प्रधान संपादक की कलम से

अधिकारियों की फेहरिस्त में भी स्थायीपन है, बस कुछ प्रमुख नियुक्तियां गौरतलब हैं. इनोवेटरों और इन्फ्लूएंसरों की नई श्रेणियां देश के बदलते हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर यानी शख्सियतों और उनके असर की बानगी हैं

इंडिया टुडे कवर : ऊंचे और असरदार
इंडिया टुडे कवर : ऊंचे और असरदार

—अरुण पुरी

इक्कीस साल पहले, हमने देश की सत्ता और रसूख के उथल-पुथल भरे दायरे को मापने का एक भरोसेमंद तरीका ईजाद किया था. तब से, इंडिया टुडे की सालाना 'रसूखदारों की फेहरिस्त' में पाठकों ने हमेशा गहरी रुचि दिखाई है. यह देश के खासमखास लोगों की चकरघिन्नी खाती पोर्ट्रेट गैलरी जैसी है, जिनका असर अक्सर उनके कार्यक्षेत्र से कहीं आगे जिंदगी के दूसरे दायरों को छूता है.

अपनी मूल अवधारणा में भी हमारी नजर दो बिंदुओं पर टिकी थी: फौरी हकीकत और भविष्य. वजह यह कि हमेशा संभावना बनी रहती है कि मौजूदा परिस्थितियां बदल सकती हैं. जैसा कि मैंने 2003 में ऊंचे और असरदार लोगों की पहली फेहरिस्त के वक्त लिखा था, मकसद ''हमारे समाज और राजनीति में दीर्घकालिक बदलावों पर गौर करने का कोई पैमाना बनाना'' था.

तो, कौन ऊपर है और कौन नीचे? सत्ता के गलियारों में बदलाव बेहद बारीक है, फिर भी, हमने आंतरिक संतुलन में खास बदलाव दर्ज किया है. सबसे अहम बदलाव हमने ऊंचे और असरदारों की फेहरिस्त के ढांचे में फेरबदल और विस्तार के जरिए साझा किया है. इस आइडिया पर हमने पहले भी अमल किया है और उसका विस्तार किया है. 50 रसूखदारों की फेहरिस्त के अलावा, हमने कुछ श्रेणियों को अलग किया था: राजनेता, सरकारी अधिकारी और वैश्विक भारतीय.

वजह यह थी कि राजनेता और अधिकारी को ताकत अपने पद से मिलती है जबकि वैश्विक भारतीयों की तुलना उनके भारतीय समकक्षों से मुश्किल थी. इस वर्ष, हमने उस शुरुआती सिद्धांत को पूरी फेहरिस्त में लागू करने का फैसला किया, जो पहले समग्रता में था.

हमने राजनेताओं, अधिकारियों और वैश्विक भारतीयों की फेहरिस्त बरकरार रखी है, लेकिन 50 रसूखदारों की फेहरिस्त को सात और श्रेणियों में बांट दिया है, जिसमें हरेक में 10 प्रविष्टियां हैं. ये श्रेणियां हैं: कारोबारी, पेशेवर, खिलाड़ी, मनोरंजन, कला और संस्कृति के लोग, इनोवेटर और इन्फ्लूएंसर. अंतिम दो श्रेणियां बदलते वक्त को दर्शाती हैं—बिल्कुल 21वीं सदी टाइप की दो.

इसके अलावा, आइकन हैं और यह इकलौती ऐसी श्रेणी है जिसमें बाकी श्रेणियों के तर्क नहीं चलते. ये जीवन के हर क्षेत्र से निकले लोग हैं जिन्होंने अपने मूल पेशे से कहीं अधिक प्रतिष्ठा हासिल की है और उनकी प्रसिद्धि में एक तरह का स्थायीपन है. अलग-अलग श्रेणियों में विस्तार से फेहरिस्त अधिक समावेशी बन पड़ी है. हर श्रेणी में दस प्रविष्टियां होने से ये 110 शख्सियतें हैं, जिनकी बातें और काम करोड़ों लोगों की जिंदगियों पर अपने असर का साया डालते हैं. 

7 जून, 2023

नायकों के अलावा, हर किसी की रैंकिंग अपने पेशे के लोगों के बीच की जाती है. तर्क यह है कि रैंकिंग के एकतरफा होने से बचा जाए. आखिरकार, किसी कामयाब कारोबारी के असर की तुलना भला किसी खेल सितारे या धर्मगुरु या किसी लाजवाब संगीतकार से कैसे की जा सकती है? हर कोई जिंदगी के खास दायरे में असर डालता है. उन्हें रैंक करने से जीवन के केवल एक पहलू के प्रति पूर्वाग्रह का पता चलेगा. सभी को समान और अलग-अलग स्थान देकर, हम आज के भारत की एक विहंगम छवि उकेरने के मुकाम पर पहुंचे हैं.

विचार कोई भ्रामक पदानुक्रम तैयार करने की जगह हमारी जिंदगी में असर डालने वालों की अधिक यथार्थवादी तस्वीर पेश करने का है. बारीक विश्लेषण से पता चलता है कि 2023 की 50 रसूखदारों की फेहरिस्त से 22 नाम इस साल बाहर हो गए हैं. उनमें कई कारोबारी हस्तियां हैं, यह ऐसा क्षेत्र हैं, जहां आम तौर पर बहुत कम बदलाव देखने को मिलते हैं. कुछ तो जिंदगी के सामान्य प्राकृतिक बदलाव की वजह से है: मसलन, रतन टाटा का जाना हम सभी को शोक में डुबो गया. कुछ बदलते माहौल की वजह से है: जैसे, राजनेताओं का चक्र घूमता है.

राजनीति में ताकतवरों की पिछले साल की फेहरिस्त पर इस साल लोकसभा चुनाव के खेत-खलिहानों की तेज गर्मी और हवाओं का भारी दबाव था. ऊपरी तौर पर, उसमें शामिल प्रमुख ताकतवर 2024 की फेहरिस्त में बरकरार तो हैं, लेकिन गुरुत्वाकर्षण के आंतरिक केंद्र अधिक समान रूप से बंट गए हैं. थोड़ा-सा फेरबदल और नई प्रविष्टियां दर्शाती हैं कि कैसे एक चुनाव से देश में सत्ता का बंटवारा बदल गया है.

'उच्च-ताकतवर' अधिकारियों की फेहरिस्त में भी स्थायीपन है, बस कुछ प्रमुख नियुक्तियां गौरतलब हैं. इनोवेटरों और इन्फ्लूएंसरों की नई श्रेणियां देश के बदलते हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर यानी शख्सियतों और उनके असर की बानगी हैं. यह स्वीकार करते हुए कि इन दिनों पीढ़ियां तेजी से बदल रही हैं, हमारे पास टेक आधारित स्टार्ट-अप उद्यमियों की तीन पीढ़ियां हैं. उनमें से कम से कम एक संरक्षक और मददगार का कद पा चुकी है. इन्फ्लूएंसरों में हमने हर दायरे को शामिल किया है: सवाल पूछने वाले आलोचक, जवाब देने वाले धर्मगुरु और संजीदा हकीकत को व्यंग्य में ढालकर जाहिर करने वाले कॉमेडियन.

मुझे उम्मीद है कि आपको हमारी फेहरिस्त तैयार करने का नया तरीका पसंद आएगा. ऐसे कई प्रतिभाशाली और योग्य लोग हैं जो छूट गए हो सकते हैं. उनके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूं. भारत ऐसा देश है जहां बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले भरे पड़े हैं, जो हमारे जीने के तरीके में बदलाव लाते हैं. मायने रखने वाले शख्सियतों का कोई भी चयन सटीक नहीं हो सकता. हमने आपको उसकी एक झलक दिखाने की शिद्दत से कोशिश की है.

— अरुण पुरी, प्रधान संपादक और चेयरमैन (इंडिया टुडे समूह)

Read more!