झेल गए गुरु
इंडियन होटल्स कंपनी कारोबार के लिहाज से इस वक्त 2019-20 के मुकाबले 30 फीसद ज्यादा के स्तर पर हैं

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2023
कारोबार और अर्थव्यवस्थाः उठ खड़े होने का सामर्थ्य
संकट जो सहे: बुरे दौर और लॉकडाउन को झेला. पटरी पर लौटने और फिर से फलने-फूलने के लिए क्या कुछ करना होता है
कोविड महामारी का लोगों की जिंदगी और रोजी-रोटी पर विनाशकारी असर पड़ा. करीब 14 करोड़ लोग नौकरियों और काम-धंधों से हाथ धो बैठे. लाखों ने तनख्वाह में कटौती झेली. सबसे ज्यादा मार निजी और खास सेवाएं दे रहे उद्योगों पर पड़ी, मसलन, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, मनोरंजन और विमानन. अब वे बहाली की राह पर हैं और उठ खड़े होने के लिहाज से उन्होंने हमें बेशकीमती सबक सिखाए.
स्पाइसजेट ने व्यावसायिक उड़ानों में केवल कार्गो ले जाने का नया बिजनेस मॉडल अपनाया क्योंकि सवारियां तो ले नहीं जा पा रहे थे. सीईओ अजय सिंह बताते हैं कि इससे एयरलाइन किसी तरह खुद को जिंदा रख पाई, दवाइयां और पीपीई किट पहुंचाने का अहम दायित्व भी निभाया, सो अलग.
टाटा ग्रुप से जुड़े इंडियन होटल्स के एमडी और सीईओ पुनीत चटवाल ने कहा कि महामारी ने कंपनी के लिए अग्रिम मोर्चों पर काम कर रहे लोगों को खाना देने और होम डिलिवरी तथा होमस्टे सरीखे नई कारोबारी उपक्रमों को अपनाने का रास्ता खोला.
मल्टीप्लेक्स फर्म पीवीआर के लिए महामारी का मतलब था खर्चों में कटौती, धन उगाहने के नए तरीके खोजना और मजबूत बैलेंस शीट की खातिर नंबर दो कंपनी आइनॉक्स के साथ विलय करना.
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पुनीत चटवाल, एमडी और सीईओ, इंडियन होटल्स कंपनी
कारोबार के लिहाज से इस वक्त हम 2019-20 के मुकाबले 30 फीसद ज्यादा के स्तर पर हैं. पिछली तिमाही में हमारा मुनाफा किसी अव्वल वित्तीय वर्ष के मुकाबले में भी ज्यादा था
अजय सिंह, सीईओ, स्पाइसजेट
बिजनेस में हम फिर कोविड से पहले वाले स्तर पर पहुंच रहे हैं. मार्केट का मूड अच्छा है, डिमांड तगड़ी है और उसका खासा मुनाफा भी मिल रहा है
अजय बिजली, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, पीवीआर
मैं खुशकिस्मत था कि डेवलपर्स आगे आए और फोर्स मैज्योर (एक कानून) लागू किए बिना ही हमें रेंट में राहत मुहैया की. हम राइट्स इश्यू और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के जरिए फंड जुटा सकते हैं.
लचीलेपन से सबक: महामारी ने उन्हें जो सिखाया
पुनीत चटवाल
- आप एक बार अगर कुछ देते हैं तो वह दस गुना होकर आपके पास लौटेगा
- अपने लोगों का ध्यान रखें क्योंकि वही तो आपके मेहमानों का ख्याल रखते हैं
- छोटे और आसान रास्ते मत अपनाओ...वे फिर आगे चलकर बड़ी चुनौतियां खड़ी करते हैं
अजय सिंह
- संकट में मौका तलाशने की कोशिश करें. यह आपको आशावादी बनाए रखता है
- हमने अपने कारोबार में ऑटोमेशन की अहमियत समझी
- कभी यह मानकर मत चलें कि आपको तो बदतरीन दौर नहीं झेलना पड़ेगा
अजय बिजली
- वक्त अच्छा हो या बुरा, अपने स्टेकहोल्डरों का हमेशा ध्यान रखें
- पॉजिटिव बने रहने का दिखावा करने का कोई मतलब नहीं होता. आपको तो इसे आंकड़ों से साबित करना होता है
खास बातें
- विमानन कोविड के दौरान पूरी तरह बंद हो गए क्षेत्रों में था. पर ट्रेनों और ट्रकों की आवाजाही रुक जाने पर स्पाइसजेट ने कार्गो में मौका ताड़ा. चीन से दवाइयां और पीपीई किट लाई. बड़े जहाजों से खाद्य पदार्थ, सब्जियां और फूल पश्चिम एशिया भेजा. नए कारोबार के बूते वह पूरे स्टाफ को रोककर रख पाई
- इंडियन होटल्स ने अग्रिम मोर्चों पर जमे लोगों को खाना दिया. शुरुआत मुंबई के नायर अस्पताल से की. फिर दिल्ली, बेंगलूरू और चेन्नै के कुछ अस्पतालों को जोड़ा. महामारी के दौरान उसने 60 लाख खुराक बनाकर दिए
- ग्राहकों के कहने पर इंडियन होटल्स ने खाने की होम डिलिवरी शुरू की और 'एमा’ ब्रांड के तहत होमस्टे बनाए
- 2019 में दुनिया भर में बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा धन—कुल 42 अरब डॉलर—बटोरा गया. पीवीआर के सिनेमाघरों में 10 करोड़ लोग आ रहे थे. अचानक सब खत्म. सिनेमाघर सबसे पहले बंद और सबसे बाद में खुले. पीवीआर ने खर्चों पर ध्यान दिया. अजय बिजली कहते हैं कि ज्यादातर लोगों ने मेहनताने में 50 फीसद कटौती स्वीकार की