अग्निपरीक्षा की घड़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि अदाणी ग्रुप हिंडनबर्ग के इस अफसाने से उबर जाएगा, पर कुछ दाग लगे रह सकते हैं

अहमदाबाद स्थित अदाणी ग्रुप के चेयरमैन 60 वर्षीय गौतम अदाणी के लिए यह अग्निपरीक्षा है. अमेरिका की इनवेस्टमेंट रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की ओर से इस ग्रुप पर बाजार में जोड़-तोड़ और धन शोधन के आरोपों के बाद इसकी कंपनियों के शेयरों को जबरदस्त झटका लगा. इस प्रसंग के बाद भारतीय शेयर बाजार भी धड़ाम से नीचे आ गए. सेंसेक्स और निक्रटी में 27 जनवरी को क्रमश: 874.16 अंकों और 287.60 अंकों की गिरावट आई, जो सूचकांकों में बीते चार महीनों की सबसे बड़ी गिरावट थी.
अदाणी ग्रुप की तरफ से हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का 417 पन्नों का खंडन जारी करने के बाद शेयर बाजार 30 जनवरी को थोड़ा पहले की स्थिति में लौट आए. महज तीन कारोबारी सत्रों में अदाणी ग्रुप का 29 फीसद बाजार पूंजीकरण या करीब 5.6 लाख करोड़ रुपए स्वाहा हो गए. ग्रुप के शेयरों में गिरावट 1 फरवरी को तब भी जारी रही जब वित्त मंत्री केंद्रीय बजट पेश कर रही थीं, और अकेले अदाणी एंटरप्राइजेज में 30 फीसद की गिरावट हो रही थी. यह मीडिया रिपोर्टों में आए उस दावे के बाद हुआ जिनमें कहा गया कि क्रेडिट सुइस ने प्राइवेट बैंकिंग ग्राहकों से अदाणी की कंपनियों के बॉंडों को मार्जिन लोन के एवज में गिरवी रखने से मना कर दिया है.
1 फरवरी को फोर्ब्स की वास्तविक समय पर अमीरों की फेहरिस्त के मुताबिक, अदाणी दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख्स से लुढ़ककर 15वें पायदान पर आ गए, जिनकी कुल संपदा 75.1 अरब डॉलर (करीब 6.2 लाख करोड़ रु.) रह गई. अदाणी, मुकेश अंबानी से पीछे खिसक गए जिन्होंने 83.7 अरब डॉलर (करीब 6.86 लाख करोड़ रुपए) के साथ भारत के सबसे अमीर शख्स का तमगा फिर से हासिल कर लिया.
जनवरी की 14 तारीख को हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ऐसे वक्त आई जब अदाणी समूह की ध्वजवाहक कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज कंपनी की विस्तार योजनाओं के वास्ते धन जुटाने और अपने कुछ कर्ज चुकाने की खातिर बाजार से 20,000 करोड़ रुपए उगाहने के लिए फॉलो-ऑन पब्लिक इश्यू (एफपीओ) लाने जा रही थी. मगर रिसर्च फर्म के आरोपों की वजह से अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयर एफपीओ के आधार मूल्य—जो प्रति शेयर 3,112-3,276 रुपए के बैंड में था—से कम कीमत पर खरीदे-बेचे जा रहे थे. 1 फरवरी को अदाणी एंटरप्रइजेज के शेयर बीएसई पर 2,128.70 रु. के भाव पर बंद हुए. हालांकि 31 जनवरी तक खासतौर पर धन्नासेठों (हाइ नेटवर्थ इंडीवीजुअल) की बदौलत एफपीओ पूरी तरह सब्स्क्राइब हो चुका था, फिर भी अदाणी ग्रुप ने 1 फरवरी को एफपीओ वापस ले लिए और कहा, ''निवेशकों के हित में'' और ''नैतिक रूप से उचित न होने'' की वजह से यह कदम उठाया गया है. 2 फरवरी को जारी एक बयान में गौतम अदाणी ने कहा, ''फैसले का हमारे मौजूदा कारोबार और भविष्य की योजनाओं पर कोई असर नहीं होगा. हम परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और डिलीवरी पर अपना ध्यान केंद्रित करना जारी रखेंगे.''
हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 218 अरब डॉलर (17.8 लाख करोड़ रुपए) का अदाणी ग्रुप ''दशकों के दौरान शेयरों के हेर-फेर और लेखाबही में धोखाधड़ी की योजनाओं में लिप्त'' रहा. उसने खुलासा किया कि उसने यूएस-ट्रेडेड बॉन्ड और नॉन-इंडियन-ट्रेडेड बॉन्ड के जरिए अदाणी ग्रुप की कंपनियों में 'शॉर्ट पोजिशन' ले रखी है. इस अमेरिकी फर्म का बड़े कॉर्पोरेट घरानों को 'शॉर्टिंग' करने का इतिहास रहा है. उसने कहा कि समूह ने अपनी सात सूचीबद्ध कंपनियों का टर्नओवर कृत्रिम ढंग से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए विदेशों में स्थित शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया, जिनका कामकाज गौतम के बड़े भाई विनोद अदाणी संभालते थे.
अपने स्पष्टीकरण में अदाणी ग्रुप ने कहा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में उठाए गए 88 सवालों में से 65 के जवाब का खुलासा अदाणी पोर्टफोलियो कंपनियां समय-समय पर कर चुकी हैं. बाकी 23 में से, 18 सवाल सार्वजनिक शेयरधारकों और थर्ड पार्टी से जुड़े थे, जबकि पांच निराधार आरोप थे. उसने कहा कि रिपोर्ट में लगाए गए आरोप ''झूठा नैरेटिव गढ़ने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में पहले से मौजूद मामलों की चालाक प्रस्तुति'' हैं. अदाणी ग्रुप ने जोर देकर कहा कि वह सभी कानूनों और नियम-कायदों का पूरी तरह पालन करता रहा है और ''सभी उपयुक्त अथॉरिटीज के समक्ष अपने शेयरधारकों की हिफाजत के उपायों'' की तलाश कर सकता है. उसने आरोपों को राष्ट्र पर हमला करार दिया. हिंडनबर्ग ने जवाबों को असंतोषजनक बताया और उनपर कायम रहा. उसने यह भी कहा कि ''धोखाधड़ी को राष्ट्रवाद की आड़ में छिपाया नहीं जा सकता.'' कांग्रेस ने बाजार नियामक सेबी और आरबीआइ से आरोपों की जांच करवाने की मांग की है.
हिंडनबर्ग की स्थापना 2017 में इक्विटी, क्रेडिट और डेरिवैटिव बाजारों के विश्लेषण के लिए हुई थी. इसका नाम 1937 में न्यू जर्सी में हुए एयरशिप विस्फोट के नाम पर रखा गया था, जिसमें 35 यात्रियों की मौत हो गई थी. अभी तक यह कम से कम 16 कंपनियों को निशाना बना चुका है. उसके बयान में स्पष्ट किया गया है कि—उसका मकसद अपनी रिसर्च की मार्फत निशाना बनाई गई कंपनी के शेयरों के टूटने की आशंका में उनकी अग्रिम बिक्री, या 'शॉर्टिंग' के जरिए मुनाफा कमाना है. हिंडनबर्ग का एक प्रमुख आरोप यह है कि अदाणी की कंपनियों ने भारी-भरकम कर्ज ले रखा है, जिससे समूह भुरभुरी वित्तीय जमीन पर खड़ा है.
अदाणी ने इसका खंडन करते हुए कहा कि कंपनी ने कर्ज का स्तर लगातार कम किया है, जिससे ईबीआइटीडीए के साथ उसके पोर्टफोलियो शुद्ध ऋण का अनुपात (कंपनी की ऋणग्रस्तता का पैमाना) 7.63 गुना से घटकर 3.23 गुना पर आ गया है. अदाणी का कर्ज बढ़ते-बढ़ते मार्च 2022 में 1.88 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया था. आशंका यह भी थी कि सरकारी बीमा कंपनी जीवन बीमा निगम (एलआइसी) की बहुत बड़ी रकम अदाणी ग्रुप की फर्मों में जोखिम से घिरी है. एलआइसी ने 30 जनवरी को एक बयान में कहा कि अदाणी ग्रुप में शेयर और कर्ज की मार्फत उसकी हिस्सेदारी 35,917 करोड़ रुपए थी. उसने जनता को भरोसा दिलाया कि एलआइसी के पास रखी अदाणी की ऋण प्रतिभूतियों की क्रेडिट रेटिंग आइआरडीएआइ (भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण) के नियमों का पालन करती हैं.
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया कि अदाणी की फर्मों के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) के पद पर नौकरी छोड़ने की दर—आठ साल के दौरान पांच सीएफओ—काफी अधिक रही है. यह लेखा-बही के संभावित दिक्कतों की तरफ इशारा करता है. उसने यह भी कहा कि अदाणी एंटरप्राइजेज और अदाणी टोटल गैस के स्वतंत्र ऑडिटर शाह ढांढरिया ऑडिट के पेचीदा काम में नाकाबिल लगते हैं. अदाणी ने इसे बकवास बताते हुए कहा कि ढांढरिया को 20 साल से ज्यादा का अनुभव है. उसने यह भी कहा कि अदाणी एंटरप्राइजेज नए कारोबारों का इंक्यूबेटर है. कानून के मुताबिक तय 35 से ज्यादा वैधानिक ऑडिट फर्म अदाणी एंटरप्राइजेज में तमाम संस्थाओं का ऑडिट करती हैं.
एक और आरोप यह था कि गौतम अदाणी के छोटे भाई राजेश अदाणी पर राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआइ) ने 2004-2005 के आसपास हीरों की ट्रेडिंग आयात/निर्यात स्कीम में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप लगाया था. डीआइआर ने उनके बहनोई समीर वोरा पर भी हीरा ट्रेडिंग घोटाले का सरगना होने का आरोप लगाया था. अदाणी ग्रुप ने कहा कि एक अपीलीय न्यायाधिकरण ने डीआरआइ के सभी आरोपों को रद्द कर दिया और सभी लेन-देन के वैध बताया था, और सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधिकरण के आदेश को सही ठहराया था.
विशेषज्ञों का मानना है कि अदाणी ग्रुप हिंडनबर्ग के इस अफसाने से उबर जाएगा, पर कुछ दाग लगे रह सकते हैं.
दावों की जंग
हिंडनबर्ग के आरोप
अदाणी की कंपनियों ने बहुत भारी-भरकम कर्ज ले रखा है, जिससे समूह डांवांडोल वित्तीय जमीन पर खड़ा है
अदाणी के बड़े भाई विनोद अदाणी करीबी सहयोगियों के जरिये विदेशों में कई शेल संस्थाओं का प्रबंधन करते हैं; उनमें 38 की पहचान कर ली गई है
अदाणी एंटरप्राइजेज में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर के नौकरी छोड़ने की दर अधिक रही है जो बही-खाते में मसलों का संकेत है
अदाणी एंटरप्राइजेज और अदाणी टोटल गैस के स्वतंत्र ऑडिटर शाह ढांढरिया ऑडिट के पेचीदा काम में नाकाबिल और अनुभवहीन शख्स नजर आते हैं
अदाणी के छोटे भाई राजेश पर डीआरआइ ने हीरा घोटाले का आरोप लगाया था और वे गिरफ्तार हुए थे. वे एमडी हैं. उनके बहनोई समीर वोरा पर भी डीआरआइ ने आरोप लगाया था
अदाणी के जवाब
समूह ने कर्ज को लगातार कम किया है और इसका ईबीआइटीडीए अनुपात 7.6 गुना से 3.2 गुना हो गया है
ये बिना किसी सबूत पेश किए और पार्टी लेन-देन से जुड़े भारतीय कानूनों की समझ के बिना दिए गए ''लापहरवाही भरे बयान'' हैं
हिंडनबर्ग ने जिनका दावा किया है, उनमें से कई सीएफओ अब भी पहले से ज्यादा बड़ी या अन्य अहम भूमिकाओं में संगठन का हिस्सा हैं
शाह ढांढरिया एक पीयर-रिव्यू सीए फर्म हैं. बिग 6 वैधानिक ऑडिटरों समेत, 35 वैधानिक ऑडिट फर्में अदाणी एंटरप्राइजेज की विभिन्न संस्थाओं का ऑडिट करती हैं
एक अपीलीय न्यायाधिकरण ने डीआरआइ के सभी आरोपों को रद्द कर दिया था और सभी लेन-देन को वैध तथा सही बताया था. सुप्रीम कोर्ट ने भी उसके फैसले को सही ठहराया था