कौन-कौन है भाजपा की 'हिट लिस्ट' में?
भाजपा की हिट लिस्ट में सबसे ऊपर वे सीटें है, जो सोनिया गांधी (रायबरेली), सपा की डिंपल यादव (मैनपुरी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले (बारामती) जैसे शीर्ष विपक्षी नेताओं के खाते में हैं

भाजपा जल्द उन 160 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर सकती है जहां 2019 में हार/जीत का अंतर बहुत मामूली था. पार्टी एक लोकसभा प्रवास योजना भी आयोजित कर रही है, जिसके तहत केंद्रीय मंत्रियों और अनुभवी नेताओं को कुछ समय लोकसभा क्षेत्र में रुककर पार्टी की संभावनाएं बेहतर करने का जिम्मा सौंपा गया है. मिशन की जिम्मेदारी संभालेंगे पार्टी महासचिव सुनील बंसल, विनोद तावड़े और तरुण चुघ. इन 160 सीटों में से ज्यादातर देश के पूर्वी और दक्षिण क्षेत्र की हैं. लेकिन, पार्टी की असली चिंता यूपी, बिहार और महाराष्ट्र की करीब 50 सीटों को लेकर है और भाजपा की हिट लिस्ट में सबसे ऊपर वे सीटें हैं, जो सोनिया गांधी (रायबरेली), सपा की डिंपल यादव (मैनपुरी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले (बारामती) जैसे शीर्ष विपक्षी नेताओं के खाते में हैं.
राहुल पर भरोसा
कांग्रेस को इंडिया के सहयोगियों के साथ सीट-बंटवारे पर बातचीत से ज्यादा फिक्र उन लोकसभा सीटों पर जमीन हासिल करने की है, जिनमें 2024 में उसकी भाजपा से सीधे टक्कर होगी. इनमें अधिकांश राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हैं (इन कुल 128 सीटों से कांग्रेस ने 2019 में सिर्फ चार जीती थीं). भारत जोड़ो यात्रा से राहुल गांधी की लोकप्रियता बढ़ी जिससे पार्टी को 50 सीटें वापस लेने की उम्मीद है. अब, ऐसे में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की ओर से राहुल को पार्टी का पीएम उम्मीदवार घोषित करने में गलत क्या है.
अदाणी पर निशाना
गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल बिजली बोर्ड गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के एक पत्र का हवाला देकर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार ने इंडोनेशिया से महंगा कोयला आयात करने के एवज में अदाणी पावर मुंद्रा लिमिटेड को 3,802 करोड़ रु. का अतिरिक्त भुगतान किया, वह भी आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बिना ही. राज्य सरकार ने कहा कि यह 'अंतरिम' भुगतान था और गोहिल बेवजह भ्रम फैला रहे हैं.
बिहार से बाहर कन्हैया
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में वामपंथ की छात्र राजनीति से कांग्रेस की सियासत में आए कन्हैया कुमार के बारे में चर्चा है कि वे 2024 में दिल्ली की किसी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं. 2019 में वे अपने गृह राज्य बिहार की बेगूसराय लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे. कयास हैं कि कांग्रेस उन्हें बिहार में चुनाव नहीं लड़ाना चाहती. इसकी वजहों में एक यह भी है कि तेजस्वी यादव नहीं चाहते कि बिहार की राजनीति में कन्हैया की सक्रियता बढ़े. दिल्ली से कन्हैया को लड़ाने के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि उनकी राजनैतिक कर्मभूमि जेएनयू है. उन्हें उत्तर पूर्वी दिल्ली से लड़ाया जा सकता है जहां से अभी भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी सांसद हैं.
दिखावटी सद्भावना
तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के बीच टकराव जगजाहिर है, लेकिन हाल में उनके रिश्तों में थोड़ी नरमी आती दिखी, जब राव ने 25 अगस्त को नए राज्य सचिवालय में एक मंदिर, मस्जिद और चर्च (10 करोड़ रु. के सार्वजनिक खर्च से निर्मित) के उद्घाटन के लिए राज्यपाल को आमंत्रित किया. लेकिन एक दिन बाद राज्यपाल के सुर फिर बदल गए. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 167 के तहत किसी भी मुद्दे को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री को उनके पास आना चाहिए. और वे अपने पद की आलोचना बर्दाश्त नहीं करेंगी. यानी दिखावटी सद्भावना एक ही दिन में काफूर हो चुकी थी.
- कौशिक डेका, साथ में जुमाना शाह, हिमांशु शेखर और अमरनाथ के. मेनन