सेक्स सर्वे 2018ः केबिन में प्रेमालाप

सहकर्मियों के साथ प्रेमालाप से लेकर सीसीटीवी के तले किसिंग और करियर ग्राफ को ऊंचा चढ़ाने वाले बॉस के साथ डेटिंग तक, कार्यस्थल पर सेक्स दरअसल पुणे का एक खुला राज है.

लोग पुणे में यह मानते हैं कि उनके दफ्तर के 40% से ज्यादा सहकर्मी आपस में यौन रिश्ते रखते हैं
लोग पुणे में यह मानते हैं कि उनके दफ्तर के 40% से ज्यादा सहकर्मी आपस में यौन रिश्ते रखते हैं

पिछले साल दिसंबर में कोरेगांव पार्क के स्टारबक्स कैफे में 32 साल की एक आइटी इंजीनियर हाथ में कैपुचिनो का कप लिए बड़ी बेसब्री से नई नौकरी तलाश रही थी. वह उम्मीद कर रही थी कि इनमें किसी तरह उसकी पिछली नौकरियों की पड़ताल का कोई लफड़ा न रहे. गरमागरम सेक्स के चक्कर में बखेड़ा खड़े होने के चलते वह पहले ही दो साल में तीन नौकरियां बदल चुकी थी. 'आजादी और मस्ती' की तलाश में छह साल पहले पुणे आई बेंगलूरू में पली-बढ़ी इस महिला का कहना था, ''मैं फिर से वहीं जाकर अपने एक्स के साथ एक ही टीम में काम नहीं कर सकती. उसे किसी दूसरी लड़की के साथ देखकर बड़ी तकलीफ होती है, खास तौर पर यह सोचकर कि वे भी क्विकी (झटपट संभोग) के लिए उन्हीं गुप्त जगहों पर जाएंगे, जहां हम प्रायः जाते थे.''

सहकर्मियों के साथ प्रेमालाप से लेकर सीसीटीवी के तले किसिंग और करियर ग्राफ को ऊंचा चढ़ाने वाले बॉस के साथ डेटिंग तक, कार्यस्थल पर सेक्स दरअसल पुणे का एक खुला राज है. इंडिया टुडे के सेक्स सर्वे ने इस भ्रम को अब स्पष्ट कर दिया है कि पुणे अपनी पड़ोसी महानगरी मुंबई से कम असंयमी है. पुणे की कामकाजी आबादी में से 70 फीसदी अपने सहकर्मियों के साथ सेक्स संबंध बनाने के ख्याल को सहज मानती है और 44 फीसदी तो यह मानते हैं कि अपने अधीनस्थ के साथ सेक्स करने में कोई गलत बात नहीं है.

फीजियोथेरेपिस्ट और पीस ऑफ माइंड होलिस्टिक हेल्थ सर्विसेज की संस्थापक केहली शिंदे कहती हैं, ''शहर में कार्यस्थलसंगी (वर्क स्पाउज) की धारणा अब हकीकत बन चुकी है जहां युवा अपना ज्यादातर समय दफ्तरों में बिताते हैं. जो फैसले व आकांक्षाएं पहले केवल जीवनसंगी के साथ साझा की जाती थीं, अब उन पर सहकर्मी के साथ चर्चा की जा रही है, वह भी अक्सर दूसरे लिंग के सहकर्मी के साथ.''

नजदीकी, इच्छाएं और तकनीक—आज ये कार्यस्थलों पर परवान चढ़ते प्रेम में खास भूमिका निभा रही हैं. यौनोत्तेजक मैसेज भेजना यानी सेक्सटिंग को किसी सहकर्मी के बिस्तर तक या फिर कुछ मामलों में देर रात की शिफ्ट के बाद दक्रतर में ही क्यूबिकल तक पहुंचने के नए रास्ते के बतौर देखा जा रहा है. पचपन फीसदी लोग यह मानते हैं कि उन्होंने अपने सहकर्मी- जिनमें अधीनस्थ भी शामिल हैं और बॉस भी, को ऐसे मैसज भेजे हैं.

यौन खिलवाड़ तो लगभग हर जगह है—56 फीसदी लोग इस बात को स्वीकार करते हैं कि उन्होंने अपनी किसी सहकर्मी के प्रति यौनेच्छा जाहिर की है और दफ्तर जाने वालों में 83 फीसदी लोग अपने ऐसे सहयोगियों को जानते हैं जिन्हें काम के दौरान सेक्स करते पकड़ा गया है. एक आइटी कंपनी में एचआर मैनेजर का कहना है कि ज्यादातर कंपनियों में ऐसी कोई नो-डेटिंग पॉलिसी नहीं है जो कर्मचारियों की ''निजी जिंदगी में दखल्य्य डालती हो.

लेकिन कार्यस्थलों पर सेक्स और टूटे रिश्तों के कारण बनने वाले बैर पर नाराजगी तो जताई ही जाती है. ऐसे में बड़ी कड़वाहट भरे आमने-सामने होते हैं, बोर्डरूम में आरोप-प्रत्यारोप तैरने लगते हैं और इस तरह के ब्रेक-अप से निबटने के लिए एचआर टीमों को सामने आना पड़ता है. वित्तीय सेवा देने वाली एक कंपनी के एचआर प्रमुख का कहना था, ''अगर उत्पादकता को नुक्सान पहुंचता है तो हम आम तौर पर एक व्यक्ति को या तो दूसरी टीम में भेज देते हैं या फिर दूसरी शिफ्ट में आने की पेशकश करते हैं.''

किसी समय पेंशनरों का स्वर्ग माने जाने वाला शहर अब एक जगमगाता युवा शहर है जहां उन्मुक्त सेक्स, विवाहेतर संबंध और दफ्तरों में रोमांस खूब फल-फूल रहे हैं. यहां सर्वे में शामिल लोगों के एक-तिहाई का यह मानना था कि उनके 40 फीसदी सहकर्मी एक-दूसरे के साथ सेक्स रिश्तों में लिप्त हैं. फीजियोथेरेपिस्ट और रिलेशनशिप काउंसलर पारुल खोना का कहना है, ''अब कोई भी वर्जना नहीं है. पोर्न और सेक्स मैसेज आसानी से उपलब्ध हैं और उस यौन उत्कंठा को शांत करने के लिए एक आकर्षक सहकर्मी सबसे आसान विकल्प है.''

सामाजिक ताना-बाना तेजी से बदल रहा है. आइटी, ऑटोमोबाइल, मनोरंजन और सेवा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दूसरी जगहों के युवा काम कर रहे हैं. वहां काम के घंटे ज्यादा हैं और काम के बाहर घुलने-मिलने के मौके कम. लिहाजा लोग दफ्तर में एकाध क्यूबिकल आगे ही कोई पार्टनर ढूंढ ले रहे हैं. एक स्वतंत्र समाजशात्री इरावती खरे कहती हैं, ''पुणे अब वह शहर नहीं रहा जहां हर दूसरा व्यक्ति आपके परिवार को जानता हो. बड़ी संख्या आपको पर्याप्त गुमनामी व आजादी दे देती है जिसके चलते लोग आसानी से उन्मुक्त सेक्स के साथ प्रयोग कर सकते हैं.'' शिंदे का कहना है, ''लेकिन यह सब मस्ती की बातें हैं. कैजुअल सेक्स को लेकर लोग आम तौर पर शादी नहीं तोड़ते.''

सहकर्मी के साथ सेक्स में तो मौज है लेकिन बॉस के साथ रिश्ते के अपने बड़े फायदे हैं और किसी आकर्षक जूनियर के साथ एकबारगी डेट अहम को बढ़ावा देने वाली होती है. इन सबके बावजूद सेक्स जटिलताओं से मुक्त नहीं है. एक आइटी सेवा कंपनी के एचआर विभाग का कहना है कि अगर कोई कर्मचारी अच्छे नतीजे सामने नजर आए बगैर ही तेजी से तरक्की हासिल करता चला जाता है तो वे अगल-बगल सूंघने लगते हैं.

सेक्स ठीकठाक चलता रहे तो तनख्वाहें भी बढ़ती चली जाती हैं. शिंदे का कहना है, ''ताकत का खेल अलग-अलग स्तर पर चलता है. अगर बॉस किसी फायदे के बदले सेक्स की मांग करने लगता है तो चिढ़ा अधीनस्थ बॉस पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाने से जरा भी नहीं हिचकता. मिनटों के भीतर ताकत की बाजी पलट जाती है.'' ऐसे में कुछ लोग अपने जख्मी स्वाभिमान  के साथ काउंसलर की कुर्सी के सामने जा पहुंचते हैं तो कई अन्य अतीत को दफन करके किसी और नौकरी की तलाश में लग जाते हैं.

Read more!