मल्टीप्लेयर एआइ का उदय

एआइ के नए दौर में संदर्भ या स्थानीय समूहों की जानकारी ही असली कच्चा माल है. मल्टीप्लेयर एआइ कम गलतियों के साथ तेजी से आगे बढ़ने में सबका मददगार होगा

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

रोहन एन. मूर्ति

एआइ के साथ काम करना अभी तक ज्यादातर एक खिलाड़ी का खेल रहा है. आप एक चैट विंडो खोलिए, ड्राफ्ट बनाने के लिए कहिए, ई-मेल तैयार कीजिए या किसी रिपोर्ट का संक्षेप तैयार कीजिए—यह ज्यादा स्मार्ट कीबोर्ड की तरह लगता है. नए साल यह अलग लगेगा.

एआइ एक खिलाड़ी से कई खिलाड़ियों की तरफ जा रहा है. यानी अकेले शख्स की मदद करने से हटकर टीम के विभिन्न सदस्यों के बीच चल रहे साझा काम में हिस्सा लेने की तरफ. इसे 'मेरा सहयोगी' कम और 'हमारा साथी' ज्यादा समझिए.

यह बैठकों में दिखाई देगा, प्रोजेक्ट बोर्ड, एप्रूवल चेन के भीतर होगा, फैसलों पर नजर रखेगा और विभागों के बीच काम आसान बनाएगा. यह बदलाव इसलिए मायने रखता है क्योंकि उत्पादकता की ज्यादातर परेशानियां व्यक्तिगत नहीं हैं. वे सामाजिक हैं.

प्रोडक्टिविटी का दुश्मन है समन्वय
किसी भी कामकाजी पेशेवर से पूछिए कि वक्त कहां चला जाता है और आपको यही कहानियां सुनने को मिलेंगी. सही अटैचमेंट ढूंढना, एक ही आंकड़े के दो संस्करणों में तालमेल बैठाना, पिछले हफ्ते के फैसलों को दोबारा समझाना. दूसरी टीम को पूरा संदर्भ पता न होने के कारण इंतजार करना.

कई संगठनों में दिन का बहुत बड़ा हिस्सा पहले से मौजूद जानकारी को खोजने या फिर से तैयार करने में चला जाता है. त्रासदी यह है कि सभी कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन हमेशा सही चीजों पर मेहनत नहीं कर रहे हैं. मल्टीप्लेयर एआइ इसलिए आकर्षक है क्योंकि यह उस छिपे हुए टैक्स पर निशाना साधती है, जिसका नाम समन्वय या तालमेल है.

पर्सनल एआइ कोपायलट ज्यादा तेजी से लिखने में आपकी मदद कर सकता है. मगर टीम स्तर का एआइ ई-मेल चेन से बचने में मदद कर सकता है जिसे अव्वल तो होना ही नहीं चाहिए था. टीम एआइ संगठनों के भीतर ज्यादा बड़ी समस्या—लोगों, टीमों और विभागों के बीच टकराव—को सुलझाता है. काम के साझा प्रवाह पर ध्यान देता है, यानी जहां एकाधिक लोगों के बीच काम का क्रम टूटता है, संदर्भ गुम हो जाता है, और फैसले चुपचाप भटक जाते हैं.

इस बदलाव में कोई अनोखा भारतीय ऐंगल नहीं है: यह एआइ की सपाट दुनिया है. मल्टीप्लेयर एआइ की तरफ इस कदम को दुनिया भर में बंटे हुए काम और ऐसे एजेंटों की जरूरत हांक रही है जो ज्यादा स्मार्ट मॉडल के साथ नहीं बल्कि सही संदर्भ में भरोसेमंद ढंग से काम करते हैं.

आपको दफ्तर में घूमते रोबोट की कल्पना करने की जरूरत नहीं है. कुछ ज्यादा सीधी-सादी चीज की कल्पना कीजिए, यानी हमेशा मौजूद ऐसे साथी या सहयोगी की, जो टीम से लगातार खास बातें सीखे, और ऐसा जो तीन ग्लैमरविहीन काम बहुत ही अच्छी तरह करे:

टीम का साझा अनुभव बन जाना. हर टीम समय के साथ अपने 'तौर-तरीके' विकसित करती है. ये नियम लिखे नहीं होते बल्कि कड़ी मेहनत से सीखे गए सबक होते हैं: कौन-सी चीजें अक्सर गलत हो जाती हैं, कौन-से शॉर्टकट जोखिम भरे होते हैं, ऐसी ही परेशानियों से पहले कैसे निबटा गया और कौन-से फैसले महंगे साबित हुए.

यह ज्ञान सामूहिक होता है. यह ई-मेल, चैट, डॉक्यूमेंट, टिकट, मीटिंग के नोट और—सबसे अहम—लोगों के दिमाग में रहता है. यह पिछली गलतियों, बहसों और समझौतों से गढ़ा जाता है. और इसे शायद ही कभी एक जगह लिखा जाता है.

मल्टीप्लेयर एआइ रोजमर्रा के अनुभवों से सीख सकता है और उस ज्ञान को पूरी टीम के लिए सुलभ बना सकता है. जब कोई पूछे कि 'पिछली बार इसे हमने कैसे किया था?', तो जवाब उस शख्स पर निर्भर नहीं रह जाता जिसे संयोग से वह याद हो. यह टीम के फैसलों और नतीजों के वास्तविक इतिहास पर टिका होता है.

टीमों के बीच टकराव घटाता है. संगठनों में ज्यादातर अर्थपूर्ण लक्ष्य विभिन्न कामों से जुड़े होते हैं. प्रोडक्ट लॉन्चिंग का वास्ता इंजीनियरिंग, मार्केटिंग, कानूनी, वित्त और ग्राहक सहायता से होता है. अनुपालन में बदलाव बिक्री के ब्योरे, अनुबंधों और संचालनों को प्रभावित करता है. समस्याएं अक्सर साझा समझ की छोटी-मोटी खामियों से पैदा होती हैं. नदारद खंड, पुरानी पड़ चुकी धारणा, भूली-बिसरी निर्भरता. चूंकि मल्टीप्लेयर एआइ काम के असल प्रवाह के भीतर दस्तावेजों, संदेशों, स्वीकृतियों और एक से दूसरे को सौंपे गए कामों में स्थित होता है, इसलिए इन खामियों पर उसकी नजर पहले पड़ सकती है. यह फैसलों की जगह नहीं लेता, यह उन हैरानियों को कम कर देती है जिनसे बचा जा सकता है.

नए कर्मचारी या ग्राहक को साथ लाना आसान बनाती है. हर कार्यस्थल इस तकलीफ से वाकिफ है. नई भर्ती प्रतिभाशाली है, लेकिन 'बुनियादी' सवाल पूछने में वे हफ्ते लगा देते हैं. सवाल बुनियादी कतई नहीं होते. वे संदर्भ से जुड़े होते हैं. एआइ उन्हें सही सांचों, अहम फैसलों के रिकॉर्ड और 'हम यहां चीजें कैसे करते हैं' के उदाहरणों का रास्ता दिखा सकता है, जिससे वे जल्दी अपना योगदान देने लगते हैं. ये फायदे सच्चे-सरल लगते हैं. तो फिर टीमें इस भविष्य को पहले ही क्यों नहीं जी रही हैं? इसलिए कि एआइ बस उतना ही अच्छा है जितना संदर्भ उसे मुहैया करवाया जाता है.

गोपनीय मसाला: संदर्भ
आधुनिक एआइ मॉडल बहुत सारी सामान्य जानकारी एकत्र कर सकता है. लेकिन इसे आपके संगठन के भीतर की जीती-जागती असलियत के बारे में आम तौर पर कुछ पता नहीं होता. इसे खुद पता नहीं चलता कि आपकी अनुपालन टीम किस शब्दावली पर जोर देती है, किस मापपद्धति से मामला बढ़ जाता है, किस वेंडर की तरफ से देरी होना सामान्य है, या 'कीप इट शॉर्ट' से आपके बॉस का क्या आशय है.

यही वजह है कि काम में प्रयुक्त एआइ को सबसे अलबेले मॉडल बनाने वाले नहीं जीतेंगे. इसे संदर्भ पर महारत रखने वाली टीमें जीतेंगी. संदर्भ संगठन की व्यंजन बनाने की विधि है. मसाले आपके नियम-कायदे, आपका कार्यप्रवाह, आपके सांचे, आपका फैसलों का इतिहास, और आपके संगठन को अनूठा बनाने वाली छोटी-छोटी आदतें हैं.

संदर्भ इंजीनियरिंग उस व्यंजन की पैकेजिंग करने की कला है ताकि एआइ भरोसेमंद और सुरक्षित ढंग से और बार-बार उसका अनुसरण कर सके. इसे अच्छी तरह किया जाए तो वही एआइ जेनेरिक चैटबोट की तरह व्यवहार करना बंद कर देता है और उस शख्स की तरह पेश आता है जिसे आपके कारोबार के लिए वास्तव में भर्ती किया गया है. खराब ढंग से किया जाए तो यह आत्मविश्वास से भरे ऐसे जवाब देता है जो आपकी असलियत से मेल नहीं खाते.

काम दुरुस्त, बढ़ा-चढ़ाकर बातें नहीं
एक बार जब एआइ के पास पर्याप्त संदर्भ होते हैं, तो यह सुझाव देने से कहीं ज्यादा कर सकती है. यह सुस्पष्ट परिभाषित दायरों में कार्रवाई कर सकती है. यह बार-बार होने वाले काम कर सकता है, यह संगठन की शैली में अनुबंध का प्रारूप बना सकती है, सहायक सबूतों के साथ ऑडिट का पुलिंदा तैयार कर सकती है, आपत्तियों को सुलझा सकती है, स्वीकृति भेज सकती है, या छूटे हुए कदम की तरफ ध्यान दिला सकती है. इंसान अब भी फैसले ले सकते और आपत्तियों से निबट सकते हैं. दूसरे शब्दों में मल्टीप्लेयर एआइ ऐसे कर्ताधर्ता के रूप में विकसित हो सकता है जो चैट बॉक्स के भीतर ही नहीं बल्कि तंत्र में काम करे.

उद्यम में व्यावहारिक विचार 'रन-टाइम कॉन्टेक्स्ट' या कार्यविधि संदर्भ होता है. अर्थात् एआइ को काम करते हुए ही विशेष स्थितिगत ब्योरे देना, ताकि वह अंदाजा न लगाए और सामान्य ढंग से व्यवहार न करे. जब संदर्भ सही तरीके से पकड़ा जाता है, तो ज्ञान और जानकारी कुछेक लोगों के दिमागों में कैद होकर नहीं रह जाती. युवा कर्मचारी तेजी से काम सीख सकते हैं. यह रफ्तार और निष्पक्षता के लिए भी अच्छा है.

2026 के लिए भविष्यवाणी
हम आपके हाथों खुलने वाले औजार के रूप में एआइ के बारे में बात करना बंद कर देंगे, और वर्कफ्लो के तरीकों में भागीदार के तौर पर एआइ को अनुभव करने लगेंगे. यह डेस्क की बगल से निकलकर मिल-जुलकर काम करने की वास्तविक मशीनरी के भीतर आ जाएगी. विजेता 'हर चीज के लिए एआइ का इस्तेमाल' करने वाली टीमें नहीं होंगी. वे ऐसी टीमें होंगी जो तय करेंगी कि कौन-सा काम इतना दोहराने लायक है कि उसे एआइ को दिया जा सके, कब इंसानी फैसलों की जरूरत है, और कौन-से संदर्भ पूरी व्यवस्था को भरोसेमंद बनाते हैं.

चूंकि एआइ मॉडल के इस जमाने में संदर्भ या टीम का स्थानीय ज्ञान वास्तविक कच्चा माल है, यह फायदे का ऐसा स्रोत बन जाता है जिसकी प्रतिस्पर्धी रातोरात नकल तैयार नहीं कर सकते. मल्टीप्लेयर एआइ आ रहा है. सुपर एजेंट इसके सबसे ज्यादा दिखाई देने वाले रूपों में से एक होंगे. भविष्य के दफ्तर में नए किस्म का सहयोगी होगा, जो कड़ी मेहनत से टीम की सीखी गई बातें याद रखेगा और कम गलतियां करते हुए ज्यादा तेजी से आगे बढ़ने में सभी की मदद करेगा.

(रोहन एन. मूर्ति वर्कफैब्रिक एआइ के संस्थापक हैं.)

खास बातें

  • एआइ टीमों के बंटे काम में हिस्सा लेगा. इसे 'मेरा सहयोगी' कम और 'हमारा साथी' ज्यादा समझिए.
  • काम में प्रयुक्त एआइ का अगला चरण सबसे अलबेले मॉडल बनाने वाले नहीं जीतेंगे. इसे संदर्भ पर महारत रखने वाली टीमें जीतेंगी.
  • हम वर्कफ्लो के तरीकों में भागीदार के तौर पर एआइ को देखेंगे. यह डेस्क के साइड से निकलकर मिल-जुलकर काम करने की वास्तविक मशीनरी हो जाएगा.
  • अच्छे से किया जाए तो वही एआइ जेनरिक चैटबोट की तरह व्यवहार करना बंद कर उस शख्स की तरह पेश आता है जिसे आपके कारोबार के लिए वास्तव में भर्ती किया गया है. खराब ढंग से किया तो यह आत्मविश्वास भरे ऐसे जवाब देता है जो असलियत से मेल नहीं खाते.

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