अनजाने नायकः जंगल को समर्पित

धस्माना ने गुडग़ांव के 380 एकड़ के परित्यक्त खनन स्थल को संपन्न बायो डायवर्सिटी पार्क में बदला

बंदीप सिंह
बंदीप सिंह

विजय धस्माना

ऐसे समय में जब जंगलों का लगातार क्षय हो रहा है और हरित कवर विकास की बलि चढ़ रहा है, विजय धस्माना एक महान मिशन पर हैं—जंगलों का आकार बढ़ाने का मिशन. उजाड़ को 'रीवाइल्डिंग' यानी फिर से हरा करने की उनकी पहल से बड़े पैमाने पर बहुत सी ऐसी वनस्पतियां और जंगली बूटियों की देशी प्रजातियां फिर से नजर आने लगी हैं. यह कार्य उस वनीकरण से अलग है जिसमें केवल प्रचलित पेड़ों या सजावटी पौधों का उपयोग होता है और जिन्हें बनाए रखने के लिए बहुत सारे संसाधनों की आवश्यकता होती है.

धस्माना कहते हैं, ''यह पेड़ लगाने जैसा काम नहीं है, बल्कि एक ऐसे आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने का प्रयास है, जिसे मानव नियंत्रण की कोई आवश्यकता ही नहीं है.'' कहना जितना आसान है, करना उतना ही कठिन. देसी वनस्पतियों के प्राकृतिक वास के बहुत सावधानीपूर्वक अनुसंधान के अलावा, रीवाइल्डिंग की सबसे बड़ी चुनौती उन तरीकों की खोज की है, जिनसे पौधों की वे खास प्रजातियों प्राकृतिक रूप से बढ़ती रहें.

इन जंगली पौधों के बीजों को खोजना अपने आप में श्रमसाध्य कार्य है और फिर उन्हें विकसित करना एक और मुश्किल काम है. जलवायु परिस्थितियों के प्रति बहुत सावधानी की जरूरत होती है और कुछ खास कीड़ों या पौधों के विकास में सहजीवी की भूमिका निभाने वाले पौधों की अन्य प्रजातियां लाने जैसे सावधानीपूर्वक हस्तक्षेप से परागण तथा बीज प्रसार जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना होता है.

धस्माना, नागरिकों, प्रायोजकों और समुदायों को अपने अभियान में साथ लेने के अलावा अफसरों और नगरपालिका प्रमुखों को भी इस बात के लिए शिक्षित करते हैं कि वनस्थान अच्छे हैं और इन स्थानों को बने रहने दें.

धस्माना के काम का एक सबसे अच्छा उदाहरण गुडग़ांव का अरावली जैव विविधता पार्क है. यह कुछ साल पहले तक क्वार्टजाइट की धूल से ढका 380 एकड़ उजाड़ खनन स्थल हुआ करता था. एक गैर-सरकारी संगठन 'आइएमगुडग़ांव' की ओर से शुरू की गई एक पहल की बदौलत इस जगह पर पेड़ लगाने और इसकी रीवाइल्डिंग की गतिविधियां 2011 में शुरू हुईं और आज इस पार्क में पेड़ों की 300 से अधिक प्रजातियों के 1,50,000 पेड़ हैं, जिनमें से सभी प्रजातियां देशी और इनमें से कई तो वर्षों बाद हरियाणा में फिर से विकसित हुईं हैं.

'आइएमगुडग़ांव' की सह-संस्थापक लतिका ठुकराल कहती हैं, ''धस्माना के मार्गदर्शन के बिना यह संभव नहीं होता. उन्होंने इस परियोजना की अगुआई की. यह अब प्राइम रियल एस्टेट के बीच में मौजूद एक समृद्ध वन है.'' पुनर्जीवित क्षेत्र अब कई प्रजातियों के सांपों, सियार, हिरण, सेही, पाम सीविट (एक प्रकार का बिलाव), गिरगिटों और तितलियों का एक संपन्न वन्यजीव आश्रय है. यह 175 प्रजातियों के पक्षियों का भी अड्डा बन गया है और दिल्ली एनसीआर के सबसे समृद्ध पक्षी आवासों में से एक है.

धस्माना वर्तमान में कई रीवाइल्डिंग प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें गुडग़ांव के चक्करपुर-वजीराबाद बांध में 5.6 किमी के वन कॉरिडोर का निर्माण, बादशाहपुर नाले के 2 किलोमीटर क्षेत्र का पारिस्थितिकी-पुनरुद्धार, अरावली की 60 एकड़ की भूमि के साथ सिकंदरपुर वाटरशेड की रीवाइल्डिंग और जयपुर के पास एक 115 एकड़ क्षेत्र में फैले रेत के टिब्बा क्षेत्र का थार की जंगली वनस्पतियों के साथ पुनरुद्धार का काम शामिल है. वनपुरुष तन्मयता से काम में जुटे हैं.

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