भारत@100 : देश की तरक्की के चार विषय

आधुनिक अर्थव्यवस्थाएं स्टेम यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमैटिक्स की ताकत पर खड़ी होती हैं. टेक्नोलॉजी आधारित विश्व में प्रासंगिक बने रहने और रोजगार पैदा करने के लिए भारत में भी इन विषयों में निवेश बेहद अहम है.

तकनीक की बाराखड़ी आइआइटी दिल्ली की एक लैब में छात्र
तकनीक की बाराखड़ी आइआइटी दिल्ली की एक लैब में छात्र

आज की दुनिया में जहां टेक्नोलॉजी के नवाचारों को लेकर लगातार मंथन चल रहा है, साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमैटिक्स (एसटीईएम या स्टेम) में लोगों की मांग तेजी से बढ़ रही है. रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), मशीन लर्निंग (एमएल), क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्ज (आइओटी) में प्रगति के चलते स्टेम में प्रतिभाशाली प्रोफेशनल्स की मांग और तेज हो गई है.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2023 के मुताबिक, 75 फीसद से ज्यादा कंपनियां अगले पांच साल में एआइ, बिग डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग अपनाने पर विचार कर रही हैं. स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय सेवा सरीखे क्षेत्रों में स्टेम विषयों का अक्सर सम्मिलन होते देखा जाता है. जलवायु परिवर्तन और भावी महामारियों के प्रभाव से निपटने और खाद्य सुरक्षा पक्की करने में स्टेम के अनुसंधानों की खासी अहमियत है.

यह गेमचेंजर क्यों है

स्टेम की पढ़ाई विकासशील देशों के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि इसी के बूते वे टेक्नोलॉजी के बदलावों के साथ कदमताल करते हुए दुनिया भर में प्रतिस्पर्धी बने रह सकते हैं. स्टेम की शिक्षा पर ध्यान देकर देश अपनी शोध क्षमता को मजबूत बना सकते हैं, नई टेक्नोलॉजी का निर्माण कर सकते हैं, और समस्याओं के स्थानीय समाधान दे सकते हैं. इससे टेक्नोलॉजी और समाधानों के आयात पर निर्भरता कम होगी और ज्ञान का वैश्विक आदान-प्रदान आसान होगा.

स्टेम की पढ़ाई रोजगार सृजन के लिए भी जरूरी है. भारत में स्टेम से जुड़ी नौकरियों की मांग में 2016 और 2021 के बीच 44 फीसद की बढ़ोतरी हुई और 2025 तक इसके 50 फीसद तक बढऩे की उम्मीद है. फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2023 कहती है कि भारत में शीर्ष उभरती नौकरियां एआइ और मशीन लर्निंग सरीखे क्षेत्रों में विकसित होंगी. 1.4 अरब आबादी और 27 की औसत उम्र के साथ भारत को अपने युवाओं को इस तरह प्रशिक्षित करना होगा कि वे जनसांख्यिकी लाभांश की सारी संभावनाओं का दोहन कर पाएं. यह बजट में ज्यादा धनराशि रखने और स्टेम की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देने की मांग करता है.

महारत हासिल करने के लिए भारत क्या करे

स्टेम की पढ़ाई तब और भी निर्णायक भूमिका अदा करेगी जब भारत सेवाओं की अगुआई वाली अर्थव्यवस्था से धीरे-धीरे मैन्युफैक्चरिंग आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने का आकांक्षी है. भारत में 34 फीसद ग्रेजुएट स्टेम विषयों में हैं और कुल आंकड़ों के लिहाज से भारत वैश्विक अगुआ है. फिर भी स्टेम की दुनिया का विस्तार करने की तत्काल जरूरत है. केंद्र सरकार ने स्कूल स्तर पर अटल टिंकरिंग लैब्ज, ध्रुव योजना और राष्ट्रीय आविष्कार अभियान सरीखी पहल करके स्टेम को बढ़ावा दिया है.

मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और स्किल इंडिया सरीखे कार्यक्रमों से स्टेम में ग्रेजुएट युवाओं की मांग और आपूर्ति दोनों में इजाफा होने की उम्मीद है. मगर भारत को स्टेम की पढ़ाई में और ज्यादा निवेश करना होगा. 2003 की विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति में तय किया गया था कि 2007 तक भारत के जीडीपी का 2 फीसद अनुसंधान और विकास में खर्च किया जाएगा. यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ. यूनेस्को की 2021 की साइंस रिपोर्ट कहती है कि भारत का औसत जीईआरडी (आरऐंडडी पर सकल घरेलू व्यय) पिछले दो दशकों में उसके जीडीपी का महज 0.75 फीसद रहा है. यह ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) देशों में सबसे कम जीईआरडी-जीडीपी अनुपात है.

हालांकि भारत के कुल स्टेम ग्रेजुएट में 43 फीसद महिलाएं हैं, पर स्टेम की नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी बमुश्किल 14 फीसद है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2023 में स्टेम की शिक्षा और अनुसंधान पर जोर दिया गया है, पर इसे लागू करने के लिए पर्याप्त धनराशि का सहारा भी होना चाहिए.

अटल टिंकरिंग लैब्ज (एटीएल)

• इन्हें स्कूल छात्रों के लिए नवाचार का केंद्र बनाना है. 10,000 से ज्यादा एटीएल बनाई गई हैं. इन्हें शीर्ष संगठन पाल-पोस रहे हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 100 एटीएल गोद ली हैं. ओपीपीओ इंडिया केरल में एक एटीएल की स्थापना करेगा, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी में पहली एटीएल होगी

स्टेमरोबो टेक्नोलॉजीज

• स्टेम फॉर भारत और दीक्षा स्टेम सरीखी दूसरी निजी संस्थाएं कार्यशालाओं के जरिए स्टेम की पढ़ाई को बढ़ावा दे रही हैं.

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