विशेषांकः महत्वाकांक्षी हाइवे
भविष्य में अपने उद्यम को मुनाफे में लाने के लिए गर्ग और कालरा को खंडित मिल्कियत और मांग-आपूर्ति में मेल न होने सरीखी लॉजिस्टिक क्षेत्र की आम समस्याओं से पार पाने की जरूरत है.

नई नस्ल 100 नुमाइंदे/उद्यमी
दीपक गर्ग, 39 वर्ष
गजल कालरा, 35 वर्ष
सह-संस्थापक, रिविगो, गुरुग्राम
वाकई कॉफी के साथ बहुत कुछ हो सकता है. दो करीबी दोस्त दीपक गर्ग और गजल कालरा अपनी पसंदीदा कॉफी की चुस्कियां लेने के लिए क्या मिले कि रिविगो की स्थापना की राह खुल गई. यह टेक्नोलॉजी-समर्थ लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म है जिसकी स्थापना 2014 में हुई. गर्ग के मन में बहुत दिनों से एक रिले ट्रक मॉडल का विचार था, जिससे किसी भी ट्रक ड्राइवर को दो घंटे से ज्यादा सड़क पर न रहना पड़े.
गर्ग और कालरा ट्रक ड्राइवरों की बहुत कम तनख्वाह और बहुत लंबे समय तक लगातार काम करने सरीखी परेशानियां समझने के लिए सड़क यात्रा पर निकल पड़े. उन्होंने रिविगो को 'मानवीय’ लॉजिस्टिक्स ब्रांड के तौर पर पेश किया. ई-कॉमर्स, कोल्ड चेन, फार्मा और एफएमसीजी ग्राहक तेजी से इस स्टार्ट-अप की तरफ खिंचे चले आए.
वारवर्ग पिंकस और एसएआइएफ पार्टनर्स निवेशक के तौर पर आ गए. हाइवे में आए सुधार से रिविगो को कामकाज बड़े पैमाने पर बढ़ाने में मदद मिली और 2019-20 में आमदनी 1,080 करोड़ रुपए पर पहुंच गई. भविष्य में अपने उद्यम को मुनाफे में लाने के लिए गर्ग और कालरा को खंडित मिल्कियत और मांग-आपूर्ति में मेल न होने सरीखी लॉजिस्टिक क्षेत्र की आम समस्याओं से पार पाने की जरूरत है.
कहां से सूझा मैकिंजी में एक लॉजिस्टिक्स रिपोर्ट पर काम करते हुए गर्ग ने पाया कि ट्रकों की बिक्री भारत की वृद्धि की राह के अनुरूप नहीं है. इस गुत्थी को सुलझाने की तलाश में रिविगो का जन्म हुआ
आगे ही आगे: दीपक गर्ग, गजल कालरा
''रिविगो को पिछले सात साल में नीतियों और इन्फ्रास्ट्रक्चर में आए बदलावों से फायदा मिला है, चाहे जीएसटी हो, हाइवे विकास, डिजिटल इंडिया या फास्ट टैग हो’’
दीपक गर्ग
काम की तिकड़ी
गौरव मुंजाल, 31 वर्ष
रोमन सैनी, 30 वर्ष
हिमेश सिंह, 29 वर्ष
सह-संस्थापक, अनएकेडमी, बेंगलूरू
पढ़ते वक्त स्कूल में एक इंजीनियरिंग कोचिंग सेंटर ने गौरव मुंजाल को यह कहकर लेने से इनकार कर दिया कि उन्हें बेहतरीन शिक्षकों के पढ़ाने वाले बैच में नहीं रखा जा सकता. मुंजाल को एहसास हुआ कि अच्छी शिक्षा भारत में विशेषाधिकार है. 2010 में कॉलेज में पढ़ते वक्त उन्होंने यूट्यूब पर शैक्षणिक चैनल के तौर पर अनएकेडमी की शुरुआत की.
इसकी लोकप्रियता से प्रेरित होकर 2015 में अनएकेडमी को औपचारिक तौर पर लॉन्च किया. मुंजाल का पहला उद्यम अलबत्ता फ्लैट.टू था. यह रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म उन्होंने 2013 में हिमेश सिंह के साथ स्थापित किया था.
कॉमनफ्लोर डॉट कॉम ने इसका अधिग्रहण कर लिया. अनएकेडमी का मकसद 'फ्रीमियम बिजनेस मॉडल’ पर दुनिया की सबसे बड़ी लर्निंग रिपोजिटरी या शिक्षा भंडार बनाना है. पाठ्यक्रम तो छात्रों को मुफ्त में सुलभ होंगे, पर लाइव क्लास और निजी जरूरतों के मुताबिक पढ़ाई के लिए उन्हें ग्राहक शुल्क चुकाना होगा.
छोटे-से वक्त में अनएकेडमी ने 50,000 पंजीकृत शिक्षक और 4.9 करोड़ से ज्यादा छात्र जुटा लिए हैं. 2020 में समूह यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हुआ और वेंचर इंटेलिजेंस के मुताबिक इसका मौजूदा बाजार मूल्य 3.4 अरब डॉलर (25,770 करोड़ रुपए) है.
आला दिमाग मुंजाल को टेक्नोलॉजी और विश्वस्तरीय उत्पादों के निर्माण का जुनून है. हिमेश को कोड लिखना और यात्रा करना अच्छा लगता है. रोमन सैनी डॉक्टर हैं और आइएएस की परीक्षा में कामयाब होकर मध्य प्रदेश में असिस्टेंट कलेक्टर रह चुके हैं
''मेरी आकांक्षा दुनिया में सबसे बड़ा (स्टार्ट-अप) होना और भारत में देखी गई अब तक की सबसे बड़ी कंज्यूमर इंटरनेट फर्म बनाना है’’
—गौरव मुंजाल.