आधिकारिक भूमिका राजनैतिक कार्यपालिका और विधायिका ही निभाती हैं. लेकिन स्थायी कार्यपालिका की तरह अफसरशाही भी नीति निर्माण और क्रियान्वयन की प्रक्रिया में बेहद अहम रोल निभाती है. यह अपने साथ एक्सपर्टीज और इन्फ्रास्ट्रक्चर लेकर आती है जो नीति बनाने वालों के संकल्प को सामने लाने और उसे पूरा करने में मददगार बन सकती है.

लेकिन इस सबके अलावा अमल के जरिए कानून के फायदे समाज तक पहुंचाने के लिए सरकार के एजेंट के तौर पर काम करना उनका विशेषाधिकार भी है. नीतियों पर अमल पक्का करने का काम उन्हें सौंपा गया है. इस पर उनका नियंत्रण अहम है. वे चाहें तो किसी व्यापक दायरे वाले कानून को लागू किए जाने के दौरान उसे सब तक पहुंचा दें या फिर चंद लोगों तक समेट दें. इस तरह से अफसरशाह का रोल सूचनाएं और सुझाव देने या विश्लेषण करने से कहीं आगे का होता है. सामाजिक जरूरतों और बदलावों के हिसाब से इसमें फेरबदल करना उनकी जिम्मेदारी है. वर्षों में हासिल अपने व्यापक नजरिए के बूते वे नीतिगत बदलावों को ज्यादा लोकहितैषी बनाने में सक्षम होते हैं.

सरकार का कामकाज न सिर्फ बढ़ा है बल्कि कहीं ज्यादा तकनीकी और जटिल भी हो गया है. ऐसे में अब किसी एक व्यक्ति या ऑफिस को किसी प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. इन्हीं सब का नतीजा है कि जनता की इच्छा-आकांक्षाओं के माफिक सुचारु और सुव्यवस्थित शासन मुहैया कराने के लिए इधर के वर्षों में सचिवालय के तहत एग्जीक्यूटिव एजेंसियों का पूरा एक नेटवर्क खड़ा हो गया है.

1. डी.वाइ. चंद्रचूड़, 63 वर्ष, भारत के प्रधान न्यायाधीश

न्याय की तुला के शिखर पर

क्योंकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठों की कार्यवाहियों की लाइव-स्ट्रीमिंग करवाई, सरकार समेत कई हल्कों से कड़े विरोध का सामना करते हुए भी भारत में समलैंगिक विवाह को वैध बनाने सरीखे संवेदनशील मुद्दों पर सुनवाई की, फिर राज्यपालों को ''राजनैतिक'' क्षेत्र में दखल के खिलाफ खुलेआम चेतावनी दी, टीवी पर साक्षात्कारों में बेबाक ढंग से अपनी बात रखी. भारत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाइ. चंद्रचूड़ ने दिखा दिया कि उन मुद्दों पर अपने मन की बात कहने से नहीं डरते, जिन पर वे गहराई से विश्वास करते हैं

क्योंकि न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के मानदंड पक्के किए, एक न्यायाधीश की नियुक्ति को मंजूरी नहीं देने के पीछे केंद्र सरकार की वजहों को उजागर किया, एक न्यायाधीश की राजनीति से प्रेरित पदोन्नति को अवैध घोषित किया, एक फिल्म पर पाबंदी के लिए राज्य सरकार को फटकार लगाई. और यह सब करके उन्होंने वास्तव में लोकतांत्रिक मूल्यों की हिफाजत और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कठोर रुख अपनाया

क्योंकि नवंबर 2024 तक चलने वाले अपने कार्यकाल के साथ न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा लंबे समय तक काम करने वाले मुख्य न्यायाधीशों में से एक होंगे. शीर्ष अदालत में तकरीबन 10 न्यायाधीशों की नियुक्ति के अलावा संवैधानिक पीठों के गठन में भी न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की राय महत्वपूर्ण होगी. पिछले छह महीनों में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पीठों ने महाराष्ट्र सरकार की वैधता के अलावा केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच अधिकारों के बंटवारे की वैधता तय की

जल्दी उठने वाले न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ को सुबह जल्दी उठने की आदत है. वे तड़के 3.30 बजे ही बिस्तर छोड़ देते हैं

रेडियो स्टार उनकी मां ऑल इंडिया रेडियो के लिए गाती थीं, तो खुद न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने भी अपनी युवावस्था के शुरुआती वर्षों में रेडियो जॉकी के रूप में काम किया और 'प्ले इट कूल', 'डेट विद यू' और 'संडे रिक्वेस्ट' सरीखे शो होस्ट किए थे

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