अनजाने नायकः सूरत बदलने के लिए
निदा के बढ़ते प्रभाव से चिंतित दरगाह-ए-आला हजरत ने जुलाई 2018 में इस्लामी प्रथाओं के खिलाफ बोलने के लिए उनके खिलाफ फतवा जारी किया. इसके तुरंत बाद फैजान-ए-मदीना परिषद ने उन्हें देश से बाहर फेंकने के लिए 10 लाख रु. के नकद पुरस्कार का ऐलान किया.

निदा खान,
मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ता, बरेली
बचपन से ही होनहार निदा खान ने बरेली के सेंट फ्रांसिस कॉन्वेंट से स्कूली शिक्षा पूरी की थी. 2012 में उन्होंने बरेली कॉलेज में बी.कॉम की डिग्री के लिए दाखिला लिया. पढ़ाई के तीसरे साल उन्हें प्रतिष्ठित आला हजरत परिवार से शादी का प्रस्ताव मिला. हजरत बरेलवी आंदोलन के संस्थापक थे और दुनियाभर में उनके 30 करोड़ से ज्यादा अनुयायी हैं.
18 फरवरी, 2015 को निदा का निकाह शीरन राजा खान से हो गया. निदा कहती हैं, ''मेरे मम्मी-पापा और मैं एक ऐसे परिवार से जुड़कर खुद को खुशकिस्मत महसूस कर रहे थे, जिसकी दुनियाभर के मुसलमानों के बीच बड़ी इज्जत है. मैं कॉमर्स में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करना चाहती थी और उन्होंने कहा कि वे मुझे करने देंगे.''
पर निकाह के बाद शौहर पढ़ाई करते रहने देने की बात से मुकर गए. निकाह के महीने भर बाद जब निदा एम.कॉम के लिए प्रवेश परीक्षा दे रही थीं, तो उनके शौहर शीरन उन्हें परीक्षा हॉल से दूर खींच ले गए. निदा कहती हैं, ''उन्होंने पापा से कार की मांग की. मैंने मना कर दिया. एक रात मुझे इतनी बुरी तरह से पीटा गया कि मेरा गर्भपात हो गया. 17 जुलाई, 2015 को मुझे शौहर के घर से निकाल दिया गया. मैं अब मायके में रह रही हूं.'' साल भर बाद शीरन के दूसरा निकाह करने की कोशिश पर निदा ने लड़की को होशियार किया तो उसने साफ इनकार कर दिया. इससे बुरी तरह भड़के शीरन ने घर आकर उन्हें बुरी तरह धमकाया.
घुटने टेकने से इनकार करते हुए निदा शौहर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने पुलिस के पास गईं पर पुलिस ने मना कर दिया. वह हजरत परिवार के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं दिखा पा रही थी. निदा ने तब बरेली जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया और अदालत के आदेश पर जून 2016 में प्राथमिकी दर्ज कराने में कामयाब रहीं. उनके मामले को पारिवारिक मध्यस्थता प्रकोष्ठ में भी भेजा गया था. हालांकि, सुनवाई के आखिरी दिन निदा के शौहर ने उन्हें तीन बार तलाक बोल दिया.
इस तलाक को अवैध घोषित करने के लिए निदा ने सभी मौलवियों से संपर्क किया लेकिन सभी ने इसे जायज ठहराया. हारकर निदा ट्रिपल तलाक की वैधता को चुनौती देने के लिए वापस जिला अदालत गईं. सितंबर 2018 में जिला अदालत ने तीन तलाक को अवैध ठहराया, साथ ही निदा के शौहर के खिलाफ आइपीसी की धारा 133 (एक महिला की सहमति के बिना गर्भपात करवाना) के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया.
तीन तलाक के खिलाफ उनकी लड़ाई ने उन दूसरी महिलाओं को हिम्मत दी जो इसी रूढि़ से त्रस्त थीं. इनमें सबीना खान भी शामिल थीं, जिन्हें अपने ससुर के साथ निकाह हलाला को मजबूर किया जा रहा था (एक ऐसी प्रथा, जिसमें एक महिला जिसे तीन तलाक दिया गया हो, पहले शौहर से दोबारा तभी निकाह कर सकती है, जब वह किसी दूसरे व्यक्ति से निकाह कर ले और दूसरा व्यक्ति उसे तीन तलाक दे दे). यह निदा थीं जो सबीना की मदद को आगे आईं और उन्हें कानूनी सहायता पाने में मदद की.
निदा के बढ़ते प्रभाव से चिंतित दरगाह-ए-आला हजरत ने जुलाई 2018 में इस्लामी प्रथाओं के खिलाफ बोलने के लिए उनके खिलाफ फतवा जारी किया. इसके तुरंत बाद फैजान-ए-मदीना परिषद ने उन्हें देश से बाहर फेंकने के लिए 10 लाख रु. के नकद पुरस्कार का ऐलान किया. यह फिर से जिला अदालत थी जो निदा की मदद के लिए आगे आई और इस तरह के सभी फतवों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया. इस बीच, सितंबर 2018 में निदा ने ऐसी प्रतिगामी प्रथाओं की शिकार मुस्लिम महिलाओं को परामर्श और कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए एक गैर-लाभकारी समूह आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी की स्थापना की.
परिवर्तन का पैमाना
तीन तलाक और निकाह हलाला के पीडि़तों को कानूनी सहायता हासिल करने में मदद करती हैं.
मैं बच गई थी, अब मैं लड़ रही हूं. मैं मुस्लिम महिलाओं के हक के लिए लडूंगी.
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