कल के बारे में खुद सोचकर काम करने वाली फैक्ट्री
योजना बनाने से लेकर प्रोडक्शन और क्वालिटी तक में एआइ के शामिल हो जाने से अब ऑटो कंपनियां इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग की युक्ति अपना रहीं जो कि इस उद्योग की आंतरिक दृढ़ता की बुनियाद.

- गोपालकृष्णन सी.एस.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब मैन्युफैक्चरिंग में अब एक अतिरिक्त अपग्रेड जैसा नहीं रहा. यह आधुनिक उद्योग का ऑपरेटिंग सिस्टम बन चुका है. वैश्विक थिंक टैंकों की राय इस पर एकमत है: पीडब्ल्यूसी इसे ''डूइंग डिजिटल’’ से आगे बढ़कर ''बीइंग डिजिटल’’ की यात्रा बताता है, जिसमें इंटेलिजेंस सीधे वर्कफ्लो के ढांचे में समाहित होती है.
मैकेंजी के मुताबिक, प्रोडक्टिविटी में बढ़त अब इंसान और मशीन की साझेदारी पर निर्भर है. डेलॉएट वहीं पर इंडस्ट्री 4.0 को प्रतिस्पर्धा का विकल्प नहीं, बल्कि लचीलापन और टिकाऊपन पक्की करने की रणनीति मानता है. स्मार्ट फैक्ट्रियां और इंटेलिजेंट ऐप्लिकेशन अब अनिवार्य हो चुके हैं. इस बदलाव का नेतृत्व करने के लिए भारत अच्छी स्थिति में है.
एआइ और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग
हुंडई मोटर इंडिया में तकनीक हर स्तर पर संचालन को दिशा देती है. एक डेटा-केंद्रित और इंटेलिजेंट इकोसिस्टम के जरिए यहां पूरा ऑपरेशन चलता है. हमारा आइटी परिदृश्य अत्याधुनिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं से जोड़ता है, जो वैल्यू चेन के हर चरण को कवर करता है—प्रोडक्शन प्लानिंग से लेकर अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल-फर्स्ट कस्टमर एंगेजमेंट तक.
प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और रियल-टाइम मॉनिटरिंग इंजीनियरिंग टीमों को उपकरणों के रखरखाव और प्रोसेस कंट्रोल को बेहतर करने में सक्षम बनाते हैं. अहम पैरामीटर्स की लगातार निगरानी और एआइ मॉडल्स के इस्तेमाल से हम रुकावटों को सिस्टम के बंद होने से पहले ही दूर कर लेते हैं. क्वालिटी एश्योरेंस में भी बड़ा बदलाव आया है. डिजिटल प्री-असेंबली, वर्चुअल सिमुलेशन और एआइ-आधारित विजन सिस्टम्स से डायमेंशनल प्रीसिजन पक्की होती है, टॉर्क स्पेसिफिकेशन्स की पुष्टि होती है और इलेक्ट्रॉनिक्स की सख्त जांच की जाती है.
इन सभी प्रक्रियाओं का अंत क्रमिक साइन-ऑफ में होता है, जो बिना किसी समझौते वाली बिल्ड क्वालिटी के हमारे वादे को सुरक्षित रखता है. हमारी सॉफ्टवेयर डिफाइंड फैक्ट्री (एसडीएफ) की परिकल्पना डेटा, कनेक्टिविटी और इंटेलिजेंस को एक साथ जोड़कर उत्पादन को एंड-टू-एंड संचालित करती है. 2,000 से ज्यादा क्रिटिकल मशीनें हर साल 20 अरब से ज्यादा डेटा पॉइंट्स तैयार करती हैं, जबकि डैशबोर्ड्स 300 से ज्यादा प्रोसेस पैरामीटर्स की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करते हैं.
हम इंजीनियरिंग और क्वालिटी में रूट-कॉज एनालिसिस के लिए जेनरेटिव एआइ, सिनेरियो प्लानिंग के लिए इंडस्ट्रियल डिजिटल ट्विन्स और अल्ट्रा-रिलाएबल, लो-लेटेंसी कम्युनिकेशन के लिए 5जी इंटीग्रेशन की सक्रिय तौर पर पड़ताल कर रहे हैं. हुंडई के ग्लोबल स्मार्ट फैक्ट्री नेटवर्क, जिसमें हुंडई मोटर ग्रुप इनोवेशन सेंटर सिंगापुर (एचएमजीआइसीएस) भी शामिल है, के सहयोग से लर्निंग साइकल तेज होती है और एचएमआइएल में साझा मानकों, साइबर-फिजिकल सिक्योरिटी और एआइ गवर्नेंस के जरिए जिम्मेदारी के साथ उत्पादन होता है.
उद्योग अब डार्क फैक्ट्रियों की ओर बढ़ रहा है. ऐसे हाइ-ऑटोमेशन माहौल में एआइ सिस्टम्स ही निरीक्षण, असेंबली और इंट्रालॉजिस्टिक्स का न्यूनतम मानवीय मौजूदगी के साथ प्रबंधन करते हैं. डिजिटल टूल्स इंसानी फैसले और रचनात्मकता को विस्तार देते हैं, जिससे भूमिकाएं दोहराए जाने वाले कामों से आगे बढ़कर उच्च स्तर का समस्या-समाधान और समन्वयन तय होता है.
ह्यूमनॉइड और कोलैबोरेटिव रोबोट्स ( कोबोट्स) तेजी से फ्रंटलाइन टीमों के साथ काम साझा करेंगे, खासकर उन कामों में जो शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण हों या जहां बेहद सटीकता की जरूरत हो. ऑटोमेशन निरंतरता देता है, जबकि इंसान अनुकूलन और नवाचार लाते हैं. नतीजा एक ऐसा शॉपफ्लोर है जो ज्यादा सुरक्षित, ज्यादा अनुमानित और मांग में उतार-चढ़ाव के प्रति ज्यादा लचीला और मजबूत है.
आबोहवा का खास ख्याल
मैन्युफैक्चरिंग में उत्कृष्टता और टिकाऊपन को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता. एचएमआइएल ने चेन्नै प्लांट में 100 फीसद रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल हासिल कर साबित किया है कि डीकार्बोनाइजेशन और बड़े पैमाने पर उत्पादन एक साथ हो सकते हैं. कंपनी ने पर्यावरण प्रबंधन और ऊर्जा प्रबंधन की स्पष्ट नीतियां और सिद्धांत तय कर मजबूत ईएसजी आधार बनाया है, ताकि पर्यावरण पर असर कम हो और बदलते कारोबारी हालात तथा हितधारकों की अपेक्षाओं के अनुरूप लगातार सुधार होता रहे.
स्कोप II, II और III के लिए तय रोडमैप के तहत एचएमआइएल 2045 तक कार्बन न्यूट्रल बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है. डेलॉएट के मुताबिक, स्मार्ट फैक्ट्रियां लचीलेपन का फायदा देती हैं—डिजिटल कंट्रोल से बर्बादी घटती है, सप्लाइ चेन स्थिर होती है और सर्कुलर प्रैक्टिस को बढ़ावा मिलता है, जिससे एफिशिएंसी और सस्टेनेबिलिटी साथ-साथ आगे बढ़ती हैं. जमीनी स्तर पर इसका मतलब है कम अनियोजित रुकावटें, कम स्क्रैप, ज्यादा स्मार्ट लॉजिस्टिक्स और साफ ऊर्जा. ये सभी मिलकर लंबी अवधि की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करते हैं.
कामकाज का भविष्य
जैसे-जैसे एआइ और रोबोटिक्स मैन्युफैक्चरिंग को नया आकार दे रहे हैं, वैसे-वैसे कामगारों के कौशल को भी तेजी से बदलना होगा. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम का अनुमान है कि अगले पांच साल में 44 फीसद कोर स्किल्स बदल जाएंगी, जिनमें एआइ, बिग डेटा और डिजिटल समझ की सबसे ज्यादा मांग होगी. मैकेंजी की रिसर्च बताती है कि जो मैन्युफैक्चरर्स एआइ को बड़े पैमाने पर अपनाते हैं, वे उत्पादकता और क्षमता में 20 से 30 फीसद तक सुधार हासिल करते हैं.
साथ ही डेटा साइंस, ऑटोमेशन इंजीनियरिंग, डिजिटल न्न्वालिटी और साइबर-फिजिकल सिस्टम मैनेजमेंट जैसे नए रोल भी बनते हैं. साफ है कि इंटेलिजेंट ऑटोमेशन इंसानों की भूमिका को कम नहीं करता, बल्कि उसे ऊंचा उठाता है. इससे कर्मचारी दोहराए जाने वाले कामों से निकलकर ज्यादा जटिल समस्या समाधान और सिस्टम समन्वयन की ओर बढ़ते हैं.
हुंडई में हम इन उभरते क्षेत्रों के लिए टैलेंट तैयार करने को अग्रणी संस्थानों के साथ साझेदारी में निवेश कर रहे हैं. हमारा ग्लोबल स्मार्ट फैक्ट्री नेटवर्क ऐसे लाइव लर्निंग माहौल देता है, जहां टीमें सिर्फ डिजिटल टूल्स इस्तेमाल नहीं करतीं, बल्कि उन्हें आकार भी देती हैं. मकसद साफ है: हर फंक्शन को ऐसी स्किल्स से लैस करना, जिससे लोग इंटेलिजेंट सिस्टम्स के साथ असरदार ढंग से काम करें और एआइ आधारित दौर में प्रगति के प्रतीक बनें.
मैन्युफैक्चरिंग का अगला दौर पहले ही आ चुका है. प्रीडिक्टिव एनालिटिक्स, डिजिटल ट्विन्स, ऑटोनॉमस रोबोट्स और सॉफ्टवेयर-इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस शॉपफ्लोर पर एक साथ आ रहे हैं. काम की रफ्तार और बनावट बदल रही है: फीडबैक लूप तेज हैं, ब्लाइंड स्पॉट कम हैं और फैसलों पर भरोसा ज्यादा है. लेकिन जो कायम है, वह बुनियादी बातें हैं—सुरक्षा, गुणवत्ता और कस्टमर का भरोसा.
सस्टेनेबिलिटी को केंद्र में रखते हुए इंसान और मशीन के सहयोग को सक्षम बनाकर और भविष्य के लिए तैयार स्किल्स विकसित करके एचएमआइएल बदलाव का एक ऐसा मानक स्थापित कर रहा है, जो मजबूती और जिम्मेदारी पर आधारित है. एआइ इसकी आर्किटेक्चर है, डेटा इसका कच्चा माल है और लोग प्रगति की गाथा रच रहे हैं. भविष्य की फैक्ट्री सिर्फ ज्यादा ऑटोमेटेड नहीं होगी, वह ज्यादा स्मार्ट, ज्यादा साफ और अपने उद्देश्य में बेहद मानवीय होगी.
(गोपालकृष्णन सी.एस. हुंडई मोटर इंडिया लि. के पूर्णकालिक निदेशक और चीफ मैन्युफैक्चरिंग ऑफिसर हैं.)