कमोडिटी में निवेश का वक्त

कमोडिटी या जिंस समझदार निवेशकों के लिए अलग संपत्ति वर्ग बन सकती हैं और अगर आप हेजिंग टूल खोज रहे तजुर्बेकार इक्विटी निवेशक हैं तो आपको इस पर गौर करना चाहिए.

कमोडिटीज की दुनिया
कमोडिटीज की दुनिया

निवेश : कमोडिटी

कमोडिटी या जिंसों में निवेश का जिक्र करने पर संभावना यही है कि जोखिम भरा और पेचीदा निवेश दिमाग में उभरेगा. मगर जिस तरह शेयरों में निवेश के लिए कंपनियों, सेक्टरों और वित्तीय खूबियों-खामियों के बारे में ढेरों खोजबीन करनी होती हैं, उसके विपरीत कमोडिटी में निवेश मोटे तौर पर मांग और आपूर्ति के सरोकारों पर टिका होता है.

जिन खुदरा निवेशकों के पास खासा विविधतापूर्ण पोर्टफोलियो और जोखिम लेने की क्षमता है, वे वित्तीय नुक्सान से बचने के औजार (हेजिंग) के तौर पर जिंसों में निवेश पर गौर कर सकते हैं. पोर्टफोलियो के नजरिए से जिंसों की कीमतों में शेयर और बॉन्ड के मुकाबले ऐतिहासिक तौर पर कम उतार-चढ़ाव आए हैं, जिससे यह पोर्टफोलियो में विविधता लाने का कारगर विकल्प देता है.

सरल शब्दों में, कमोडिटी या जिंस व्यापार में इस्तेमाल की गई वह आवश्यक वस्तु है जिसकी दूसरी वस्तुओं के साथ अदला-बदली की जा सकती है. अनाज, सोना, तेल और प्राकृतिक गैस सरीखी वस्तुएं जिंसों के आदर्श उदाहरण हैं (देखें—कमोडिटीज की दुनिया). कमोडिटी निवेशकों के लिए सामान्य निवेशों से बाहर अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अच्छा तरीका हो सकती हैं. इन वस्तुओं की भौतिक खरीद-फरोख्त की जा सकती है, पर ज्यादातर यह वायदा करारों के जरिए होता है, जिसमें आप तयशुदा तारीख पर निश्चित कीमत पर जिंस बेचने या खरीदने की रजामंदी देते हैं.

जिंसों पर विचार करने की मुख्य वजह अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना और महंगाई से बचाव करना है. याद रखिए कि जिंसों की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव आते हैं और उनकी खरीद-फरोख्त पेचीदा हो सकती है, क्योंकि पहले से उनका अंदाज लगाना आसान नहीं है और ये अक्सर सरकार के नियमों-कानूनों पर निर्भर करती हैं.

जिंसों के व्यापारी अक्सर बाजी लगाते हैं कि जिंस की कीमत में आगे कैसी हलचल होगी. उन्हें लगता है कि जिंस की कीमत ऊपर चढ़ेगी, तो वे वायदा खरीद करते हैं या खरीद लेते हैं. उन्हें लगता है कि जिंस की कीमत नीचे जाएगी, तो वायदा बिक्री करते हैं या बेच देते हैं. वायदा बाजार में जिंसों की खरीद-फरोख्त आम बात है, जहां करार में भविष्य में तयशुदा तारीख पर परिसंपत्ति की डिलिवरी की शर्तें स्पष्ट लिखी होती हैं.

● कमोडिटी ट्रेडिंग

आप जिंसों को भौतिक तौर पर खरीदकर उनमें सीधे निवेश कर सकते हैं. यह कम तादाद और खासकर सोने सरीखी जिंसों के मामले में तो कारगर है, लेकिन आप कच्चे तेल या कृषि जिंसों की डिलिवरी और भंडारण को समझने का जतन करें तो यह काफी मुश्किल है. यही वजह है कि फिजिकल कमोडिटी में निवेश करने के लिए व्यक्तिगत निवेशक को खासी मशक्कत करनी होती है. वायदा जिंसों की लोकप्रियता की बड़ी वजह उनकी खरीद-फरोख्त का सुविधाजनक होना है.

कमोडिटी ट्रेडिंग अक्सर हाजिर बाजार या डेरिवैटिव अथवा वायदा बाजार में होती है. ये डेरिवैटिव करार अपनी अंतर्निहित परिसंपत्ति के तौर पर हाजिर बाजारों का इस्तेमाल करते हैं और इसकी मिल्कियत भविष्य में निश्चित समय पर तयशुदा कीमत पर मालिक को सौंप देते हैं. सौदा खत्म होने पर जिंस या वस्तु भौतिक तौर पर सौंप दी जाती है. आपके पास इसकी इजाजत देने वाला ब्रोकरेज खाता है, तो आप वायदा करार सरीखे कमोडिटी डेरिवैटिव की ट्रेडिंग कर सकते हैं. जिंसों में काम करने वाली कॉर्पोरेट संस्थाएं कीमतों को काबू में रखने और साथ उनकी आपूर्ति बनाए रखना पक्का करने के लिए दक्षता से इस रास्ते का इस्तेमाल करती हैं.

जब आप वायदा कारोबार करते हैं, आपको अपने ब्रोकरेज खाते में शुरुआती मार्जिन मनी रखनी होती है. याद रखिए कि जब आप मार्जिन पर खरीद-फरोख्त करते हैं, आप उधार की रकम पर ट्रेडिंग कर रहे होते हैं, जिससे आपका नुक्सान बढ़ सकता है. जिंसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी मार्जिन की मांग को पूरा करने के लिए, यानी जब ब्रोकर ज्यादा रकम जमा करने की मांग करे तो हाथ में पर्याप्त संसाधन होना बेहद जरूरी है.

कुछ निवेशक धातु स्टॉक या ऊर्जा स्टॉक सरीखी जिंसों का उत्पादन करने वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश कर कमोडिटी स्टॉक में निवेश करने पर विचार करते हैं. यह जिंसों में निवेश का परोक्ष तरीका है क्योंकि कमोडिटी स्टॉक की कीमत में बदलाव का उसकी मूल कमोडिटी से कोई लेना-देना नहीं भी हो सकता है. आप कमोडिटी ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में और ऐसे म्यूचुअल फंड में निवेश करने का पता लगा सकते हैं जो गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड सरीखी कमोडिटी थीम का पालन करते हों.

● क्या आपको ट्रेडिंग करनी चाहिए?

कमोडिटी ट्रेडिंग में अत्यधिक जोखिम, अत्यधिक कमाई है और निवेश की रणनीति के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. खासकर ऐसे निवेशक इसे अपना सकते हैं जो ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं और जिनके पास अच्छा-खासा विविधतापूर्ण पोर्टफोलियो है. ऐसे निवेशकों के लिए जिंस अपने पोर्टफोलियो को तेजी से गिरते बाजार या महंगाई से बचाने का असरदार साधन हो सकती हैं.

आप कीमतों के ऐतिहासिक रुझानों और जिंसों की कीमत में हलचल की झलक देने वाले आंकड़ों पर नजर रख सकते हों तो कमोडिटी में निवेश करके फायदा उठा सकते हैं. ज्यादातर कमोडिटी ट्रेडिंग निवेश नहीं बल्कि सट्टेबाजी के बराबर है, इसलिए निवेश और ट्रेडिंग से पहले उन नुक्सानों के बारे में पक्का कर लें जो आपको उनमें निवेश करने पर हो सकते हैं.

जिंसों में धन लगाने के फायदे

● रुपए के अवमूल्यन के खिलाफ ढाल: भारतीय रुपए का सोने के साथ उलटा रिश्ता है और जब भी रुपए कीमत गिरती है, सोने की कीमत ऊपर चढ़ जाती है, और इससे उलटा होता है. जब भी भारतीय शेयर बाजारों में कमजोरी दिखाई देती है, ऐसे वक्त शेयरों के बजाए कमोडिटी में निवेश बेहतर बचाव बन जाता है.

● तरलता: जब शेयर बाजार तेज उतार-चढ़ाव से गुजर रहे हों, कमोडिटी फ्यूचर्स में निवेश किया जा सकता है, क्योंकि यह रियल एस्टेट सरीखी दूसरी वित्तीय परिसंपत्तियों के मुकाबले ज्यादा तरलता देता है. यही नहीं, जिंसों को खरीदना-बेचना आसान है क्योंकि जरूरत पड़ने पर इस स्थिति को खत्म करने विकल्प होता है.

● घटनाओं के जोखिम से बचाव: प्राकृतिक आपदा, युद्ध और आर्थिक संकट सरीखे जोखिमों का बॉन्ड और शेयर सरीखी वित्तीय परिसंपत्तियों की कीमत पर नकारात्मक असर पड़ता है. मगर दूसरी तरफ इन घटनाओं के जोखिम कुछ निश्चित जिंसों और खासकर तेल और गैस और यहां तक कि कृषि उपजों की कीमतें बढ़ा देते हैं. जिंसों के बारे में पता लगाने का यह भी एक कारण है, खासकर जब ऐसी किसी घटना के आसार हों.

● अच्छा रिटर्न: जिंसों की कीमतों में चरम उतार-चढ़ाव आते हैं और रणनीतिक कदम के तौर पर इसका इस्तेमाल करके कीमतों में उतार-चढ़ाव का फायदा उठाया जा सकता है.

कमोडिटीज ट्रेडर्स इस बात पर दांव लगाते हैं कि कमोडिटी की कीमतें किस तरफ जाएंगी और अगर आप मानते हैं कि कीमतें बढ़ेंगी तो आप फ्यूचर्स में पैसा लगाएंगे अथवा लांग पोजिशन बनाएंगे

कमोडिटीज की दुनिया

मेटल्स (धातुएं) और मटीरियल्स (सामग्री)

बेस मेटल्स : एल्युमिनियम, कॉपर, निकल,

जिंक, टिन

बल्क कमोडिटीज: आयरन ओर, कुकिंग कोल, बॉक्साइट, स्टील

अन्य : सोडा ऐश, केमिकल्स, रेयर अर्थ मेटल्स

एग्रीकल्चर

अनाज : चावल, बासमती चावल, गेहूं, मक्का, जीरा

तेल और तिलहन: कैस्टर (अरंडी) सीड, सोया सीड, कैस्टर ऑयल, रिफाइंड सोया तेल, सोयामील, क्रूड पाम ऑयल, मूंगफली तेल, मस्टर्ड सीड, कॉटनसीड

मसाले: काली मिर्च, लाल मिर्च, जीरा, हल्दी और इलायची

दालें: चना, उड़द, पीली मटर, अरहर की दाल

ऊर्जा

क्रूड ऑयल (कच्चा तेल), नेचुरल गैस, ब्रेंट क्रूड, थर्मल कोयला, वैकल्पिक ऊर्जा

मूल्यवान धातुएं और सामग्री

सोना, चांदी, प्लेटिनम और पलेडियम

सेवाएं

ऑयल सर्विसेज, माइनिंग सर्विसेज और अन्य.

नारायण कृष्णमूर्ति

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