जानलेवा सपने
बहुत से लोग ज्यादा खतरनाक रास्ते अपनाते हैं, जैसे तुर्की होकर मेक्सिको जाना और फिर वहां से अमेरिका में प्रवेश करना. पिछले साल दिसंबर में गांधीनगर के कलोल तालुका के बृजकुमार यादव के रूप में पहचाने गए एक व्यक्ति की ट्रंप वॉल से गिरकर मौत हो गई

एक दुखद घटना में गुजरात के मेहसाणा जिले के मानेकपुरा गांव के चार लोगों के एक परिवार की कनाडा से अमेरिका में प्रवेश करने का प्रयास करते समय मौत हो गई. उनकी नाव सेंट लॉरेंस नदी में पलट गई थी. प्रवीण चौधरी (50), उनकी पत्नी दक्षा (45), बेटे मीत (20) और बेटी विधि (24) के शव अमेरिका-कनाडा सीमा के पास नदी के दलदल में एक अन्य अप्रवासी रोमानियाई परिवार के अवशेषों के साथ मिले थे.
रोमानियाई परिवार भी उसी नाव पर सवार था. यह दुर्घटना गुजरात राज्य के ही एक अन्य परिवार- जगदीश पटेल (39), उनकी पत्नी वैशालीबेन (37) और बच्चों विहांगी (11) तथा धार्मिक (3)—की मौत के 15 महीने से भी कम समय के भीतर हुई है. पटेल परिवार अवैध रूप से अमेरिका-कनाडा सीमा पार करते हुए अत्यधिक ठंड के कारण मौत के मुंह में समा गया था. मानेकपुरा गांव गांधीनगर जिले में पटेल परिवार के गांव डिंगुचा से सिर्फ 25 किमी दूर है. इस घटना से एक बार फिर लोगों का ध्यान उत्तरी गुजरात में अमेरिका के प्रति आकर्षण के साथ इसका फायदा उठा रहे मानव तस्करों के फलते-फूलते नेटवर्क या 'एजेंटों' की ओर गया है.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि जनवरी, 2022 में डिंगुचा के पटेल परिवार के साथ हुई दुर्घटना के बाद भी ऐसे एजेंटों द्वारा कम से कम 5,000 परिवारों को अमेरिका भेजा गया है. उन्होंने यह भी कहा कि ''जब तक मांग बनी रहेगी, धंधेबाज कानून को चकमा देने के नए तरीके तलाशते रहेंगे.''
आमतौर पर 'विदेश में अध्ययन', 'बिजनेस वीजा' या 'करियर काउंसलिंग' कार्यक्रम चलाने की आड़ में काम करने वाले ये एजेंट अमेरिका पहुंचने में मदद करने के लिए प्रति व्यक्ति 25 लाख रुपए से लेकर 1.5 करोड़ रुपए तक वसूलते हैं. पिछले साल डिंगुचा मामले के बाद पुलिस ने तस्करों पर कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन एक एक्टिविस्ट का कहना है कि संबंधित कानून के अंतर्गत मिलने वाली सजा इन पर प्रभावी रोक नहीं लगा सकी है. पिछले साल दिसंबर में पुलिस ने गुजरात के एक हाई प्रोफाइल एजेंट बॉबी उर्फ भरत पटेल को गिरफ्तार किया था.
उसे सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई और वह तीन सप्ताह से भी कम समय में जेल से बाहर आ गया. इस साल जनवरी में गिरफ्तार किए गए तीन अन्य एजेंटों में से एक, भाविन पटेल, को 2019 में अमेरिका में विदेशी नागरिकों की तस्करी के लिए न्यू जर्सी में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका था. लेकिन, एक साल की सजा काटने के बाद भाविन ने गुजरात से अपना धंधा फिर चालू कर दिया. इसके अलावा, कानून प्रवर्तन एजेंसियां अभी तक डिंगुचा मामले के तीन आरोपियों—राजिंदर पाल सिंह, फेनिल पटेल और बिट्टा सिंह उर्फ बिट्टू पाजी—को भारत नहीं ला सकी हैं.
इन घटनाओं से राज्य प्रशासन दबाव में है. कई जिलों की पुलिस, अपराध शाखा निदेशालय एवं सीआईडी की मानव तस्करीरोधी इकाई आदि जांच में जुटी हैं. ऐसी घटनाओं से उन खतरनाक रास्तों का भी पता चलता है जिन्हें लोग अमेरिका पहुंचने के लिए अपनाते हैं. बहुत से लोग ज्यादा खतरनाक रास्ते अपनाते हैं, जैसे तुर्की होकर मेक्सिको जाना और फिर वहां से अमेरिका में प्रवेश करना. पिछले साल दिसंबर में गांधीनगर के कलोल तालुका के बृजकुमार यादव के रूप में पहचाने गए एक व्यक्ति की ट्रंप वॉल से गिरकर मौत हो गई, जबकि उसका परिवार अमेरिका की तरफ गिरा और उसे गंभीर चोटें आईं. मुश्किलों के बावजूद, बेहतर भविष्य की तलाश उन्हें खतरनाक रास्ते से अमेरिका जाने को उकसाती रहती है.