स्मार्ट मनी : अपना पैसा कहां लगाएं
आजकल शेयर बाजार में बहुत तेजी है और कई विशेषज्ञ इशारा कर रहे हैं कि यह तेजी लंबे वक्त तक जारी रहेगी. अपने निवेश पर ज्यादा कमाने के लिए इस चरण में आगे बढ़ना सीखें

नारायण कृष्णमूर्ति
प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक, एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी-50, बार-बार नई ऊंचाई छू रहे हैं. जाहिर है आजकल सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है: क्या यह निवेश करने का माकूल मौका है, खासकर जब बाजार तेजी पर हो? पिछले 44 वर्ष में, जबसे सेंसेक्स डेटा आसानी से उपलब्ध है, यह बिल्कुल साफ है कि जो निवेशक इस दौड़ में शामिल रहेंगे, वे पैसा कमा सकते हैं. जिन निवेशकों ने 1979 में निवेश किया था, जब सूचकांक 100 पर था, आज उनके पैसे का मूल्य 6,500 गुना से भी ज्यादा हो गया है. कोई आशावादी व्यक्ति बाजार में किसी तरह पैसा गंवा नहीं सकता बशर्ते वह अपने निवेश अनिश्चितकाल के लिए बनाए रखे.
तेजड़िया या बुल मार्केट को उस समय की अवधि के रूप में परिभाषित किया जाता है जब प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक आम तौर पर बढ़ रहे होते हैं और अंतत: नई ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं. लेकिन बुल मार्केट की कई दूसरी परिभाषाएं हैं और विशेषज्ञ बाजार की बदलती स्थितियों के आधार पर बुल रन की अपनी परिभाषा बदलते रहते हैं. तो, एक वर्ग का मानना है कि जब बाजार सूचकांक निचले स्तर से 20 फीसद की बढ़त हासिल कर ले तो यह बुल रन है. कुछ लोग इसे एक ऐसे चरण के रूप में वर्णित करते हैं कि जब शेयर बाजार के सभी क्षेत्रों (सेक्टरों और बाजार पूंजीकरण) में लाभ होता है. ये सभी परिभाषाएं अभी बिल्कुल स्पष्ट नहीं हो सकतीं क्योंकि प्रभावी रूप से, तेजी का दौर खत्म होने के बाद ही डेटा के आधार पर उसे बयान किया जा सकता है.
बेहद बुनियादी स्तर पर देखें तो निवेश आपकी जोखिम सहनशीलता और समय सीमा के आधार पर आपके पैसे को बढ़ाने का एक तरीका है. अगर आप इस खेल में दिलचस्पी रखने वाले विशेषज्ञों की बात ध्यान से सुनें, तो उनमें से ज्यादातर घोर आशावादी हैं और ज्यादातर का मानना है कि स्टॉक, बॉन्ड या कमोडिटी में निवेश से आपको लाभ हो सकता है. विभिन्न परिसंपत्ति (ऐसेट) वर्गों पर नजर रखने में अपनी विशेषज्ञता की बदौलत वे खास तरह की चेतावनियों के साथ ऐसे विचार रखते हैं, जो तब तक ठीक है जब तक आप उन्हें जानने के लिए एक बिंदु बनाते हैं. उसके बाद आप यह पता लगाते हैं कि कौन सा परिसंपत्ति वर्ग या निवेश आपके लिए कारगर रहेगा.
दुर्भाग्य से, निवेशक शेयर बाजारों को दो पहलू वाले—तेजी या मंदी चरण के रूप में देखते हैं. उन्हें लगता है कि बाजार नीचे जाएगा या ऊपर जाएगा, जबकि हकीकत यह है कि वे लगातार ऊपर-नीचे जाते रहते हैं और जब यह नीचे होता है तो वक्त के साथ अंतत: कई चरणों के साथ ऊपर जाता है. शेयर बाजार सूचकांक को अपने दिल की धड़कन की तरह समझें, यह आपकी शारीरिक गतिविधि के स्तर के आधार पर कम-ज्यादा होता रहता है. आप किसी भी डेटा का विश्लेषण कर लें, आप पाएंगे कि पिछले तीन साल के चरण में बाजार में तेजी रही है. मिसाल के तौर पर, इस साल अब तक प्रमुख बाजार संकेतक, एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स में 10 फीसद की बढ़ोतरी हुई है. पिछले एक साल में 15 अगस्त, 2023 को इसी सूचकांक में 17.6 फीसद की वृद्धि हुई.
अगर थोड़ा और पीछे जाएं, तो 25 मार्च, 2020 के लॉकडाउन के बाद से सेंसेक्स में 129 फीसद और 1 जनवरी, 2021 के बाद से 36 फीसद की वृद्धि हुई है. यह जानकारी खासकर इक्विटी में निवेश करने और निवेशित रहने के लाभ पर जोर देती है. खास शेयरों की कहानी अलग है क्योंकि ऐसे कई स्टॉक हैं जिन्होंने पिछले एक दशक में सूचकांक के अंदर और बाहर अपनी जगह बनाई है.
जो निवेशक निवेश से पहले बाजार में सुधार का इंतजार कर रहे हैं. मान लीजिए 2021 में या 2022 की पहली छमाही में वे ऐसा कर रहे थे तो वे निवेश के लिए माकूल मौके के इंतजार की वजह से हुए नुक्सान से मायूस हो सकते हैं. हमने इसे पहले भी कहा है और इसे फिर से दोहरा रहे हैं कि निवेश का सरोकार बाजार में निवेशित रहने में बिताए गए समय से है, न कि इससे कि कब निवेश करना है.
> बाजार हमेशा रिकवर करता है
निवेशकों के लिए बढ़ते बाजार के दौरान निवेश के बारे में चिंता करना यह सोचना समझ में आता है कि क्या स्टॉक गिर सकते हैं. निवेश शुरू करने के लिए बाजार में सुधार का इंतजार करने से आप मौका गंवा सकते हैं. यही वजह है कि आपको निवेश करने के लिए माकूल मौके का इंतजार नहीं करना चाहिए या निवेश शुरू करने के लिए बाजार के निचले स्तर तक पहुंचने की फिराक में नहीं रहना चाहिए. आखिर, यह तो केवल पिछले आंकड़ों के आधार पर ही पता चलता है कि निवेश के लिए सबसे आदर्श तारीख कब थी क्योंकि तभी बाजार अपने सबसे निचले स्तर पर था. ऐसे में अगर आप बाजार में सुधार का इंतजार करते रहेंगे तो आप हाथ पर हाथ धरे रह जाएंगे.
यह जान लें कि शेयर बाजार में निवेश स्पष्ट शुरुआत या समाप्ति रेखा वाली दौड़ की तरह नहीं है; यह छुट्टियों की योजना बनाने जैसा है जिसमें आप यह तय करते हैं कि कब जाना है और कब लौटना है. यही वजह है कि आपको बाजार में बेहद तेजी के दौर में भी निवेश करना चाहिए, क्योंकि बाजार और ऊपर ही जाएगा (देखें: चक्रों में चलते हैं बाजार). ऐसे चरण होंगे जब गिरावट आएगी, लेकिन वक्त के साथ बाजार की सामान्य चाल काफी हद तक ऊपर की ओर होती है. यही वजह है कि निवेश के लिए सब्र की जरूरत होती है—तेजी के दौर में आंख मूंदकर निवेश करने के लिए उत्साहित और मंदी के दौर में निवेश से बाहर निकल जाने के लिए उतावला नहीं होना चाहिए.
> बाजार में तेजी की अंदरूनी कहानी
आम निवेशक समय-समय पर बाजार में तेजी या तेजी की संभावनाएं बढ़ने या तेजी की समाप्ति की घोषणा के बारे में तरह-तरह की बातें सुनते रहते हैं. इतिहास और डेटा बताते हैं कि काफी लंबे समय में शेयर बाजार सूचकांक हमेशा बढ़ते हैं. मिसाल के तौर पर एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स, जिसके आंकड़े 1979 से उपलब्ध हैं, 100 के आधार से वर्तमान 65,000 तक एक लंबा सफर तय कर चुका है. पिछले 44 साल में यह वृद्धि 6,500 गुना है, और अगर कोई केवल शुरू और अंत बिंदु के साथ ग्राफ बनाता है तो बुल रन या तेजी साफ दिखेगी. अलबत्ता, करीब से देखने पर, ऐसे सप्ताह, महीने और कभी-कभी वर्ष भी होते हैं जब सूचकांक गिर गए हैं या सुस्त बने हुए हैं.
शेयर बाजार कम समय में कई कारकों से संचालित होते हैं—कमाई की उम्मीदें और क्या यह वास्तविक कमाई, नीति दरों, आर्थिक स्थितियों, सरकारी नीतियों, समाचार और घटनाओं और कई अन्य कारकों से मेल खाती है. मिसाल के तौर पर, भारत में कोविड महामारी के कुछ महीनों के भीतर, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विकास दोनों को भांपते हुए बाजार लुढ़क रहे थे. लॉकडाउन और आर्थिक मंदी का मुकाबला करने के लिए, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में कटौती करके बाजारों में लिक्विडिटी लाना शुरू कर दिया और कुछ ने तो अधिक नकदी छापना भी शुरू कर दिया.
भारत सहित कई देशों की सरकारों ने बाजार को रफ्तार देने के लिए सब्सिडी और मुफ्त सुविधाएं दीं. फरवरी और सितंबर 2020 के दौरान जिस तरह से सेंसेक्स ने गिरावट के बाद वापसी की, उससे यह स्पष्ट था. इसके फौरी नतीजे शेयर बाजारों में तेजी के संकेत थे. लेकिन 2021 में महंगाई ने खेल बिगाड़ना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ा दीं. निवेशकों को यह समझने की जरूरत है कि बहुत लंबी अवधि में, मान लें कि 10 से 30 साल या उससे ज्यादा की अवधि में, शेयर बाजार में तेजी रही है. कभी-कभी तेजी का दौर बहुत तेज होता है और कभी-कभी वह उतना तेज नहीं होता जितनी कोई उससे उम्मीद करता है. लिहाजा, जब कोई तेजी के दौर के बारे में सुनता है, तो उसे एक निश्चित समय-सीमा के साथ जोड़ना पड़ता है—एक साल, पांच साल, 10 साल या उससे भी ज्यादा वक्त की तेजी.
बाजार अभी 65,000 से ऊपर है. फिलहाल भारतीय इक्विटी बाजारों में बहुत ज्यादा बुलबुले बन रहे हैं. ऐसे में गिरावट आ सकती है, जो सट्टेबाजों का उत्साह घटाने में कारगर होगी. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा तेजी में लंबे अरसे तक विस्तार करने की क्षमता नहीं है. कम समय में छोटे सुधारों के बारे में ऐसे सोचें कि सड़कों पर वाहन की गति को कम करने के लिए स्पीड ब्रेकर लगाए गए हैं. ऐसे कई तीव्र सुधार हुए हैं जैसे कि 2020 में हुआ था जब कोरोना महामारी के दौरान तीन महीने की छोटी अवधि में सेंसेक्स 34 फीसद लुढ़क गया था.
आम तौर पर तेजी के दौर निराशावाद से पैदा होते हैं. प्रसिद्ध वॉल स्ट्रीट फंड मैनेजर जॉन टेम्पलटन ने 1939 में कहा था, ''बुल रन संदेह पर बढ़ते हैं, आशावाद पर परिपक्व होते हैं और उत्साह में मर जाते हैं.'' अगर आप पिछले दो दशकों पर नजर डालें तो दो मिसालें सामने आती हैं—2008 का आर्थिक संकट और 2020 की महामारी. आदर्श रूप से, दोनों समय, सही प्रतिक्रिया यह थी कि अंतर्निहित तेजी से लाभ उठाने के लिए आंख बंद करके स्टॉक खरीदें. शेयर बाजारों पर बारीकी से नजर डालने से पता चलता है कि बाजार की मौजूदा तेजी पर सिर्फ बाजार के किसी एक सेगमेंट का दबदबा नहीं है.
लिहाजा, यह किसी एक विशेष क्षेत्र या कंपनी के आकार के बूते नहीं चल रहा है. परंपरागत रूप से तेजी की पहचान लार्ज-कैप सेगमेंट में तेज बढ़त के बाद मिड-कैप और स्मॉल-कैप में तेजी आती है. अलबत्ता, इस बार स्मॉल-कैप और मिड-कैप में भी लार्ज-कैप और सभी क्षेत्रों जितनी मजबूत बढ़त है. दरअसल, अगर लार्ज-कैप को दूसरों जितनी बढ़त मिलती है, तो बाजार के संकेतकों की बहुत ऊंची स्थिति दिखाई देती है.
ऐसी घटनाओं से यह सबक मिलता है कि गिरावट के बावजूद निवेश में बने रहें या ऐसी गिरावट को निवेश के अवसर के रूप में उपयोग करें. अंतत: बाजार में निचले स्तर से जो उछाल देखा गया वह भी उतना ही तेज था क्योंकि निवेशकों को रिवाइवल की भनक लग गई और वे फायदा उठाने के लिए दौड़ पड़े. शॉर्ट बुल रन या कम अवधि की तेजी को अक्सर उन घटनाओं के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जो उत्साह से प्रेरित होती हैं. लेकिन सफल दीर्घकालिक निवेश का सरोकार समय-समय पर समायोजन करके और दीर्घकालिक निवेश के गुणों से लाभ उठाने के लिए हमारे आस-पास की बदलती परिस्थितियों को अनुकूलित करके लीक पर बने रहने से है.
> तेजी या मंदी से कोई फर्क नहीं पड़ता
अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाला है और अर्थव्यवस्था में ग्रोथ विकास और आशावाद का मूड है. हालांकि महंगाई चिंता का विषय है, लेकिन आरबीआइ इसे नियंत्रित करने के लिए लगातार काम कर रहा है और उसने ब्याज दरों में बदलाव पर काफी हद तक रोक लगा दी है. लिहाजा, लंबी अवधि के निवेशकों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि क्या यह वास्तव में तेजी का बाजार है. लेकिन निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है कि वे विशेषज्ञों के बहकावे में न आएं और शेयर बाजारों के सुनहरे दौर पर उनके विचारों से प्रभावित न हों. आखिर, जब बाजार अचानक चढ़ता है, तो छोटे और नए निवेशक सबसे पहले सोचते हैं कि उनका निवेश उनके हुनर की वजह से ही बढ़ रहा है (देखें: ऐसी गलतियां जिनसे छोटे और नए निवेशकों को बचना चाहिए).
जब तक बुनियादी कारक राजस्व और लाभ वृद्धि को बढ़ावा देंगे और मूल्यांकन गुणक या वैलुएशन मल्टीपल्स मजबूत बने रहेंगे तब तक तेजी कायम रहेगी. एएमएफआइ (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल, बाजार में बहुत कुछ चल रहा है—घरेलू छोटे निवेशकों से धन का नियमित प्रवाह हो रहा है. इस साल जुलाई में एसआइपी प्रवाह 15,000 करोड़ रुपए के स्तर को पार कर गया. ज्यादा खुदरा निवेशकों की भागीदारी के साथ बाजारों में धन का यह स्थिर प्रवाह लंबे समय में धन-सृजन के लिए अच्छा संकेत है.
शेयर बाजारों में निवेश करना गंभीर काम है और निवेशकों को इसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. शेयर बाजार उन निवेशकों को पुरस्कृत करता है जो धैर्यवान हैं और जो कुछ मेहनत तथा अध्ययन के बाद निवेश करते हैं. आप अपनी ऐसी निवेश रणनीति तय करें जो आपकी जरूरतों को पूरा करती हो और यह उस स्तर पर हो जिसमें आप सहज हों. आपकी रणनीति इतनी सरल हो सकती है कि आप जिन स्टॉक को जानते हैं वही खरीदें, या ऐसे स्टॉक जो हर साल अपना लाभांश बढ़ाते हैं या ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) के माध्यम से इक्विटी सूचकांकों में निवेश करें. लेकिन सब्र का दामन न छोड़ें. जिस तरह खान-पान या कसरत की रूटीन से थोड़े वक्त में मनचाहा नतीजा नहीं मिल सकता, उसी तरह बाजार में निवेश भी लंबे अरसे के लिए होता है. आप अपना मनचाहा नतीजा तभी हासिल कर पाएंगे जब आप योजना पर कायम रहेंगे.
निवेश योजना आपके वित्तीय जीवन में चमत्कार कर सकती है. आपके पास अपने निवेश लक्ष्य के अनुरूप एक स्पष्ट निवेश बास्केट होगी, जिसे हासिल करने तक आप उसमें निवेशित बने रहेंगे. परिसंपत्ति आवंटन और विविधीकरण के साथ निवेश के बुनियादी सिद्धांतों पर टिके रहें. जल्दी पैसा कमाने के लिए अक्सर निवेश के इन दो पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है और कभी-कभी निवेशकों के लिए इन दोनों का पालन करना मुश्किल होता है. अगर आपको लगता है कि आप निवेश के बारे में कुछ नहीं सोच पा रहे हैं तो इस बारे में विशेषज्ञों से सहायता लेना अच्छा रहेगा.
याद रखें कि शेयर सूचकांक तेजी के बाजार के दौरान बढ़ते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ इसी वजह से हर कोई अमीर हो जाता है. बाजार की बढ़त से फायदा उठाने के लिए सही स्टॉक या फंड में निवेश किया जाना चाहिए और इसके लिए आपको या तो विजेताओं की पहचान करने में समय लगाना होगा या किसी सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड वाले पेशेवर मनी मैनेजर्स को अपना काम आउटसोर्स करना होगा. खासकर बाजार के घटकों के जटिल होने की वजह से अलग-अलग शेयरों और यहां तक कि पूरे क्षेत्रों पर नजर रखना मुश्किल है. इसी तरह, कमाई की संभावनाओं, मौजूदा और प्रत्याशित प्रतिस्पर्धियों और स्टॉक या फंड के प्रदर्शन पर इसके प्रभाव पर नजर रखना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं हो सकता.
एक निवेशक के रूप में यह सुनिश्चित करने के लिए वक्त के साथ हुनर और तजुर्बे की जरूरत होती है कि तेजी के बाजार में भी किसी के पोर्टफोलियो में गिरने वालों के मुकाबले चढ़ने वाले ज्यादा हों. सौभाग्य से, सफल दीर्घकालिक निवेशक या तो समय बिताते हैं या नियमित रूप से अपने निवेश पर नजर रखते हैं. निवेश करते समय निष्पक्ष लेकिन मेहनती बने रहने से फायदा होता है. ट्रिक यह है कि भावनाओं को अपने पर हावी न होने दें और लंबे समय तक निवेशित रहें और तेजी के दौर को अपने निवेश को मूल्य हासिल करने में मदद करें, भले ही आप मंदी के दौर का उपयोग उन अवसरों की तलाश में करें जो तेजी से बढ़ें.
यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप कोई शेयर बहुत सोच-समझकर कम मूल्य में खरीदें ताकि आप अगले पांच-दस साल में उससे बेहतर रिटर्न हासिल कर सकें
ऐसी गलतियां जिनसे छोटे और नए निवेशकों को बचना चाहिए
यह कहावत हर निवेशक पर लागू होती है, 'निवेश करने का सबसे अच्छा समय 10 साल पहले था, और दूसरा सबसे अच्छा समय अब है.' इसका बड़ा गहरा अर्थ है. लेकिन कई नए निवेशक अक्सर इस भावना में बह जाते हैं. वे कोशिश करते हैं किसी भी चीज और हर चीज में आक्रामक तरीके से निवेश करके देर से हुई शुरुआत की भरपाई कर लें. नए और छोटे निवेशक अक्सर ऐसी गलतियां करते हैं जिनसे वे आसानी से बच सकते थे और कुछ सामान्य गलतियां न करके आने वाले वर्षों में लाभ की संभावना बढ़ा सकते हैं.
1 लालच बुरी बला है, फंडामेंटल्स की जांच करें
तेजी का बाजार निवेश को लेकर सतर्क रहने और भरपाई की लालच से बचने का वक्त है. निवेश की सफलता के लिए बेहतर स्टॉक और म्यूचुअल फंड (एमएफ) से जुड़े रहना जरूरी है. उन शेयरों और फंडों में आंख मूंदकर निवेश करने की गलती न करें, जिन्होंने हालिया तेजी में शानदार रिटर्न दिया है. इनमें से कई स्टॉक अपने उचित मूल्य (फेयर वैल्यू) से आगे निकल गए होंगे; वे बाजार के जोश की वजह बढ़ रहे थे, न कि फंडामेंटल्स की वजह से. उन फंडों और शेयरों में निवेश करने में जोखिम है जो फंडामेंटल्स से बहुत दूर हैं. केवल इसलिए निवेश करना क्योंकि कोई विशेष स्टॉक या फंड अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, एक भावनात्मक फांस है जो लंबी अवधि में कम रिटर्न की वजह बन सकती है. इस तरह का अनुभव नए निवेशकों के लिए निराशाजनक भी हो सकता है. तब वे बाजार पर भरोसा गंवा बैठते हैं.
2 वित्तीय योजना के आधार पर निवेश करें
जिस तरह आप यात्रा टिकट केवल इसलिए बुक नहीं करते हैं क्योंकि किराए में छूट मिल रही है, ठीक उसी तरह आपको स्टॉक और फंड में तब तक निवेश नहीं करना चाहिए जब तक कि जरूरत न हो. कोई वित्तीय योजना एक लक्ष्य है; ऐसा अंतिम परिणाम जिसे आप स्टॉक और फंड में निवेश करके हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं. इसे ऐसे समझें कि आपने किसी वजह से सफर की योजना बनाई है; सफर के तरीके का चुनाव इस बात पर आधारित होगा कि आप उसका खर्च वहन कर सकते हैं या नहीं और यह कितना महत्वपूर्ण है कि आप सफर करें. लिहाजा, परिवार के साथ भारत में किसी गंतव्य पर छुट्टियां मनाने के लिए अगर किसी के पास वक्त हो तो वह ट्रेन की सवारी कर सकता है या अगर वक्त कम है तो फ्लाइट भी ले सकता है. ऐसे ही वित्तीय साधन हैं जो लघु, मध्यम और लंबी अवधि के लिए माकूल हैं और निवेशकों को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि प्रत्येक समय-सीमा के लिए क्या उपयुक्त है. मिसाल के तौर पर, अगर आपका निवेश लक्ष्य घर के लिए डाउन पेमेंट की राशि जुटाने के लिए तीन साल का है, तो इक्विटी में निवेश करने से बचना चाहिए. अलबत्ता, अगर आपका निवेश लक्ष्य आपकी सेवानिवृत्ति से 30 साल दूर है तो आपको इक्विटी में निवेश करने पर विचार करना चाहिए और अपने वित्तीय लक्ष्यों के करीब पहुंचते समय इस पर दोबारा विचार करना चाहिए.
3 निवेश प्रक्रिया बदलना
अगर आप लंबी ड्राइव पसंद करते हैं तो आपको पता होगा कि सड़कों के साथ-साथ ड्राइविंग की रफ्तार परिस्थितियों और आपके वाहन के आधार पर भिन्न होती है. किसी एसयूवी को भीड़-भाड़ वाले बाजार क्षेत्र में चलाने की तुलना उसे एक्सप्रेसवे पर चलाने से करें—ड्राइविंग का अनुभव कभी भी एक जैसा नहीं होगा. निवेश करना इससे कोई अलग बात नहीं है; एक ओर जहां आपको यह जानना चाहिए कि अपने निवेश के साथ क्या करना है, वहीं आपको विभिन्न बाजार स्थितियों के लिए अलग-अलग निवेश सिद्धांतों और रणनीतियों को भी जानना चाहिए. साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि किस इंस्ट्रूमेंट से दूर रहना है. तेजी के दौरान अनुभवी निवेशक भी अक्सर बाजार की रौ में बह जाते हैं. बाजार के बदलते हालात की वजह से अपना जोखिम प्रोफाइल बदलने की गलती न करें. बढ़ते बाजार में अपना जोखिम प्रोफाइल बदलकर, आप अपने निवेश को उन जोखिमों में डाल सकते हैं जिनके साथ आप सहज नहीं हो सकते.
4 रुझानों की रौ में बह जाना
उत्साहित शेयर बाजार कंपनियों के लिए आइपीओ (आरंभिक सार्वजनिक पेशकश) और नए फंड लॉन्च करने का भी वक्त होता है. यह गलत धारणा है कि बढ़ते बाजार में कुछ भी और सब कुछ कारगर होगा. तेजी के दौर में, आइपीओ की कीमत अधिक हो सकती है और इसके कई उदाहरण हैं (2021 में पेटीएम आइपीओ इसकी मिसाल है). संस्थागत निवेशकों के विपरीत, जिनके पास ठोस अनुसंधान और विश्लेषकों की टीमें हैं, छोटे निवेशकों के पास आइपीओ और नए फंडों में से अच्छा विकल्प चुनने के लिए सीमित संसाधन होते हैं. तेजी के दौरान बाजार में होने वाले किसी भी सुधार से पुराने-आजमाए हुए स्टॉक या फंड की तुलना में नए लॉन्च हुए फंड या आइपीओ पर असर पड़ने की संभावना ज्यादा होती है. रुझानों में निवेश करने की गलती न करें या बढ़ते बाजार में शुरुआती निवेश की सफलता से प्रभावित न हों.
5 निवेश के बजाए ट्रेडिंग
उन निवेशकों की एक और आम आदत है जो अपनी निवेश प्रक्रिया को बदलते हैं. वे निवेशक से ट्रेडर बनने की ओर बढ़ चलते हैं. तेजी के बाजार से लाभ पाने का जबरदस्त अवसर होता है, लेकिन इसके लिए आपको धैर्य रखने की जरूरत होती है. लेकिन निवेशक अक्सर इंट्रा-डे ट्रेडिंग की संभावनाओं से प्रभावित हो जाते हैं. उन्हें पता भी नहीं चलता और वे स्टॉक और फंड में निवेश करने के बजाय एफऐंडओ (फ्यूचर्स ऐंड ऑप्शंस) डेरिवेटिव्ज के ट्रेडर बन जाते हैं. मार्जिन ट्रेडिंग और अपने पोर्टफोलियो का लाभ उठाने के आधार पर अल्पावधि में अच्छा लाभ कमाने का लालच अंतत: किसी के निवेश को भारी जोखिम में डाल देता है. हां, एक अच्छा ट्रेड अक्सर आपको उसी अवधि में निवेश की तुलना में अल्पावधि में अधिक पैसा कमा सकता है. लेकिन एक गलत ट्रेड, विशेष रूप से लीवरेज के जरिए, आपके निवेश के मूल्य को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. और आप अंतत: सब गंवा सकते हैं. इसके अलावा, बार-बार होने वाली मुनाफावसूली के साथ टैक्स के रूप में जटिलताएं भी आती हैं, जिन्हें सिर्फ एक निवेशक बने रहने से आसानी से टाला जा सकता है. ट्रेडिंग को निवेश समझने की गलती न करें—वे बहुत अलग हैं और ऐसी समझ आपके निवेश को प्रभावित करती है.
6 सही समय पर बिक्री न करना
यह एक सामान्य गलती है जो कुछ अनुभवी निवेशक भी बाजार बढ़ने के वक्त कर बैठते हैं. बाजार की तेजी केवल निवेश जारी रखने के लिए नहीं है, यह किसी के विशिष्ट निवेश पोर्टफोलियो पर दोबारा गौर करने का भी वक्त है. यह कुछ घाटे के प्रोपोजिशन के साथ-साथ उन निवेशों से बाहर निकलने का अच्छा वक्त होता है जिनकी अब जरूरत नहीं है. इस तरह सही समय पर बेचना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि सही समय और सही कीमत पर खरीदना. बढ़ते हुए खराब निवेशों पर इस उम्मीद में बैठे रहने की गलती न करें कि वे बढ़ते रहेंगे. उन शेयरों और फंडों से मुनाफावसूली करना और आंशिक निकास करना अच्छी रणनीति है, जिन पर सुधार की वजह से सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है. बाजार में तेजी का दौर आपके परिसंपत्ति आवंटन पर पुनर्विचार करने का अच्छा मौका देता है—ज्यादा खतरनाक देनदारियों को लेने के बजाए पोर्टफोलियो में निवेश जोखिम कम रखने के लिए अपने परिसंपत्ति आवंटन और 'पुनर्संतुलन' का मूल्यांकन करें.
- नारायण कृष्णमूर्ति