इंडिया टुडे एनर्जी समिट : हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भारत कैसे बन सकता है वैश्विक अगुआ, बता रहे एक्सपर्ट?
जीवाश्म ईंधन से सोलर सेल तक भारत की ऊर्जा क्रांति रोमांचकारी है, मगर क्या इसकी मौजूदा रफ्तार कायम रखी जा सकती है? नीति निर्माता, उद्योग के अगुआ और विशेषज्ञ बता रहे हैं अपना-अपना नजरिया और चिंताएं

दरअसल, नेट-जीरो तक पहुंचने के लंबे सफर में भारत का लक्ष्य 2030 तक अपने बिजली उत्पादन का 50 फीसद गैर-जीवाश्म ईंधनों से हासिल करना और जीडीपी की कार्बन उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से कम करके 45 फीसद तक लाना है. इंडिया टुडे एनर्जी समिट 2024 इन महत्वाकांक्षी हरित लक्ष्यों की ओर देश की तरक्की का जायजा लेने और चुनौतियों से निबटने के लिए विद्वानों का जमावड़ा बन गया.
केंद्र सरकार के शीर्ष हितधारक—केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और प्रल्हाद जोशी के साथ नवीकरणीय ऊर्जा सचिव भूपिंदर भल्ला—ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों के 20 सीईओ और आठ विशेषज्ञों के साथ आए और भारत के विकसित होते ऊर्जा परिदृश्य पर मंथन किया. समिट में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में आई उछाल के बीच नाजुक संतुलन उजागर हुआ, तो इसे मुमकिन बनाने वाली अहम चीजें यानी ग्रिड अपग्रेड और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर भी रोशनी डाली गई.
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता होने के नाते भारत अनूठी चुनौती से घिरा है: घरेलू उत्पादन बढ़ाते हुए ऊर्जा आयात कम करना और सौर तथा पवन ऊर्जा सरीखे ज्यादा स्वच्छ विकल्पों की ओर बढ़ना. 2030 तक 500 गीगावॉट की अक्षय ऊर्जा क्षमता पाने की राह में भूमि अधिग्रहण से लेकर वित्तपोषण और भंडारण टेक्नोलॉजी तक कई कांटे बिछे हैं.
विशेषज्ञों ने क्षमता बढ़ाने और निवेश लुभाने के जरूरी सुधारों के नुस्खे बताए, तो वितरण कंपनियों को ऊर्जा क्षेत्र की अहम धुरी बताया गया. समिट में नीतिगत सुधारों, नवाचारों, क्षेत्रीय सहयोग और बुनियादी ढांचे के संवर्धन से ओतप्रोत ऊर्जा की भविष्य की झलक भी मिली.
नवीकरणीय ऊर्जा: भारत कैसे बन सकता है वैश्विक अगुआ
"ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है और हमें चरणबद्ध तरीके से अक्षय या नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ जाना ही होगा...(मगर) दुनिया रातो-रात नहीं बदल सकती. हमारा लक्ष्य 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करना है."
"नवीकरणीय ऊर्जा का जनांदोलन बनना बहुत जरूरी है...यह महज सरकारी पहल नहीं है. यह मिशन भावी पीढ़ियों के लिए है और हर नागरिक को इसका हिस्सा बनना होगा."
— प्रल्हाद जोशी, केंद्रीय मंत्री, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण
अहम बात
2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधनों से 500 गीगावॉट की क्षमता और कुल क्षमता में उनकी 50 फीसद हिस्सेदारी हासिल करने के उद्देश्य के साथ भारत नवीकरणीय ऊर्जा के अपने लक्ष्य को हासिल करने की राह पर है.
सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार में भूमि अधिग्रहण बड़ी चुनौती बना हुआ है, मगर सरकार मसलों को हल करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है.
भारत अपने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के साथ आगे बढ़ रहा है और उसका लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन में खुद को वैश्विक अगुआ के रूप में स्थापित करने के लिए साल 2030 तक बुनियादी ढांचा स्थापित करना है.
नवीकरणीय ऊर्जा: भारत कैसे बन सकता है वैश्विक अगुआ
अहम बात
सरकार ने 2030 तक 30 फीसद निजी कारों, 70 फीसद व्यावसायिक वाहनों, 40 फीसद बसों और 80 फीसद दोपहिया तथा तिपहिया वाहनों को ईवी बनाने का लक्ष्य रखा है.
डीजल बसों पर 60 रुपए के मुकाबले 39 रुपए प्रति किमी की लागत के साथ इलेक्ट्रिक बसें चलाना बनिस्बतन सस्ता है, इसीलिए मुंबई सरीखे शहरों में इन्हें अपनाया जा रहा है.
मांग और उत्पादन में बढ़ोतरी की वजह से ईवी की कीमतें कम हो रही हैं, खासकर इसलिए भी कि लीथियम-आयन बैटरी की लागत में कमी आई है, जिससे सब्सिडी की जरूरत बिल्कुल खत्म हो गई है.
"दिल्ली में परिवहन से जुड़े प्रदूषण को हम दो साल के भीतर 50-60 फीसद से ज्यादा कम कर देंगे. हम सार्वजनिक यातायात के साधनों को बायोईंधन और इलेक्ट्रिक में बदलने सहित कई परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं."
"अभी हम 22 लाख करोड़ रुपए मूल्य का जीवाश्म ईंधन आयात करते हैं, जिससे न केवल आर्थिक चुनौतियां पैदा होती हैं बल्कि वायु प्रदूषण भी बढ़ता है. इसका जवाब हैं इलेक्ट्रिक वाहन, और उनकी बिक्री में हम पहले ही 300 फीसद की बढ़ोतरी देख रहे हैं."
—नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग
पूर्व में उदय: दुनिया के लिए भारत की सौर दास्तान
"भारत को सौर लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पैमाने और गति पर ध्यान देगा होगा. पूरी मूल्य शृंखला पर नीचे से ऊपर नजर डालनी होगी, वरना हम अपनी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर ही निर्भर रहेंगे."
—अमित सिंह, सीईओ, अदाणी, ग्रीन एनर्जी
"दो क्षेत्र बेहद अहम हैं. पहला, हम नवीकरणीय ऊर्जा को अधिक विश्वसनीय और एक इकोसिस्टम कैसे बनाते हैं...दूसरा, डिस्कॉम यह बिजली कैसे खरीदेगी."
—प्रवीर सिन्हा, सीईओ और एमडी, टाटा पावर
"भूमि, ट्रांसमिशन, भंडारण आदि मसलों के कारण हमें 15 गीगावॉट (सौर ऊर्जा क्षमता का) जोड़ने के लिए जूझना पड़ा. इस पूरे परिदृश्य पर अब बातचीत होनी चाहिए."
—सुमंत सिन्हा, चेयरमैन, रिन्यू
"सिल्लियां, वेफर्स आदि को उपयोग करने वाली अधिकतर प्रौद्योगिकियां अगले दशक में शायद मौजूद न रहें. हमें भविष्य की तकनीक पर निवेश करना होगा."
—रामेश्वर प्रसाद गुप्ता, सीएमडी, सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड
"मैन्युफैक्चरिंग का अगला चरण उत्पाद-आधारित के बजाए घटक-आधारित प्रतिस्पर्धा का होगा. यह चीन प्लस वन नहीं, बल्कि भारत प्लस कई होगा"
—अरुणाभ घोष, सीईओ, सीईईडब्ल्यू
"वस्तु एवं सेवा कर से जुड़ी सिफारिशें करने वाली जीएसटी काउंसिल की तर्ज पर पावर सेक्टर काउंसिल भी तैयार की जा सकती है. इससे इस क्षेत्र की नीतियों, नियमों और मानकों के समन्वयन में मदद मिलेगी"
—विनीत मित्तल, चेयरमैन, अवाडा ग्रुप
भारत में खोज: तेल और प्राकृतिक गैस की तलाश
"हमें छोटी और मध्यम खोजों के मुद्रीकरण के उपाय तलाशने होंगे. बड़ी खोजें अमूमन नहीं होती हैं. हमें अपनी रणनीतियां फिर से तैयार करनी होंगी"
—संजय बर्मन रॉय, प्रेसिडेंट, एक्सप्लोरेशन ऐंड प्रोडक्शन बिजनेस, रिलायंस इंडस्ट्रीज
"भारत ने नीलामी प्रणाली को बदल दिया, अन्वेषण के नए नियम लागू किए. अब खोजकर्ता के लिए कारोबार और आसान बनाने पर फोकस होना चाहिए"
—देब अधिकारी, डायरेक्टर, एफआइपीआई
"अब जल्दी ही सब सफेद हाइड्रोजन पर ध्यान देंगे. यह प्राकृतिक हाइड्रोजन है और यह खत्म नहीं होने वाला. आज इसे खोजने और हासिल करने की सीमित तकनीक है"
—रबि बस्तिया, जियोसाइंटिस्ट
हरित हाइड्रोजन का भविष्य
"ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था को कार्बन-मुक्त करना पंचामृत योजना का अहम तत्व है. हमने निर्यात बाजारों की तलाश शुरू कर दी है, पर घरेलू मांग भी अधिक है"
—भूपिंदर भल्ला, सचिव, रिन्यूएबल एनर्जी, भारत सरकार
ग्रिड का विकास और उससे आगे
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना
"सौर घंटों के दौरान, बिजली का प्रवाह दक्षिण से उत्तर होता है (और इसके उलट भी). ट्रांसमिशन सिस्टम को इसे संभालना होगा"
—एस.आर. नरसिम्हन, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, ग्रिड-इंडिया
"एक सूर्य, एक ग्रिड, एक विश्व की अवधारणा ऐसी है कि विभिन्न देश समय क्षेत्र के अंतर और पीक आवर्स को साध सकते हैं"
—अमित जैन, सीनियर एनर्जी स्पेशलिस्ट, वर्ल्ड बैंक
बिजली: डिस्कॉम का सशक्तिरण
"गुजरात में अलहदा व्यवस्था है...एक होल्डिंग कंपनी बिजली खरीद और नीतिगत मामलों से निबटती है, ऐसे में डिस्कॉम बिजली आपूर्ति, बिलिंग और संग्रह पर ध्यान केंद्रित करती हैं"
—योगेश चौधरी, एमडी, दक्षिण गुजरात विज कंपनी लिमिटेड
"ऊर्जा बदलाव से डिस्कॉम के सामने चुनौती पेश हो रही है. हमें उन्हें बदलाव के लिए तैयार करना होगा, ग्रिड स्थिरता के साथ-साथ निरंतरता के हिसाब से भी"
—आशीष गोयल, चेयरमैन, यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड
"वर्षों तक डिस्कॉम भारत के ऊर्जा क्षेत्र की सबसे कमजोर कड़ी बनी रही. कुछ राज्यों में एटीऐंडसी क्षति 60 फीसद तक है, जबकि कुछ राज्यों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है"
—राजीव के. मिश्र, पूर्व सीएमडी, पीटीसी इंडिया लिमिटेड
"तेलंगाना किसानों को मुफ्त बिजली देता है. अब हम उन्हें पीएम-कुसुम स्कीम के तहत सोलर पंप लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं"
—कर्नाती वरुण रेड्डी, सीएमडी, नॉर्दर्न पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी ऑफ तेलंगाना लिमिटेड
स्वच्छ ऊर्जा का सफल
"गुजरात का लक्ष्य 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा की 100 ‘‘गीगावॉट स्थापित क्षमता हासिल करना है. इस ऊर्जा के लिए हमें बड़ी भंडारण क्षमता की जरूरत होगी"
—जय प्रकाश शिवहरे, मैनेजिंग डायरेक्टर, गुजरात ऊर्जा विकास, निगम लिमिटेड
"लि-आयन बैटरी के साथ, हम वाणिज्यिक वाहनों के लिए चौबीसों घंटे भंडारण प्रदान करने की खातिर ग्राफीन सुपरकैपेसिटर-आधारित बैटरी बनाने के लिए काम कर रहे हैं"
—दीपक पांडे, सीईओ, इन्वर्जी इंडिया प्रा.लि.
"वैश्विक स्तर पर, एलएनजी वाहनों को जोड़ने के लिए आंदोलन चल रहा है. इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड लंबी अवधि में 100 एलएनजी डिस्पेंसर जोड़ेगी; इस साल 5-6 स्टेशन जोड़ेगी"
—कमल किशोर चटीवाल, एमडी, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड
पवन ऊर्जा: चुनौतियों से पार
"भारत की खासियत यह है कि अगर आप सलोर कर्व और विंड कर्व को एक-दूसरे से ऊपर रखते हैं और भंडारण की मात्रा को जोड़ देते हैं तो यह आसानी से ताप से प्रतिस्पर्धा कर सकता है"
—गिरीश तांती, वाइस-चेयरमैन, सुजलॉन एनर्जी
"देश की पवन ऊर्जा की वास्तविक क्षमता को साकार करने के लिए कैरेज और कंटेंट को अलग करने की जरूरत है. भूमि की उपलब्धता एक बड़ा मसला है"
—बाला वी. कुट्टी, प्रमोटर, इंडोविंड एनर्जी
"पवन वृद्धि तेज करने के लिए...नए थर्मल प्लांट बनाना बंद करें, सोलर पार्कों के लिए जो किया गया है उसे दोहराएं, मौजूदा पवन फार्मों को सशक्त करने के लिए अनुकूल नीति लाएं"
—अजय शंकर, विशिष्ट फेलो, टीईआरआई
"भारत नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों के लिए सबसे अनुकूल देश है. मगर सरकार (मंत्रालयों) संबंधी कुछ अन्य मसले हैं जिन्हें फिर से देखने की जरूरत है"
—ए. नित्यानंद, सीईओ, रिन्यूएबल्स बिजनेस, इंडिया, सेमबीकॉर्प
"हमारे पास 100-200 मेगावॉट भंडारण क्षमता है. नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए हमारे पास करीब 200 गीगावॉट क्षमता होनी चाहिए"
—सम्बितोष महापात्रा, पार्टनर लीडर, ईएसजी, क्लाइमेट ऐंड एनर्जी, पीडब्ल्यूसी इंडिया
भारत के ऊर्जा बास्केट में लिग्नाइट का भविष्य
"लिग्नाइट कोयले का कोई छोटा भाई नहीं. यह अहम खनिज है...अगले कुछ दशकों तक. यूरोप में बड़े खिलाड़ी उत्पादन बढ़ा रहे हैं. चीन और इंडोनेशिया भी"
—रूपवंत सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर ऐंड एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन
नवीकरणीय क्षेत्र के लिए कौशल ब्रिगेड
"सिलिकॉन तकनीक अपनाने में बहुत कमी की जा रही. हमारे पास भले ही नीति हो, कारोबार हो, मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि सोलर पैनलों, सेल्स और सिल्लियां कौन बनाएगा"
—एस. सुंदर मनोहरन, डायरेक्टर जनरल, पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी