सेहत के वास्ते स्मार्ट उपाय
एआइ डायग्नोस्टिक्स, क्लिनिकल फैसले, डिजीज सर्विलांस—देश की जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर पब्लिक हेल्थकेयर को नए सिरे से गढ़ने में टेक स्टार्टअप्स को समर्थन दे रहा आइएचएफ.

मुंबई की पहचान बन चुकी एल्फिंस्टन बिल्डिंग में अपने दफ्तर से इंडिया हेल्थ फंड (आइएचएफ) के सीईओ माधव जोशी अक्सर इस इमारत के शांत इतिहास के बारे में सोचते हैं. यहीं रतन टाटा ने टाटा सन्स के चेयरमैन एमेरिटस और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन की हैसियत से अपने आखिरी कामकाजी साल बिताए थे. जोशी कहते हैं, यहीं टाटा की वह सोच भी ठोस शक्ल में सामने आई कि तकनीक पर आधारित इनोवेशन हेल्थकेयर डिलिवरी में असली फर्क ला सकता है.
2017 में टाटा ट्रस्ट्स ने आइएचएफ की नींव रखी. मिशन बड़ा था: संक्रामक बीमारियों का खात्मा और उन इलाकों में पब्लिक हेल्थ जोखिम कम करना, जहां निजी पूंजी आम तौर पर नहीं पहुंचती. रास्ता भी साफ था. ऐसे स्टार्टअप्स को फंड करना जो तेजी से और ज्यादा सटीक डायग्नोसिस कर सकें लेकिन इलाज को किफायती भी बनाए रखें.
वक्त बेहद अहम था. भारत ने 2025 तक टीबी खत्म करने, 2027 तक मलेरिया समाप्त करने और जच्चा-बच्चा मृत्यु दर में तेज गिरावट लाने के लक्ष्य तय किए थे. जोशी के शब्दों में, ''विज्ञान और टेक्नोलॉजी पर आधारित इनोवेशन को ऐसा डिसरप्टर माना गया, जो नीति और जमीनी नतीजों के बीच की दूरी कम कर सकता है.’’ 2020 में जब उन्होंने आइएचएफ जॉइन किया तो चुनौती फौरी लग रही थी. कोविड-19 ने यह और साफ कर दिया कि इनोवेशन डायग्नोसिस और इलाज को कितनी तेजी से बदल सकता है.
आज आइएचएफ खुद को एक अनोखे वैश्विक प्रयोग के तौर पर देखता है: एक विकासशील देश की निजी परोपकारी पूंजी, उसी देश में तैयार समाधान को, विकासशील दुनिया के लिए आगे बढ़ा रही है. शुरुआत टीबी और मलेरिया से हुई थी लेकिन अब दायरा बढ़ चुका है. ऐंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, फेफड़ों की सेहत, महिलाओं की सेहत और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियां भी इसमें शामिल हैं.
आइएचएफ का काम सीधे-सीधे तीन प्राथमिकताओं पर टिका है. पहली, तकनीक के जरिए बीमारी की जल्दी पहचान और इलाज. दूसरी, हेल्थ वर्कर्स की सीमाएं जहां खत्म होती हैं, उन्हें आगे बढ़ाना या उनकी मदद करना. और तीसरी, अपनी आवाज और पूंजी का इस्तेमाल करके बड़े स्तर पर बदलाव को गति देना.
चुनौती लगातार बढ़ रही है क्योंकि बीमारियों का पैटर्न बदल रहा है. मच्छर अब उन इलाकों में भी पहुंच रहे हैं, जहां पहले नहीं थे. जोशी बताते हैं कि हिमालयी क्षेत्र इसका बड़ा उदाहरण है, जहां डेंगू के बड़े प्रकोप देखे गए हैं और इम्युनिटी की कमी के चलते मौतें ज्यादा हुईं. इसलिए अब जलवायु से जुड़ी और पानी से फैलने वाली बीमारियां आइएचएफ के फोकस में हैं.
डिजिटल टेक्नोलॉजी में निवेश के लिए आइएचएफ ने तीन कोर एरिया चुने हैं. डायग्नोस्टिक्स, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट और डिजीज सर्विलांस. इसमें वह बृहन्मुंबई महानगरपालिका, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करता है. हर समाधान एक तय प्रक्रिया से चुना जाता है और चार स्तरों पर उसकी जांच होती है.
आइएचएफ का पोर्टफोलियो इसी सख्ती को दिखाता है. आइएचएफ के समर्थन से बना क्योर.एआइ का क्यूएक्सआर एक एआइ आधारित टूल है, जो स्मार्टफोन की मदद से कुछ ही मिनटों में टीबी के लिए चेस्ट एक्स-रे की पड़ताल कर सकता है. अब तक यह भारत में 128 साइट्स पर 1.20 लाख से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग कर चुका है. ट्रैकइटनाउ का मॉसकीट एक स्मार्ट डिवाइस है, जो बीमारी फैलाने वाले मच्छरों को पहचानता और पकड़ता है.
दूसरे निवेशों में मेडप्राइम के एआइ टूल शामिल हैं, जो मलेरिया की तेज और कम लागत वाली पहचान में मदद करते हैं. हेमेक्स हेल्थ का हैंडहेल्ड गैजेल अब 27 देशों में सिकल सेल बीमारी की पहचान के लिए इस्तेमाल हो रहा है. मॉलबायो का बैटरी से चलने वाला ट्रूनैट 90 मिनट के भीतर टीबी टेस्ट संभव बनाता है. वहीं हुवेल लाइफसाइंसेज का क्वांटीप्लस भारत का, आइसीएमआर की सिफारिश वाला पहला ओपन आरटी-पीसीआर सॉल्यूशन है. जिस देश में रेडियोलॉजिस्ट की भारी कमी है, वहां ऐसे टूल्स सिर्फ सहायक नहीं, बल्कि बड़े बदलाव ला रहे हैं.
विशेषज्ञ की राय
भारत जैसे देश में आसानी से इस्तेमाल होने वाली और किफायती डायग्नोस्टिक्स विकसित करना और बड़े पैमाने पर मुहैया कराना बहुत महत्वपूर्ण है. आइएचएफ का इन मुक्चय क्षमताओं पर ध्यान असली हेल्थकेयर के ध्येय में मददगार है.
—मुरलीधरन नायर, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, ईवाइ
आखिर क्यों है यह एक रत्न
●हेल्थकेयर सरीखे उस क्षेत्र में परोपकार के लिए पूंजी लगाता है जिसकी तरफ बाजार और निवेशक शायद ही कभी देखते हों.
●भारत और विकासशील देशों के लिए भारत से टेक्नोलॉजी आधारित समाधान किफायती दरों पर उपलब्ध कराता है.
●सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में इनोवेशन के जरिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य लक्ष्यों को जमीन पर उतारता है.