इंसाफ में मददगार

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ घरेलू/यौन हिंसा एक कड़वी हकीकत है. मजलिस लीगल सेंटर इस भयावह समस्या से सीधे मुकाबला करता है. पीड़ितों को कानूनी सहायता और मानसिक संबल देते हुए वह उन्हें उनके दर्द से उबरने और सशक्त होकर आगे बढ़ने में बनता है मददगार

स्त्री शक्ति मजलिस की निदेशक ऑड्री डिमेलो (बीचोबीच, साड़ी में) मुंबई में अपनी टीम के साथ

अगर इंसाफ का रास्ता बहुत कठिन है तो यह घरेलू/यौन शोषण के पीड़ितों के लिए और ज्यादा मुश्किल हो जाता है, जिनमें अधिकतर बच्चे और महिलाएं शामिल हैं. एक तरफ पुरुषवादी प्रवृत्तियों से भरी संवेदनहीन न्याय व्यवस्था है तो दूसरी ओर पीड़ितों पर ही दोष मढ़ने वाला निष्ठुर समाज. ऐसे में 1991 में फ्लैविया एग्नेस की ओर से स्थापित संस्था मजलिस उल्लेखनीय बदलाव ला रही है. वह घरेलू/यौन शोषण के पीड़ितों को सामाजिक-कानूनी सहायता देने से लेकर नीतिगत स्तर पर हस्तक्षेप करने और पुलिस सरीखे तंत्रों की संवेदनशीलता और दक्षता बढ़ाने तक में अहम योगदान दे रही है.

खुद घरेलू हिंसा की शिकार रहीं एग्नेस ने घर छोड़ दिया था और कानून की डिग्री हासिल की. वकालत शुरू करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि स्त्रीवादी समझ रखने वाले वकीलों की कमी है. आज महिला वकीलों और कार्यकर्ताओं की यह संस्था पूरी तरह महिलाओं की टीम के साथ काम करती है. उनका मुख्य मकसद हिंसा की शिकार विभिन्न वर्गों की महिलाओं को न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग देना है. बकौल एग्नेस, ''महिलाओं को लगता है कि उनके वकील दवाब में समझौता कर सकते हैं क्योंकि पति ज्यादा अमीर होते हैं. यहां वे खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं क्योंकि इसके वकीलों पर दवाब नहीं बनाया जा सकता.'' मजलिस की वकील नि:शुल्क या नाममात्र की फीस पर मुकदमा लड़ती हैं.

मजलिस की निदेशक ऑड्री डिमेलो कहती हैं, ''यह महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर काम करने वाला एक अनूठा संगठन है. हमने इस मुद्दे पर उस वक्त काम शुरू किया, जब कोई 'घरेलू हिंसा' का नाम तक नहीं लेता था. पीड़ितों को सहारा देकर उन्हें मजबूती से आगे बढ़ने में मदद करना ही इसका मकसद है.''

डिमेलो कहती हैं, ''हमारा मकसद कानूनी जटिलताओं को दूर करना है.'' एग्नेस बताती हैं कि नीतिगत पहलकदमियों के जरिए उन्होंने अदालतों को महिलाओं के लिए सहज और अनुकूल बनाया. इनमें परित्यक्त महिलाओं को मिलने वाले भरण-पोषण की ऊपरी सीमा हटाना, ईसाई महिलाओं के लिए तलाक की प्रक्रिया आसान बनाना और बलात्कार पीड़िताओं की गरिमा का सम्मान करते हुए अपराधी की पहचान के लिए की जाने वाली परेड को अंजाम देना शामिल है. बोर्ड सदस्य इंग्रिड श्रीनाथ कहती हैं, ''महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा की लहर अभी थमी नहीं है. हमें मुकदमे लड़ने वाले वकीलों की ही नहीं, अधिकारों के प्रति जागरूक महिलाओं और बच्चों की भी दरकार है.''

मजलिस आकांक्षा फाउंडेशन सरीखे सहयोगी संगठनों के साथ काम करती है जो मुंबई, पुणे और नागपुर में नगर निगमों के सहयोग से स्कूल चलाता है. मजलिस वंचित महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देने वाले क्रिएटिव हैंडिक्राफ्ट्स सरीखे एनजीओ के साथ भी काम करता है. ये संगठन संकट में फंसी महिलाओं और बच्चों को मजलिस के पास भेजते हैं.

लाभार्थी की राय
रसोइया सलोनी ने कहा, ''पति ने घर से निकाल दिया था. सहारे के लिए कुछ भी न था. मजलिस ने आश्रय दिलाया, कानूनी मदद की और लॉकडाउन के दौरान मेरा सहयोग किया. मेरा केस फिलहाल मध्यस्थता की प्रक्रिया में है.'' 

आखिर क्यों है यह एक रत्न

> मजलिस अपनी महिला वकीलों की टीम के जरिए घरेलू/यौन हिंसा की पीड़ितों को सामाजिक-कानूनी सहायता मुहैया करता है.

> यह पुलिस, लोक अभियोजकों, न्यायपालिका और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करता है.

> यह अब तक 1,00,000 से ज्यादा पीड़िताओं और बच्चों की मदद कर चुका है और करीब 40,000 अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुका है.

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