बजट 2024 : ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर संवारने के लिए कितनी जरूरत थी और क्या मिला?
हालांकि बुनियादी ढांचे को लेकर इस साल कोई धमाकेदार घोषणा नहीं की गई, फिर भी रेलवे, राजमार्ग, आवास, उद्योग और शहरी नियोजन सरीखे इसके हर क्षेत्र को मिली पर्याप्त रकम

नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकालों में कनेक्टिविटी सुधारने, लॉजिस्टिक लागत घटाने और भारत का कारोबारी माहौल बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दिया. यह जोर इस साल के बजट में भी बना हुआ है, हालांकि इस बार बड़ी नई घोषणाएं नहीं की गईं. लेकिन किसी गफलत में मत रहिए. 11.11 लाख करोड़ रुपए का अनुमानित पूंजीगत खर्च अभी भी जीडीपी का करीब 3.4 फीसद है.
हालांकि पिछले साल के बजट में 10 लाख करोड़ रु. के प्रावधान से यह 11 फीसद ज्यादा है. पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूंजी निवेश परिव्यय 33 फीसद बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रु. कर दिया था जो जीडीपी का 3.3 फीसद था. यह 2019-20 के आंकड़ों से लगभग तीन गुना है. वास्तव में 10 साल तक बुनियादी ढांचे को अपनी खर्च योजनाओं के केंद्र में रखने के बाद—जिसमें नए राजमार्ग, रेलवे और हवाई अड्डों का प्रावधान है—केंद्र ने अबकी इसे थोड़ा कम महत्व दिया है.
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष विवेक देबराय कहते हैं, "जो चीज टूटी ही नहीं उसे क्यों जोड़ना? राजमार्ग और रेलवे जैसे क्षेत्रों ने सफलता की कहानियां लिखी हैं. और उन्होंने पिछले कुछ सालों में किए गए पूंजी खर्च के बल पर अपनी क्षमताओं में काफी विस्तार किया है." अपने बजट भाषण में सीतारमण ने भी 'बुनियादी ढांचे के लिए मजबूत वित्तीय समर्थन बरकरार रखने’ का संकल्प जताया. बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करने के मकसद से केंद्र ने लंबी अवधि के ब्याज मुक्त ऋण के मद में 1.5 लाख करोड़ रु. का प्रावधान किया है. इसके अलावा बुनियादी ढांचे में निजी निवेश को समर्थनकारी नीतियों और वायबिलिटी गैप फंडिंग (कमी होने पर धन उपलब्ध कराना) के जरिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
उम्मीद के मुताबिक रेलवे और राजमार्ग को बुनियादी ढांचे पर होने वाले पूंजीगत खर्च का बड़ा हिस्सा—करीब 50 फीसद मिलता रहेगा. रेलवे को नए ढांचा निर्माण के लिए 2.65 लाख करोड़ रु. का आवंटन किया गया है जो पिछले साल के 2.40 लाख करोड़ रु. के मुकाबले 10.4 फीसद ज्यादा है. उसे उम्मीद है कि बाहरी संसाधनों से 13,000 करोड़ रु. और उसके अपने राजस्व से 3,000 करोड़ रु. की राशि और मिल जाएगी. पिछले एक साल में हुई कई दुर्घटनाओं की वजह से चर्चा में रहे रेलवे पर सुरक्षा उपाय बढ़ाने के लिए भारी दबाव है और बजट में इसे प्राथमिकताओं में से एक बताया गया है.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव कहते हैं, "रेलवे में सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों के लिए अच्छे-खासे धन का प्रावधान किया गया है. सरकार के तीसरे कार्यकाल में रेलवे को लगातार प्रोत्साहन मिला है." आवंटन में आधुनिक सिग्नल प्रणाली शुरू करने और ज्यादा रेल लाइनों के विद्युतीकरण पर जोर दिया गया है.
बजट आंकड़ों से रेलवे की वित्तीय चुनौतियों के बारे में भी पता चलता है. उसका पेंशन खर्च बढ़ते हुए 65,000 करोड़ रु. पर पहुंच गया है. रेलवे बोर्ड की सेवानिवृत्ति अतिरिक्त सदस्य (वित्त) दक्षिता दास कहती हैं, "भारतीय रेलवे के आकार को देखते हुए यह अपरिहार्य है."
दास का तर्क है कि सिर्फ राजस्व बढ़ाना ही एक तरीका है. रेलवे को रेलगाड़ियां चलाने और अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों से 2.57 लाख करोड़ रु. की कमाई हुई. लेकिन इसमें से करीब 24 फीसद पेंशन में चले जाते हैं. इसका परिचालन अनुपात (हर 100 रु. की कमाई पर हुआ खर्च, जो जितना कम हो उतना अच्छा) 98.65 फीसद जैसी हद पर रहा है. यह 2022-24 के 98.1 फीसद से भी थोड़ा ज्यादा है. इस वित्त वर्ष के लिए उसने 98.22 फीसद के आशावादी आंकड़े का अनुमान लगाया है.
अपना राजस्व बढ़ाने के लिए रेलवे नई संपत्तियां बनाएगा और पुरानी को नवीनीकृत करेगा. उसने तीन आर्थिक गलियारों—ऊर्जा, खनिज और सीमेंट गलियारा (192 परियोजनाएं), बंदरगाह संपर्क गलियारा (42 परियोजनाएं) और उच्च यातायात सघनता गलियारा (200 परियोजनाओं)—की पीएम गति शक्ति मिशन के तहत पहचान की है, जहां मल्टी मॉडल संपर्क तैयार किया जाएगा. क्षमता वृद्धि, बेहद व्यस्त नेटवर्क पर भीड़ कम करना, लॉजिस्टिक लागत घटाना भी अहम लक्ष्य हैं.
राजमार्ग क्षेत्र को 2.78 लाख करोड़ रु. का आवंटन मिला है जो पिछले साल के संशोधित अनुमानों से 2,000 करोड़ रुपए कम है. केंद्रीय सड़क और बुनियादी ढांचा कोष से 6,000 करोड़ रु. आएंगे. इस कोष में पेट्रोल और डीजल उपभोक्ताओं से वसूला गया उपकर आता है. 2024-25 में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 10,422 किमी लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की योजना बनाई है जिनमें दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी महत्वपूर्ण परियोजना भी शामिल है.
2023-24 के दौरान 12,349 किमी के राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया. एनएचएआइ पर अभी 3.4 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है और उसने आगे उधारी रोक दी है. लिहाजा, राजमार्गों के लिए मुख्य फंडिंग का तरीका सीधे बजट आवंटन ही है. इसके अलावा, बंदरगाह इन्फ्रास्ट्रक्चर और सागरमाला तथा अंतर्देशीय जलमार्ग पहलकदमियों के समर्थन के लिए 2,377.49 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं.
ग्रामीण संपर्क और बाढ़ प्रबंधन में निवेश के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाइ) के तहत 25,000 ग्रामीण बस्तियों को सभी मौसम के अनुकूल संपर्क मुहैया कराया जाएगा. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तीन करोड़ अतिरिक्त घरों के निर्माण के लिए भी धन आवंटित किया गया है. एक्सिस बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्र कहते हैं, "केंद्र सरकार बुनियादी ढांचे पर कितना खर्च कर सकती है, इसकी एक सीमा है. सरकार ने संकेत दिया है कि जीडीपी का करीब 3.4 फीसद आगे बढ़ने के लिहाज से अच्छा आंकड़ा है. बुनियादी ढांचे का सृजन अब शहरों की जरूरत है, सिर्फ दिल्ली, मुंबई, बेंगलूरू की नहीं."
अतिरिक्त धनराशि का उद्देश्य रणनीतिक केंद्रों में औद्योगिक क्लस्टर विकसित करना है: ये क्षेत्र हैं कोप्पार्थी (विशाखापत्तनम-चेन्नै) ओर्वाकल (हैदराबाद-बेंगलूरू) और गया (अमृतसर-कोलकाता) गलियारा. इन पहल का मकसद पूर्वी भारत में औद्योगिक वृद्धि को रफ्तार देना है. बजट बताता है कि 30 लाख से ज्यादा आबादी वाले 14 बड़े शहरों में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट प्लान बनाए जाएंगे.
इनका मकसद ऐसी शहरी नियोजन रणनीति बनाना है जो अधिक आबादी, मिश्रित-उपयोग विकास को बढ़ावा दे. इन्फ्राविजन फाउंडेशन के सीईओ और शहरी नीति विशेषज्ञ जगन शाह कहते हैं, "यह स्वागत योग्य कदम है. शहरी मामलों के मंत्रालय ने पिछले साल विस्तृत सलाह जारी की थी. हालांकि इस पर वास्तविक काम धीमा रहा है."
सीतारमण ने इस सब को जारी रखने के लिए अपने बटुए की डोरी खोल दी है. केंद्रीय बजट ऐसा कोई संकेत नहीं देता कि नए इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने पर भारत का जोरदार खर्च स्लो कॉरिडोर में चल रहा है.
—अभिषेक जी. दस्तीदार