इंडिया टुडे-एमडीआरए सर्वे 2024 : आर्ट्स ही नहीं, साइंस में भी सिरमौर है हिंदू कॉलेज
बेहतरीन शिक्षक, मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च में इनोवेशन ये कुछ ऐसे आधार हैं जिनके दम पर इंडिया टुडे-एमडीआरए सर्वे, 2024 में आर्ट्स के साथ-साथ देश में विज्ञान की शिक्षा में हिंदू कॉलेज है सबसे आगे

भविष्य को गढ़ना. हिंदू कॉलेज 125 साल से इस आदर्श-वाक्य पर खरा उतरा है, जहां शीर्ष पायदान के अंडरग्रेजुएट कॉलेज के तौर पर उसकी प्रतिष्ठा पढ़ाई-लिखाई, शोध, पाठ्येतर गतिविधियों और प्लेसमेंट के मामले में जाहिर है.
कड़ी मेहनत और उत्कृष्टता के प्रति यह प्रतिबद्धता उसकी विज्ञान स्ट्रीम के लिए भी सच है, जो हर साल आवेदकों की बड़ी तादाद को आकर्षित करता है.
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के शुरुआती दौर में स्थापित इस कॉलेज का न केवल सम्मानजनक इतिहास है, बल्कि यहां श्रेष्ठ शिक्षक समुदाय, आधुनिक बुनियादी ढांचा और विविध अंतरविषयात्मक शोध भी है.
हिंदू कॉलेज में ज्ञान के प्रसार पर ही नहीं बल्कि आलोचनात्मक सोच और समस्याओं के समाधान का हुनर विकसित करने पर भी जोर दिया जाता है. यहां छात्रों को व्यावाहारिक शिक्षा, कार्यशालाओं और सेमिनार के माध्यम से प्रतिस्पर्धी धार और बढ़त मिलती है, जिसके बूते वे कल की चुनौतियों से बेहतर ढंग से निबट पाते हैं.
साइंस में भारत के 10 सबसे बेस्ट कॉलेज
हिंदू कॉलेज दूसरों से अलग कैसे है
> 3.6/4 का एनएएसी सीजीपीए स्कोर
> छात्रों को दिया गया औसत वार्षिक वेतन 9.21 लाख रुपए प्रति वर्ष है, जो साइंस कॉलेजों में दूसरा सबसे ज्यादा है
> बीते दो साल में फैकल्टी की तरफ से प्रकाशित किताबों की संख्या के मामले में पहले पायदान पर
> बीते दो साल में फैकल्टी की तरफ से प्रकाशित शोध के मामले में यह पहले पायदान पर
> नियमित कोर्स के अलावा यह फ्रैगरेंस ऐंड फ्लेवर्स और वैदिक मैथमैटिक्स सरीखे अतिरिक्त सर्टिफिकेट कोर्स की पेशकश करता है
क्या आप जानते हैं?
हिंदू कॉलेज ने विज्ञान से लेकर ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य तक, और पर्यावरण और टिकाऊपन से जुड़े विशेष प्रोजेक्ट शुरू किए हैं
विज्ञान का पाठ्यक्रम चुनने से पहले क्या देखें
> खालिस विज्ञान की डिग्री ही अपने आप में रोजगार की गारंटी नहीं है. इसलिए हिंदू कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. अंजू श्रीवास्तव का कहना है, आपके दिमाग में साफ होना चाहिए कि यह डिग्री हासिल करना आप क्यों चाहते हैं, खासकर करियर की राह आपके दिमाग में होनी चाहिए.
> नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में साइंस और टेक्नोलॉजी की डीन और एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसेज की डायरेक्टर सुनीता रतन की सलाह है कि कोर्स चुनने से पहले रुचियों, एप्टिट्यूड और अकादमिक क्षमताओं का मूल्यांकन करें.
> उनका कहना है कि ऐसे कोर्स की तलाश करें जो व्यावहारिक अनुभव, इंटर्नशिप या शोध के अवसर प्रदान करते हों.
> रतन का कहना है कि चुने गए क्षेत्र में करियर के अवसरों और रोजगार के रुझानों को समझें. प्रयोगशालाओं, शोध सुविधाओं और उद्योग के अनुभव की उपलब्धता पर विचार करें.
पांच इनोवेटिव जॉब जो विज्ञान की डिग्री लेकर चुने जा सकते हैं
> डेटा साइंटिस्ट: ऐसे समय जब डेटा-आधारित निर्णय लेने पर जोर बढ़ रहा है, विज्ञान ग्रेजुएट स्वास्थ्य सेवा, वित्त और ई-कॉमर्स सरीखे क्षेत्रों के साथ-साथ टेक्नोलॉजी कंपनियों में मौके हासिल कर सकते हैं.
> बायोटेक्नोलॉजिस्ट: ग्रेजुएट जेनेटिक इंजीनियरिंग, फार्मास्युटिकल रिसर्च, एन्वायरनमेंटल बायोटेक्नोलॉजी और एग्रीकल्चर बायोटेक्नोलॉजी सरीखे क्षेत्रों में करियर की तलाश कर सकते हैं.
> नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञ: भौतिक शास्त्र, रसायन और पर्यावरण विज्ञान में ग्रेजुएट सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जैव ईंधन और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों सरीखे क्षेत्रों में योगदान दे सकते हैं.
> नैनोटेक्नोलॉजिस्ट: नैनोटेक्नोलॉजी उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसका प्रयोग चिकित्सा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मटीरियल साइंस और पर्यावरण सुधार सरीखे क्षेत्रों में होता है. भौतिक शास्त्र, रसायन या मटीरियल साइंस की पृष्ठभूमि वाले युवाओं को इस क्षेत्र में रोमांचक अवसर मिल सकते हैं.
> फूड साइंटिस्ट/टेक्नोलॉजिस्ट: खाद्य सुरक्षा, पोषण और टिकाऊ खाद्य उत्पादन पर बढ़ते जोर के साथ खाद्य उत्पाद विकास, गुणवत्ता नियंत्रण और खाद्य प्रसंस्करण में भूमिकाएं उपलब्ध हैं.
नए जमाने के कोर्स
> बायोइन्फॉर्मेटिक्स और कंप्यूटेशनल बायोलॉजी: इसमें बायोलॉजिकल डेटा को समझने के लिए कंप्यूटेशनल तकनीकों का प्रयोग शामिल है. रतन कहती हैं, ''इन प्रोग्रामों में जीनोमिक्स, प्रोटिओमिक्स, मॉलीक्यूलर मॉडलिंग और बायोस्टेटिक्स सरीखे विषय शामिल हैं.''
> एन्वायरनमेंटल साइंस और सस्टेनेबिलिटी: ये कोर्स पर्यावरण के मुद्दों और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज के वैज्ञानिक, तकनीकी और नीतिगत पहलुओं को संबोधित करते हैं
> फूड साइंस और टेक्नोलॉजी: खाद्य उत्पादन की प्रक्रियाओं और ज्यादा स्वस्थ उत्पाद बनाने के तरीकों आदि पर विचार करता है
> मरीन बायोलॉजी या समुद्री जीवविज्ञान: इसमें समुद्री जीवन और समुद्र के सूक्ष्मजीवों, वासस्थानों की स्थिति और मानव गतिविधियों पर समुद्री जानवरों के प्रभावों का अध्ययन शामिल है
> प्लांट साइंस या पादप विज्ञान: इसमें पौध वृद्धि और उनके काम करने के तरीकों, उनके विकास को प्रभावित करने वाली चीजों, और मिट्टी तथा पौधों के रिश्तों का अध्ययन करना होता है
गुरु वाणी
''हमें कई चीजें दूसरों से अलग खड़ा करती हैं. मसलन, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, नवीनतम उपकरण, उच्च योग्यता वाली फैकल्टी, इनोवेशन की क्षमता, शोध और नवाचार सिखाना; साथ ही संस्थान की 125 साल की विरासत में संभालकर रखे गए मानवतावादी मूल्यों को पुष्पित-पल्लवित करना''
प्रो. अंजू श्रीवास्तव, प्रिंसिपल, हिंदू कॉलेज
पूर्व छात्र की राय
''हिंदू कॉलेज आपको ऐसे खूब मौके देता है जिनमें आप बड़ा सोचने, आइडिया खोजने और अपने सोचने की प्रक्रिया को बाहरी दुनिया तक ले जाने के लिए खुद को चुनौती दे सकें''
नितिन बस्सी, सीनियर प्रोग्राम लीड, सस्टेनेबल वाटर, काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरनमेंट ऐंड वाटर बीएससी (ऑनर्स), बॉटनी, 2002 का बैच
स्टोरी - शैली आनंद
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