भारत@100 : साइबर युक्ति से सीमाओं की सुरक्षा
साइबर अपराध तो खैर सभी को अपनी चपेट में लेते हैं पर देश के सुरक्षा तंत्र को निशाना बनाकर साइबर जंग भी छेड़ी जाती है. वैसे तो भारत के पास बहु-स्तरीय साइबर सुरक्षा तंत्र है लेकिन हमारे सशस्त्र बलों के लिए कहीं ज्यादा मजबूत फायरवॉल की जरूरत है.

पूरी दुनिया एक डिजिटल युग में कदम रख चुकी है. इसीलिए साइबर सुरक्षा की अहमियत बहुत बढ़ गई है. इसका आशय ऐसे तरीकों और टेक्नोलॉजी से है, जिसका उद्देश्य नेटवर्क सिस्टम, डेटा और प्रोग्राम को हैकर्स और साइबर अपराधियों के हमलों, धोखाधड़ी और अवैध पहुंच से बचाना है. साइबर सुरक्षा में अगर एक भी सेंध लगे तो लाखों लोगों की निजी जानकारियां लीक हो सकती हैं और करोड़ों की वित्तीय चपत लग सकती है.
डिजिटल ढांचे का इस्तेमाल करने वाले एटमी संयंत्रों, बैंकों, बिजलीघरों, अस्पतालों और कई दूसरे अहम प्रतिष्ठानों के लिए साइबर सुरक्षा बेहद खास है. यह गलत इरादों के साथ किए गए हमलों की पहचान करके फौरन उन्हें रोकने के उपाय करती है. ऐसे युग में जब सब कुछ तकनीक केंद्रित हो गया है और दुनिया का अधिकांश हिस्सा डिजिटलीकरण पर निर्भर है, साइबर सुरक्षा और भी अहम हो जाती है.
यह गेमचेंजर क्यों है
अब जबकि अधिकांश रक्षा सूचनाओं/योजनाओं/इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों का डिजिटलीकरण हो चुका है, साइबर सुरक्षा में कोई भी सेंध अति-महत्वपूर्ण गोपनीय जानकारियां लीक होने के अलावा देश की सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर खतरा बन सकती है. हमारा दुश्मन पड़ोसी चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता. चीन-निर्मित सीसीटीवी कैमरों के जरिए हमारे रक्षा प्रतिष्ठानों की जासूसी और डीआरडीओ जैसे महत्वपूर्ण संगठनों और मंत्रालयों को हैक करने की कोशिश में वह कोई कसर नहीं छोड़ता. दूसरी तरफ, आतंकवादी संगठन भी साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं. इस सबके बीच भारत भी साइबर सुरक्षा गतिविधियों को मजबूत बनाने में जुटा है.
साइबर जंग से निबटने के लिए भारत के पास बहुस्तरीय साइबर सुरक्षा प्रणाली मौजूद है. 2004 में स्थापित भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (सीईआरटी-इन) साइबर सुरक्षा खतरों से निबटने के लिए एक नोडल एजेंसी के तौर पर काम करती है. राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा संरक्षण अधिनियम, 2014 के तहत अति-महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र और दूसरे कई तरह के तरीके विकसित किए गए हैं.
ऊर्जा, बैंकिंग, दूरसंचार और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए नेशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआइआइपीसी) है. 2018 में सरकार की साइबर सुरक्षा और ई-निगरानी एजेंसी, राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (एनसीसीसी) की स्थापना की गई थी. निजी क्षेत्र भी इसमें अहम भागीदारी निभा रहा है. कई कंपनियों ने साइबर हमलों की निगरानी और उनसे निबटने को खुद के सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (एसओसी) बनाए हैं.
महारत हासिल करने के लिए भारत क्या करे
साइबर सुरक्षा के साधन मुहैया कराने वाली कंपनी चेक पॉइंट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज के मुताबिक, भारत में पिछले छह महीनों के दौरान किसी भी संगठन पर हर हफ्ते औसतन 1,787 साइबर हमले दर्ज किए गए जबकि वैश्विक औसत 983 साइबर हमलों का है. भारत में साइबर अपराधों के बारे में ज्यादा जागरूकता की जरूरत है क्योंकि देश की अधिकांश आबादी डिजिटली साक्षर तो है लेकिन ज्यादातर लोगों को बुनियादी सुरक्षा उपायों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
वित्तीय क्षेत्र को भी सूचनाओं को सुरक्षित रखने और एटीएम सिस्टम को हैक करके किसी खाते के नाम पर धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है. इसके अलावा, सेना के लिहाज से साइबर सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. सशस्त्र बलों में सुरक्षित संदेश भेजने और सुरक्षित कॉल करने की क्षमता विकसित की जानी चाहिए. सिस्टम/नेटवर्क के प्रमुख उपयोगकर्ताओं को रियल टाइम अलर्ट भेजने की प्रक्रिया भी तैयार की जानी चाहिए. घटनाओं की रियल टाइम रिपोर्टिंग भी बहुत ज्यादा मायने रखती है.
चुनौतियां
• राष्ट्रीय स्तर पर साइबर सुरक्षा का कोई ठोस रणनीतिक ढांचा नहीं
• व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नियामक नीति न होने की वजह से जागरूकता का अभाव
• साइबर सुरक्षा चिंताओं से निबटने को पर्याप्त संसाधन न होना
बदलाव के अगुआ
1. क्लाउडसेक
• बेंगलूरू की यह एआइ कंपनी साइबर खतरों का पूर्वानुमान लगाती है
2. आर्कन टेक सोल्यूशन
• मुंबई की यह फर्म एंटरप्राइज आइडेंटिटी सिक्योरिटी डोमेन में महारत हासिल कर रही है
3. ब्लूसफायर साइबर सिस्टम्स
• हैदराबाद की यह फर्म हर तरह के उद्योगों की कंपनियों के सामने आने वाले साइबर सिक्योरिटी के खतरों का समाधान करती है
4. डेटा रिजॉल्विंग टेक्नोलॉजीज
• नोएडा की इस कंपनी को इंटरनल डेटा मैनेजमेंट और साइबर सिक्योरिटी में विशेषज्ञता प्राप्त है
1.725
साइबर हमलों की संख्या, जिन्हें भारत के रक्षा प्रतिष्ठान और दूसरे सरकारी महकमों ने जनवरी-मार्च 2023 के दौरान हर सप्ताह झेला.