रक्षा क्षेत्र की चुनौतियों से कैसे निपटेंगे राजनाथ सिंह?
मोदी 3.0 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा पर तनावपूर्ण हालात से कैसे निपटते हैं, इसपर सबकी नजर रहेगी

रक्षा क्षेत्र में सरकार के सामने जिस तरह की चुनौतियां बनी हुई हैं, उसे ध्यान में रखते हुए बेहद सावधानी के साथ रणनीतिक योजनाएं बनाने और फिर उन पर निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है.
भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में कुछ मुद्दे शामिल थे. उसमें हिंद महासागर क्षेत्र में अपने सुरक्षा हितों की रक्षा के उद्देश्य से रणनीतिक स्थलों पर भारत के डिफेंस फुटप्रिंट बढ़ाने और मित्र देशों के साथ साझेदारी करने का वादा किया गया था. रक्षा उत्पादन को लेकर पार्टी ने स्टार्टअप को बदस्तूर समर्थन जारी रखने का वादा किया है ताकि स्वदेशीकरण में तेजी आए. वहीं, मेड इन इंडिया रक्षा उपकरणों का निर्यात बढ़ाने पर भी जोर है.
वित्त वर्ष 2023-24 में डिफेंस सेक्टर का निर्यात 21,083 करोड़ रुपए (लगभग 2.63 बिलियन डॉलर) के रिकॉर्ड ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था. सरकार ने अब 2025 तक 35,000 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा है. चीन के साथ कायम गतिरोध के मद्देनजर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर निरंतर कड़ी निगरानी के साथ उग्रवाद और आतंकवाद जैसे आंतरिक सुरक्षा खतरों से निबटने के पुख्ता इंतजाम करने होंगे. जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न सैन्य/सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर खुद को इसके अनुकूल ढालना भी एजेंडे में है.
रक्षा रणनीतिकार पश्चिम और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ सैन्य प्रशिक्षण और अभ्यास की संख्या बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हैं. डिफेंस प्लेटफॉर्म हासिल करने में सशस्त्र बलों की भी बड़ी भूमिका तय की जानी चाहिए. भविष्य के युद्धक्षेत्रों की परिकल्पना क्षमताएं बढ़ाने की योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. अधिग्रहण और स्वदेशीकरण भी सीधे तौर पर इसी पर निर्भर करेगा.
किसके सर है जिम्मेदारी?
राजनाथ सिंह, 72 वर्षः भाजपा
रक्षा मंत्री
शाखा से मंत्रालय तक
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में 1951 में जन्मे राजनाथ सिंह ने गांव के स्कूल के बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय से तालीम पाई. आरएसएस से वे 1964 में जुड़े और 1974 में जनसंघ का सदस्य बनकर राजनीति में कदम रखा. पार्टी में तेजी से आगे बढ़ते हुए वे राज्य के शिक्षा मंत्री (1991-92) और फिर मुख्यमंत्री (2000-’ 02) बनें. बाद में वे क्रमश: केंद्रीय कृषि, यातायात और गृह मंत्री भी बने. 2019 में उन्होंने रक्षा मंत्री का कार्यभाल संभाला.
सुधार और रक्षा खरीद
राफेल लड़ाकू विमान और एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली समेत कई महत्वपूर्ण रक्षा खरीद सौदे राजनाथ सिंह की निगरानी में हुए. उनके कार्यकाल में कई रणनीतिक सुधार भी हैं, जैसे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) पद का सृजन.
मेक इन इंडिया पहल
उनकी निगरानी में मंत्रालय ने उन्नत उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को प्राथमिकता दी. इनमें हल्के लड़ाकू विमान तेजस से लेकर धनुष हॉवित्जर और पिनाक रॉकेट लॉन्चर तक शामिल थे.
हरफनमौला नेता
अभी भी सक्रिय भाजपा के कुछ पुराने दिग्गज नेताओं में शुमार. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सिंह के सभी दलों के नेताओं के साथ अच्छे संबंध रहे हैं. गठबंधन सरकार में उनका यह बहुविध अनुभव खासा कारगर साबित होने जा रहा है.
राज्यमंत्री
संजय सेठ, 64 वर्षः भाजपा
रांची से दिल्ली तक लंबा रास्ता
सेठ रांची से दूसरी बार भाजपा सांसद बने हैं. 2019 में उन्होंने कांग्रेस के सुबोध कांत सहाय को हराया था. बतौर छात्र नेता 1992 में राम रथ यात्रा के दौरान लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद 25 दिन जेल में बिताए.