अनजाने नायकः गरीबों की हिमायत
छह साल तक खाड़ी के देश में काम करने के बाद 2003 में स्वदेश लौटे रेड्डी तभी से गल्फतेलंगाना वेलफेयर ऐंड कल्चरल एसोसिएशन चला रहे हैं. वे भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर जेल में पड़े लोगों और उन्हें स्वदेश लाने में मदद करते हैं.

पटकुरी बसंत रेड्डी, 44 वर्ष
सामाजिक कार्यकर्ता, मनोहराबाद, तेलंगाना
इस साल 25 सितंबर को तेलंगाना के 33 वर्षीय शेख फारूक रियाद, सऊदी अरब में मृत पाए गए. वे वहां गाड़ी चलाते थे. पैसे की कमी की वजह से उनके शव को स्वदेश लाने मे दो महीने का समय लगा. खाड़ी के देशों में छोटे-मोटे रोजगार के लिए जाने वाले कई प्रवासियों की ऐसी ही दशा है. पिछले पांच साल के दौरान वहां कम से कम 34,000 भारतीयों की मौत हो गई, जिनमें 1,200 तेलंगाना के थे.
पिछले छह साल से एक दिन भी ऐसा नहीं गया जब बसंत रेड्डी को विदेश में परेशान या देश में चिंतित रिश्तेदारों की ओर से फोन नहीं किया गया. रेड्डी बताते हैं, ''बहरीन में कंस्ट्रक्शन मजदूर के तौर पर मेरे अनुभव से वहां शोषण का अंदाजा लग गया.'' उनके एक सहकर्मी को कैंसर हो गया था और उसकी मुसीबतें देखकर उन्होंने अहम फैसला लिया. उन्होंने वित्तीय मदद के लिए दूसरे मजदूरों और नियोक्ता से बात की. उन्हें पता चला कि कई दूसरे लोग इससे भी ज्यादा मुसीबजदा हैं—वे प्रवासी मजदूर जिन्हें बेईमान एजेंटों ने नकली वीजा और बिना वर्क परमिट के जरिए रिझाया था और वे जेल में पड़े थे. ऐसे लोगों की मदद करने के लिए वे क्राउड फंडिंग करते हैं, जिसमें अपना पैसा भी डालते हैं.
छह साल तक खाड़ी के देश में काम करने के बाद 2003 में स्वदेश लौटे रेड्डी तभी से गल्फतेलंगाना वेलफेयर ऐंड कल्चरल एसोसिएशन चला रहे हैं. वे भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर जेल में पड़े लोगों और उन्हें स्वदेश लाने में मदद करते हैं. वे इस तरह के काम के लिए विदेश जाने के खतरों के बारे में लोगों को आगाह करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाते हैं. वे उन्हें समझाते हैं कि हैदराबाद में नेशनल एकेडमी ऑफ कंस्ट्रक्शन से कोर्स करके कंस्ट्रक्शन का काम स्वदेश में ही करें. रेड्डी कहते हैं, ''तब से हालात सुधरे हैं. पहले दूसरे मजदूरों को अपने शव स्वदेश भेजने के लिए रेहन के तौर पर अपना पासपोर्ट जमा कराना होता था.'' वे बताते हैं कि कई मजदूरों का शव अब भी खाड़ी के देशों में ही है. उन्होंने ऐसे 400 अभागों के शव को स्वदेश लाने में मदद की है.
''बहरीन में कंस्ट्रक्शन मजदूर के तौर पर अपने अनुभव से मुझे वहां के भीषण शोषण का पता चला''
परिवर्तन का पैमाना
रेड्डी ने विदेश में दम तोडऩे वाले कम से कम 400 प्रवासी मजदूरों के शव स्वदेश लाने में मदद की है.
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