वादे निभाने की मंशा से घोषणाओं की झड़ी
योगी सरकार 2.0 के दूसरे बजट में समाज के सभी तबकों को ध्यान में रखा गया है लेकिन अब चुनौती बजट के प्रावधानों को धरातल पर उतारने की है. इस मामले में अभी तक सभी सरकारों का रिपोर्ट कार्ड काफी खराब रहा है

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में चिल्ला रोड चौराहे पर सब्जी का ठेला लगाने वाले रामबाबू कभी यहां की इकलौती कताई मिल में फिटर की नौकरी करते थे. सन् 1981 में यूपी यार्न कंपनी के तहत खुली इस कताई मिल में उत्तर प्रदेश और आसपास के प्रदेशों के करीब दो हजार मजदूर काम करते थे. सोलह साल मिल ठीक चली लेकिन 1998 में घाटे में आने के कारण इसे बंद कर दिया गया. इससे रामबाबू समेत करीब दो हजार मजदूर बेकार हो गए. अपने बकाए के भुगतान के लिए ये लोग आज भी मिल के चक्कर लगा रहे हैं.
पिछले साल 17 फरवरी को विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी रैली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुंदेलखंड में बंद पड़ी मिलों को दोबारा चालू कराने का वादा किया था. हालांकि रामबाबू को उस वक्त यह महज एक चुनावी वादा ही लगा था लेकिन ठीक एक साल बाद 22 फरवरी को विधानसभा में पेश बजट में योगी सरकार ने मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण एवं नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना का प्रावधान करके चुनावी वादा पूरा करने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया है.
सदन में बजट पेश होने के बाद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने बताया, ''सरकार नई नीति लाई है जिसके तहत बंद पड़ी कताई मिल को यार्न यूनिट की जगह औद्योगिक क्लस्टर में परिवर्तित किया जा सकेगा. इन बंद यूनिट में जो कर्मचारी कार्यरत थे, उनके लंबित देयों का भुगतान भी किया जाएगा.'' केवल बंद पड़ी यूनिट ही नहीं, योगी सरकार 2.0 के दूसरे आम बजट में 2022 के चुनावी वादों को पूरा करने के लिए 64 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है.
योगी सरकार में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा 6,90,242.43 करोड़ रुपए का बजट पेश किया. अगले साल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के इस बजट की काफी अहमियत है क्योंकि इस राज्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के सबसे ज्यादा सांसद जिताए हैं. दस दिन पहले समाप्त हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मिले 33.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव को जमीन पर उतारने की दिशा में यह बजट के मुख्य बिंदुओं में से एक है. विकास की दौड़ में प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र से अपेक्षाकृत पिछड़े साबित हो रहे पूर्वी, मध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक संतुलन के लिए खास व्यवस्था की गई है. झांसी लिंक एक्सप्रेसवे तथा चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे की नई परियोजनाओं के प्रारंभिक चरण के लिए 235 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है. इसी प्रकार बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के साथ डिफेंस कॉरिडोर परियोजना के लिए 550 करोड़ रुपए की व्यवस्था भी बजट में की गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बताते हैं, ''सरकार ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ गोरखपुर में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए 200 करोड़ रुपए प्रदान करने की घोषणा की है. इसके अलावा सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे एवं बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे छह स्थानों पर इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स बनाने का भी निर्णय लिया है. इसमें से चार कॉम्प्लेक्स पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे तथा दो कॉम्प्लेक्स बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे बनाए जाएंगे.''
चुनावी वादे को पूरा करने के क्रम में लखनऊ सहित प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों तथा शहरी क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के विकास पर बल दिया गया है. इसके तहत वाराणसी एवं अन्य शहरों में रोपवे सेवा विकसित किए जाने के लिए 150 करोड़ रुपए की व्यवस्था बजट में की गई है. तेजी से आकार ले रही कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के लिए 585 करोड़ रुपए और आगरा मेट्रो रेल परियोजना के लिए 465 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. वहीं वाराणसी, गोरखपुर और अन्य शहरों में मेट्रो रेल परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए 100 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है. योगी सरकार ने दिल्लीग-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम परियोजना के लिए 1,306 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा है.
आधारभूत ढांचा विकास के लिए मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नए शहर प्रोत्साहन योजना में 3,000 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है. शहरों में मूलभूत सुविधाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए प्रयासरत योगी सरकार ने अमृत 2.0 के अंतर्गत पेयजल, सीवरेज तथा जल क्षेत्रों के लिए जहां पिछले साल के बजट में 2,000 करोड़ रुपए का ऐलान किया था, वहीं इस बजट में लगभग 180 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 5,616 करोड़ रुपए की व्यवस्था की है. इसी प्रकार स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत शौचालय, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, यूज्ड वाटर मैनेजमेंट के लिए पिछले साल 1,356 करोड़ रुपए के मुकाबले इस बजट में 2,707 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है. यह लगभग 100 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है. कान्यकुब्ज कॉलेज, लखनऊ में राजनीतिशास्त्र विभाग में प्रोफेसर ब्रजेश मिश्र बताते हैं, ''योगी सरकार ने अपने बजट में किसी नई योजना पर काफी खर्च न करके औद्योगिक और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर काफी फोकस किया है. शहरों के आधारभूत ढांचे में विकास से औद्योगिक निवेश की गुंजाइश बनेगी और नए रोजगार का सृजन भी होगा.''
योगी सरकार ने बजट के जरिए धार्मिक पर्यटन को भी प्रोत्साहित करने की भरपूर कोशिश की है. प्रयागराज में 2025 में आयोजित होने जा रहे 'महाकुंभ मेला' को अब तक का सबसे भव्य आयोजन बनाने के लिए योगी सरकार ने इस बार बजट में भारी-भरकम पैकेज का ऐलान किया है. महाकुंभ के आयोजन के लिए बीते साल के बजट में जहां 621.55 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए थे, वहीं इसके सापेक्ष इस बार बजट में योगी सरकार ने 2,500 करोड़ रुपए की व्यवस्था की है. पहली बार 2017 में सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या, वाराणसी, चित्रकूट, विन्ध्यांचल, प्रयागराज, नैमिषारण्य, गोरखपुर, मथुरा, बटेश्वर धाम समेत कई महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण की वृहद योजना शुरू की थी. पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह बताते हैं, ''अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद पर्यटकों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए तीन मार्गों का चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण के कार्य को अगले दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है, जिसका काम युद्धस्तर पर चल रहा है. इसी तरह मिर्जापुर में प्रसिद्ध मां विन्ध्यवासिनी देवी मंदिर, मां अष्टभुजी देवी मंदिर एवं काली खोह मंदिर का जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कार्य तेजी से चल रहा है.''
योगी सरकार ने अपने नए बजट में प्रयागराज में भजन संध्या स्थल की स्थापना और सीतापुर में प्रसिद्ध तपोस्थली नैमिषारण्य में वेद विज्ञान अध्ययन केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव किया है. मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत प्रदेश में स्थित पर्यटन स्थलों का विकास 300 करोड़ रुपए की धनराशि से कराया जा रहा है. इस दिशा में आगे बढ़ते हुए योगी सरकार ने पर्यटन इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए 45 करोड़ रुपए की व्यवस्था बजट में की है. बौद्ध परिपथ के समेकित पर्यटन विकास के लिए 40 करोड़ रुपए और बुंदेलखंड के समेकित पर्यटन विकास के लिए 40 करोड़ रुपए दिए गए हैं.
पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान आवारा पशु बड़ा चुनावी मुद्दा थे. फरवरी, 2022 में फतेहपुर में एक चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने की घोषणा की थी. 22 फरवरी को पेश बजट में योगी सरकार ने आवारा पशुओं के लिए एक योजना पेश की. अन्ना पशुओं की समस्या से सबसे ज्यादा पीड़ित बुंदेलखंड में निराश्रित गोवंश की समस्या के निराकरण के लिए बुंदेलखंड के हर जिले में 5-5 गो-आश्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे. वहीं छुट्टा गोवंश के रख-रखाव के लिए 750 करोड़ रुपए की भी व्यवस्था की गई है. इसी तरह बड़े गौ संरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए 120 करोड़ रुपए के बजट का भी प्रावधान किया गया है.
योगी सरकार 2.0 के दूसरे बजट में समाज के सभी तबकों को ध्यान में रखा गया है लेकिन अब चुनौती बजट के प्रावधानों को धरातल पर उतारने की है. इस मामले में अभी तक सभी सरकारों का रिपोर्ट कार्ड काफी खराब रहा है.
सबके लिए कुछ न कुछ
प्रदेश के पावरलूम बुनकरों को रियायती दरों पर विद्युत उपलब्ध कराने के लिए 345 करोड रुपए
प्रदेश में निजी सहभागिता से स्पर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपए
लखनऊ स्थित कुकरैल वन क्षेत्र में नाइट सफारी पार्क की स्थापना के लिए 50 करोड़ रुपए
मदरसों में कंप्यूटर लैब की स्थापना के लिए एक लाख रुपए प्रति मदरसा का अनुदान दिए जाने की व्यवस्था.
स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना में पात्र छात्र-छात्राओं को टैबलेट व स्मार्टफोन देने के लिए 3,600 करोड़ रुपए
युवा अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने के लिए कॉर्पस फंड की खातिर पांच करोड़ रुपए
एक जिला, एक उत्पाद एवं हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन को प्रोत्साहित करने की खातिर यूनिटी मॉल की स्थापना के लिए 200 करोड़ रुपए की व्यवस्था
सड़कों और सेतुओं के निर्माण के लिए 21,159 करोड़ 62 लाख रुपए और धर्मार्थ मार्गों के विकास के लिए 1,000 करोड़ रुपए