विशेषांकः फौलादी है संकल्प

मीराबाई की जो बात मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, वह है उनकी मानसिक ताकत. बिल्कुल प्रतिकूल हालात में भी अपने में भरोसा बनाए रखना बेहद मुश्किल होता है. इसीलिए वे लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं

साइखोम मीराबाई चानू, 27 वर्ष, भारोत्तोलक, नोंगपोक काकचिंग, मणिपुर
साइखोम मीराबाई चानू, 27 वर्ष, भारोत्तोलक, नोंगपोक काकचिंग, मणिपुर

टोक्यो ओलंपिक में पोडियम पर पहुंचकर साइखोम मीराबाई चानू ने न केवल भारत के पदकों का खाता खोला, बल्कि ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली पहली वेटलिफ्टर भी बन गईं. रिकॉर्ड की किताबों में शानदार इबारत दर्ज करके मणिपुर की इस छोटी-सी लड़की ने साबित कर दिया कि वह कभी हार नहीं मानती. पांच साल पहले रियो ओलंपिक में वे क्लीन ऐंड जर्क में ठीक ढंग से एक भी लिफ्ट दर्ज करने में नाकाम रही थीं. टोक्यो की जीत ने रियो के उस प्रेत से उन्हें मुक्ति दिला दी. मगर अब उनकी नजरें और ऊंचे लक्ष्य पर जमी हैं—2024 के पेरिस ओलंपिक में सोना. यह असंभव नहीं है, खासकर उस लड़की के लिए जिसकी खेल के प्रति प्रतिबद्धता अकाट्य है और जो कोई भी त्याग करने को तैयार है.

रियो की पराजय के बाद उन्होंने मोबाइल फोन को तिलांजलि दे दी और अब भी बिरले ही उसका इस्तेमाल करती हैं. अलबत्ता जिंदगी के कुछ निश्चित रिश्ते हैं जिन्हें यह खेल रत्न विजेता कभी अनदेखा या विस्मृत नहीं करतीं. टोक्यो से लौटकर चानू ने उन ट्रक ड्राइवरों को तलाशा और उनसे मिलीं जो इस उदीयमान एथलीट के शुरुआती दिनों में नांगपोक काकचिंग के उसके घर से इंफाल स्थित खुमन लम्पाक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तक मुफ्त में लिफ्ट दिया करते थे और जिसकी बदौलत उनके प्रशिक्षण पर होने वाले खर्च में उन्हें खासी मोहलत मिली थी.

फुरसत के पल मीराबाई को खाली वक्त में कागज की कलाकृतियां और खाना बनाना बहुत पसंद है. नेहा कक्कड़ के गानों पर नाचने में भी उन्हें बड़ा आनंद आता है. खाने को लेकर पाबंदी के दिनों में छुप-छुपाकर पीत्जा खाना उन्हें कुछ उस अंदाज वाली खुशी देता है कि 'देखो, कैसा गच्चा दिया!'

तेजी भी, कंट्रोल भी

पायस जैन, 17 वर्ष, टेबल टेनिस खिलाड़ी, नई दिल्ली

टेबल टेनिस खेलना पायस जैन की तकदीर में बदा था. शुरुआत में भले उन्हें यह पसंद न रहा हो. वे कहते हैं, ''यह पूरी तरह मेरे मम्मी-पापा का प्लान था.'' उनके पिता जितेंद्र और मां श्वेता खिलाड़ी रहे हैं और दिल्ली में टेबल टेनिस फाउंडेशन अकादमी चलाते हैं. यहीं पायस भारत के सबसे संभावनाशील टेबल टेनिस खिलाड़ियों में से एक बनकर खिले. उनकी कामयाबियों में अंडर-17 के एकल वर्ग में विश्व नंबर 1 की रैंक और पुर्तगाल में 2021 वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप के अंडर-19 में कांस्य पदक शामिल हैं.

पायस नए युग के भारतीय एथलीट की नुमाइंदगी करते हैं, जिसे पता है कि खेल के शिखर पर पहुंचने के लिए क्या करना होता है. वे एसपीएआरक्यू (स्पीड, पॉवर, एजिलिटी, रिएक्शन और क्विकनेस) ट्रेनिंग लेते हैं और तंत्रिकापेशीय दक्षता बढ़ाने तथा चीनियों के दबदबे को परास्त करने की तरकीबें निकालने के लिए हाइ-टेक स्ट्रोब चश्मों का इस्तेमाल करते हैं. जैन कहते हैं, ''खेल विकसित हो रहा है. इसकी रफ्तार बहुत तेज हो गई है. अब कई नई तकनीकें आ गई हैं. आपको खेल के बीच में भी रणनीति बनाते रहना पड़ता है.''

जैन कोर्ट पर अपनी रफ्तार, टेबल से करीब खेलने, मजबूत बैक हैंड और स्पिन पैदा करने की काबिलियत के लिए जाने जाते हैं. उन्हें हाल में भारतीय खेल प्राधिकरण की टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना के तहत 2024 के पेरिस ओलंपिक के लिए विकसित किए जा रहे खिलाड़ियों के समूह में चुना गया है. यह बताता है कि उन्हें इस खेल के चमकदार सितारे की तरह देखा जा रहा है. 
—सुहानी सिंह

फिट मशीन 2020 में पायस ने महामारी के दौरान खेलते और प्रशिक्षण लेते हुए 18 किलो वजन कम किया. 2021 में तीन अंतरराष्ट्रीय पदकों सहित अपने शानदार प्रदर्शन का श्रेय वे अपनी फिटनेस को देते हैं

''उसके पास एक तो टेक्नीक बहुत अच्छी है और वह दबंगई के साथ खेलता है. उसने ऐसे ही तेवर बनाए रखे तो वह भारत के आला खिलाड़ियों में से एक बनेगा.''

शरत कमल अचंत, नौ बार के राष्ट्रीय टीटी चैंपियन

हिट मशीन

ऋषभ पंत, 24 वर्ष, क्रिकेटर, रुड़की

ऋषभ पंत पहले पहल तो एम.एस. धोनी के स्थानापन्न के तौर पर भारतीय टीम में आए. पंत ने अपने मौके हासिल किए, कामयाब हुए, फिसले और उसके बाद फिर उठ खड़े हुए. महज 24 की उम्र में वे भारत की कुछ मशहूर जीत के पथप्रदर्शक रहे हैं. क्रिकेट के मैदान में वे खतरनाक बल्लेबाज और पहले से कहीं बेहतर विकेटकीपर हैं, तो मैदान से बाहर वे प्रायोजकों की खुशी का सबब बन गए हैं. विरोधी टीम उनसे कितना डरती है, यह तब जाहिर हुआ जब इसी साल चेन्नै के पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने अपनी दूसरी पारी देर से घोषित की.

कप्तान जो रूट ने जो वजहें बताईं, उनमें से एक पंत थे, ''अगर वे एक सत्र भी बल्लेबाजी करते, तो चीजें काफी दिलचस्प हो सकती थीं. रन बनाने से रोकने के साथ-साथ विकेट लेने का दबाव मैं नहीं लेना चाहता था.'' कुछ ही हफ्तों पहले बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने ऑस्ट्रेलिया में ब्रिस्बेन के गाबा में भारत को मशहूर जीत के साथ सीरीज 2-1 से जीतने का रास्ता दिखाया था. वे आइपीएल की चर्चित टीम दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान भी हैं, जिसने उन्हें 16 करोड़ रुपए में अगले तीन साल के लिए बनाए रखा है.
—राहुल रावत

शतक पताका ऋषभ पंत भारत के इकलौते विकेटकीपर बल्लेबाज हैं जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में टेस्ट में शतक जमाए हैं


''पंत ने तीन ऐसी पारियां खेली हैं, जिन्होंने किसी टेस्ट की पूरी दिशा ही बदलकर रख दी...ज्यादातर क्रिकेटर तो अपने पूरे करिअर में ऐसी उपयोगी पारियां नहीं खेल पाते.''

इयान चैपल, पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान

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