कमजोर पंख से परवाज का हश्र
एअर इंडिया के भीषण विमान हादसे और दिसंबर में इंडिगो की आपदा से पता चला कि तेज वृद्धि, खराब देखरेख और नियम-कायदे लागू करने में होने वाली देरी ने किस तरह 2025 में विमानन क्षेत्र की कलई खोल दी.

विमानन क्षेत्र के लिए 2025 बहुत परेशान करने वाला साल था. साल के ऐन बीच देश की दूसरी सबसे बड़ी और अब टाटा ग्रुप की मिल्कियत में चल रही विमान सेवा एअर इंडिया की फ्लाइट 171 अहमदाबाद हवाई अड्डे पर के पास दुर्घटना का शिकार हो गई. 12 जून को लंदन गैटविक जा रहा बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर उड़ान भरने के फौरन बाद गिर गया. इसमें सवार 241 यात्री और जमीन पर चपेट में आए 19 लोग मारे गए.
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की जुलाई में आई 15 पन्ने की शुरुआती रिपोर्ट ने जितने जवाब नहीं दिए, उससे कहीं ज्यादा सवाल खड़े कर दिए. इसमें विमान के कैप्टन और फर्स्ट ऑफिसर के बीच बिल्कुल आखिरी वक्त हुई उस बातचीत का जिक्र था जो फ्लाइट रिकॉर्डर पर दर्ज हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों इंजन के फ्यूल स्विच 'कट ऑफ’ की स्थिति में थे, और एक पाइलट दूसरे से पूछ रहा था कि उसने उन्हें कट ऑफ क्यों किया, जबकि दूसरा जवाब दे रहा था कि उसने ऐसा नहीं किया. षड्यंत्र की कहानियां गढ़ी जाने लगीं.
बाद में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हादसे के एक महीने के भीतर अंतरिम रिपोर्ट प्रकाशित करना अनिवार्य था और इसमें किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है. अलबत्ता जो चीज तीव्र सार्वजनिक छानबीन के दायरे में आ गई वह एअर इंडिया को विरासत में मिली परेशानियां थीं.
सरकार की विनिवेश प्रक्रिया के जरिए 2022 में टाटा ग्रुप के हाथों अधिग्रहीत की गई यह विमान सेवा अपने बेड़े को आधुनिक बनाने की जरूरत, विमान के रखरखाव में खामियों, तकनीकी देखरेख और पाइलटों की कमी से जूझ रही है. टाटा संस और एअर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने त्रासदी के कुछ वक्त बाद कर्मचारियों से कहा कि यह दुर्घटना 'सुरक्षित एयरलाइन’ बनाने के लिए 'उत्प्रेरक’ थी. यह वह वादा है जो कई साल तक इस विमान सेवा का इम्तिहान लेता रहेगा.
उथलपुथल दिसंबर में विमानन क्षेत्र में फिर लौट आई. इस बार इसकी चपेट में घरेलू बाजार में 60 फीसद से ज्यादा की हिस्सेदारी रखने वाली, भारत की सबसे बड़ी विमान सेवा इंडिगो थी. यह एयरलाइन फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) या उड़ान कार्य समय सीमा के नए नियमों का पालन करने में नाकाम रहने के बाद हजारों उड़ानें रद्द करने को मजबूर हो गई. यही नियम तय करते हैं कि पाइलट कितने समय तक लगातार काम कर सकते हैं, उन्हें कितने समय आराम करना चाहिए, और उन्हें कितनी नाइट लैंडिंग करने की इजाजत है.
संकट से पहले इंडिगो 400 से ज्यादा विमानों का संचालन करती थी, रोज करीब 2,300 उड़ानें ले जाती थी, 90 से ज्यादा घरेलू और 45 अंतरराष्ट्रीय ठिकानों तक उड़ान भरती थी, और रोज औसतन 5 लाख यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती थी. मगर 4 से 6 दिसंबर के बीच जो हुआ, वह भयावह था. ऐसा पहले नहीं हुआ जब 2,948 घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिनमें अकेले 5 दिसंबर को 1,588 उड़ानें रद्द की गईं.
दसियों हजार यात्री फंस गए, हवाई अड्डों की लाउंज खचाखच भर गईं, किराए आसमान छूने लगे. किरायों पर लगाम लगाने के लिए नागरिक विमानन महानिदेशक को आगे आना पड़ा. शेयर बाजारों में इंडिगो के शेयर गिर गए. विमान सेवा के सर्वेसर्वाओं ने हालांकि माफीनामे जारी किए, लेकिन केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्रालय ने कड़ी कार्रवाई करने और सजा देने का वादा किया और उड़ानों का संचालन सुचारु बनाने को सर्दियों के लिए निर्धारित इंडिगो की उड़ानों में 10 फीसद की कटौती कर दी.
दोनों संकटों ने मिलकर एक ऐसी विमानन व्यवस्था को उघाड़कर रख दिया जिसमें वृद्धि सुरक्षा उपायों से आगे निकल गई और दूरदूर्शिता के बजाए नाकामी नियम-कायदों का पीछा कर रही थी.
अहमदाबाद में हुए हादसे को लेकर विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की जुलाई में जारी प्रारंभिक रिपोर्ट ने इसे और भी रहस्यमयी बना दिया
मुसीबतों का साल
› 12 जून को एअर इंडिया की उड़ान 171 अहमदाबाद से उड़ान भरने के फौरन बाद हादसे का शिकार हो गई, जिसमें 241 विमान सवार और 19 लोग जमीन पर चपेट में आने से मारे गए.
› दिसंबर में भारत की सबसे बड़ी विमान सेवा इंडिगो ने पाइलटों के कार्य समय सीमा नियमों का पालन न कर पाने के बाद करीब 3,000 उड़ानें रद्द कर दीं, जिससे दसियों हजार यात्री फंस गए और सरकार को दखल देना पड़ा.