इंडिया टुडे कॉन्क्लेव-नियंत्रण की नई रेखा
एक भारतीय पायलट को पकड़ लिया गया और फिर बाद में रिहा भी कर दिया गया. इससे बड़ा संकेत यह था कि भारत ने स्पष्ट कर दिया कि अब वह पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को और सहन नहीं करेगा और बिना परिणामों की परवाह किए आतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करेगा.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019
'पुलवामा हमले के पहले और उसके बाद'
फली होमी मेजर, एयर चीफ मार्शल (रिटायर्ड); डी.एस. हुड्डा, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड)
शाह फैसल, पूर्व आइएएस, जम्मू-कश्मीर; शिवशंकर मेनन, पूर्व विदेश सचिव
इस सत्र से 70 घंटे पहले का समय उपमहाद्वीप के इतिहास में सबसे ज्यादा तनावपूर्ण वक्त में से था क्योंकि भारत और पाकिस्तान युद्ध के कगार पर थे. पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के एक कैंप पर भारतीय वायु सेना के हमले के बाद पाकिस्तानी एयरफोर्स ने जवाबी हमला किया. एक भारतीय पायलट को पकड़ लिया गया और फिर बाद में रिहा भी कर दिया गया.
इससे बड़ा संकेत यह था कि भारत ने स्पष्ट कर दिया कि अब वह पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को और सहन नहीं करेगा और बिना परिणामों की परवाह किए आतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करेगा. पैनल के सदस्यों का मानना था कि यह पाकिस्तान के नॉन-स्टेट ऐक्टर्स को खत्म करने के लिए दीर्घकालिक नीति बनाने का समय है. साथ ही कश्मीर समस्या के बेहतर निदान की भी तत्काल आवश्यकता बनी हुई है.
खास बातें
डी.एस. हुड्डा
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल का मानना हैकि पुलवामा के बाद सरकार की प्रतिक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक मजबूत, अधिक सुसंगत और कूटनीतिक रूप से अधिक प्रभावी रही है. पाकिस्तान को सीमा पार हमले से रोकने के लिए आपके पास एक सैन्य विकल्प, एक राजनयिक विकल्प और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव है. वे मानते हैं, एक रास्ता तय करें और उसी पर टिके रहें लेकिन नीति दीर्घकालिक होनी चाहिए.
''अलगाव बढ़ा है, और ज्यादा युवा बंदूक उठा रहे हैं. राजनैतिक मौके घटे हैं. हमें इन पर गौर करने की जरूरत है.''
फाली होमी मेजर
हवाई हमलों का विकल्प उचित था, खासतौर पर पीओके में. 1962 के बाद से सरकारें लगातार वायु सेना के इस्तेमाल पर नकारात्मक मानसिकता से ग्रसित रही हैं जबकि इसका हमारे हक में बड़ा इस्तेमाल किया जा सकता था.
शिवशंकर मेनन
पाकिस्तान के आचरण को बदलने वाले ज्यादातर प्रयास बहुत खामोशी से किए जाने की जरूरत है. हमने इस बार जो किया वह अच्छा था. इसने इच्छाशक्ति दिखाई और इसने कीमत भी बढ़ा दी. लेकिन वह अपने आप में कोई समाधान नहीं है.
आपके सामने कम से कम पांच पाकिस्तान हैं. आपको नागरिक समाज, व्यापारियों और राजनेताओं से कोई समस्या नहीं है. आपकी समस्या पाकिस्तान की सेना, जेहादी तंजीमों से शुरू होती है. आप सबके लिए एक नीति अपनाएं तो वह कारगर नहीं होगी.
दुनिया में किसी ने भी खड़े होकर हमसे नहीं पूछा, ओह, आपने पाकिस्तान पर हमला क्यों किया? आज, आपके पास कई विकल्प हैं जिसको आप पाकिस्तान का व्यवहार बदलने के लिए आजमा सकते हैं क्योंकि आपने सैन्य बल के इस्तेमाल का एक नया मानक निर्धारित कर दिया है. आपने ऐसी कुछ रेखाएं लांघ ली हैं, जिनके बारे में वे शायद यही सोचते रहे हैं कि आप कभी ऐसा नहीं करेंगे.
शाह फैसल
क्या भारत और पाकिस्तान सीमाओं पर इन झड़पों की बजाए एक-दूसरे से निपटने के कुछ अलग तरीके खोज सकते हैं? क्या हम वे स्थान फिर से प्राप्त कर सकते हैं जो नागरिकों के लिए हैं लेकिन अब वहां चारों तरफ सिर्फ फौज है? क्या हम घाटी में लोकतांत्रिक दायरे का विस्तार कर सकते हैं और मुख्यधारा और चुनावी प्रक्रियाओं में अवाम का भरोसा बहाल कर सकते हैं?
''पुलवामा की घटना बहुत दर्दनाक
थी और हमारी एकजुटता उन सैनिकों के परिवारों के साथ है जिनका जीवन तबाह हो गया.''