विशेषांकः कथानक कारसाज

स्याम ने महेशिंते प्रतिकारम के लिए सर्वश्रेष्ठ मौलिक स्क्रीनप्ले का राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता.

स्याम पुष्करण
स्याम पुष्करण

नई नस्ल 100 नुमाइंदे/सिनेमा

स्याम पुष्करण, 37 वर्ष, पटकथा लेखक


लेखक स्याम पुष्करण आज मलयालम फिल्मों के संभवत: सबसे रचनात्मक लोगों में  एक हैं. महेशिंते प्रतिकारम, थोंडीमुथलम दृक्सशियम, मायानदी, कुंबलंगी नाइट्स, रानी पद्मिनी और जोजी कुछ फिल्में हैं, जिनमें उनका योगदान है.

फहद फासिल आज भले स्टार अभिनेता हैं और उनकी हर फिल्म केरल के बाहर भी चर्चित होती है, पर उन्हें आम लोगों के बीच मकबूल बनाने में स्याम पुष्करण और उनके स्क्रीनप्ले का बड़ा हाथ है.

चाहे दिलीश पोथम की फिल्में हों, या आशिक अबू या मधु सी. नारायणन की, स्याम की पटकथाओं पर प्रशंसकों और आलोचकों ने खास तौर पर ध्यान दिया और उनका अध्ययन तथा विश्लेषण किया.

स्याम ने महेशिंते प्रतिकारम के लिए सर्वश्रेष्ठ मौलिक स्क्रीनप्ले का राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता. उनकी अगली फिल्म सहीद अराफात निर्देशित थंकम है, जिसके वे सह-निर्माता और लेखक हैं.
—आदित्य श्रीकृष्णा

फोन पर जिंदगी शूटिंग के दौरान स्याम को अपने फोन पर वीडियो शूट करना अच्छा लगता है. ऐसे ढेरों वीडियो वे अपने यूट्यूब चैनल 'भावना स्टूडियोज’ पर डाल देते हैं. संयोग से यह उनके एक सबसे शानदार सृजन महेश के स्टुडियो का नाम भी है

''मलयालम में हम काफी प्रयोग कर सकते हैं... लोग मसाला फिल्में देखते हैं पर उन्हें विचारशील फिल्में अच्छी लगती हैं’’
स्याम पुष्करण, इंडियन एक्सप्रेस से.

Read more!