लता मंगेशकरः आप कितनी बड़ी हैं, ये हमें मालूम है
इन गीतों में लग जा गले, रहें न रहें हम., अगर मुझसे मोहब्बत है, माई री मैं कासे कहूं, मन मोहना बड़े झूठे जैसे गीत शामिल हैं.

पंडित विश्वमोहन भट्ट
मैं लता जी के संदर्भ में अपने जीवन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना का जिक्र जरूर करना चाहूंगा. मुझे यह कहते हुए सचमुच बहुत अच्छा लगता है कि मैं उन लोगों में हूं जिन्हें लता मंगेशकर का आशीर्वाद मिला था. उनका हाथ मेरे सिर पर आया था जब उन्होंने एक संगीत कंपनी शुरू की थी. इसका नाम एलएमएम अर्थात् लता मंगेशकर क्वयूजिक था. इस कंपनी के आरंभ के अवसर पर एक भव्य समारोह हुआ था.
इस समारोह में पंडित जसराज, अमिताभ बच्चन, नीता अंबानी सहित फिल्म, संगीत और उद्योग जगत की कई बड़ी हस्तियां उपस्थित थीं. इस समारोह में मेरा संगीत कार्यक्रम रखा गया था, दीपक पंडित के साथ. इसी आयोजन में मैं जीवन में पहली बार उनसे मिल रहा था. मैंने उन्हें साष्टांग प्रणाम किया. मुझे ऐसा करता देख वे बोलीं कि मैं इतनी बड़ी नहीं हूं. मैंने कहा कि ''आप कितनी बड़ी हैं, यह हमें मालूम है.
आप हमारे लिए साक्षात देवी का अवतार हैं. साक्षात सरस्वती के आज दर्शन हो गए मुझे.’’ उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया. मेरा कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्होंने मेरी प्रशंसा की, मेरे सुरीलेपन की प्रशंसा की. उनकी संगीत कंपनी के समारोह के लिए मेरा कार्यक्रम किसने तय किया था, मुझे नहीं मालूम लेकिन निश्चय ही इसमें उनकी सहमति रही होगी. उनकी संगीत कंपनी के लिए मेरा कार्यक्रम रखा जाना और उनकी उपस्थिति में कार्यक्रम होना मेरे लिए अविस्मरणीय अवसर था. वह दिन मेरे जीवन का बहुत ही यादगार दिन था. दुर्भाग्य से उसके बाद फिर मेरी उनसे भेंट नहीं हो सकी.
मैंने जब बवंडर (निर्देशक: जग मूंदड़ा; सन् 2000) फिल्म के लिए संगीत निर्देशन किया तो मन में इच्छा थी कि काश! इसके लिए लता जी से गाने का निवेदन कर पाता! लेकिन हमारी फिल्म का बजट बहुत कम था, इसलिए ऐसा कर पाना संभव नहीं हो सका. उनका निधन भारतीय संगीत को उदास करने वाला है. शायद ही कोई ऐसा भारतीय होगा जो उनके प्रभाव से अछूता होगा. वे अमर हैं.
उनके गीत हमारे दिलों में हमेशा गूंजते रहेंगे. वैसे तो मुझे उनके ज्यादातर गीत पसंद हैं लेकिन कुछ गीत दिल के बहुत करीब हैं. इन गीतों में लग जा गले, रहें न रहें हम., अगर मुझसे मोहब्बत है, माई री मैं कासे कहूं, मन मोहना बड़े झूठे जैसे गीत शामिल हैं. यही कहूंगा कि जैसा कि उनका एक गीत है मेरी आवाज ही पहचान है...उनकी आवाज ही उनकी पहचान है. यह पहचान कभी खत्म नहीं होगी.
(लेखक मशहूर मोहन वीणा वादक हैं. आलेख आलोक पराड़कर से बातचीत पर आधारित)
जब मैंने बवंडर फिल्म का संगीत निर्देशन किया तो मन में बड़ी इच्छा थी कि काश! इसके लिए लता जी से गाने का निवेदन कर पाता पर बजट कम होने की वजह से वह संभव न हो सका>