सर्वोच्च जंग
राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है जिसमें लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के सारे विधायक शामिल होते हैं. उन्हें अलग-अलग वेटेज दिया जाता है

जुलाई में एक अलग तरह की चुनावी जंग देखने को मिलेगी—जो भारत के 18वें राष्ट्रपति का चुनाव करेगी. सत्ताधारी भाजपा ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को इस पद के लिए नामित किया है. दूसरी ओर, कई विपक्षी दलों ने साथ मिलकर पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को मैदान में उतारा है, लेकिन उन्हें सभी गैर-एनडीए दलों का समर्थन नहीं है. फिलहाल मुर्मू के पक्ष में आंकड़े झुके हुए हैं और वे स्वतंत्र भारत में पैदा होने वाली पहली राष्ट्रपति के साथ-साथ पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनने की राह पर हैं.
राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है जिसमें लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के सारे विधायक शामिल होते हैं. उन्हें अलग-अलग वेटेज दिया जाता है. हर सांसद के वोट का मूल्य 708 होता है, जबकि विधायक के वोट का मूल्य उस राज्य की आबादी से निर्धारित होता है. मसलन, आंध्र प्रदेश के एक विधायक के वोट का मूल्य 159 है, जबकि अरुणाचल प्रदेश के एक विधायक का मूल्य सिर्फ 6 है.
इस तरह से निर्वाचक मंडल में कुल 1,098,903 वोट मूल्य हैं. अगर हर उम्मीदवार के लिए दलों के समर्थन के मौजूदा परिदृश्य में कोई बदलाव नहीं होता है तो अनिर्णीत को छोड़कर, मुर्मू के समर्थन में पक्के 6,32,669 वोट हैं, और सिन्हा के समर्थन में पक्के कुल 4,57,995 वोट हैं. यह अंतर आंशिक रूप से इस वजह से है क्योंकि बीजू जनता दल और वाइएसआर कांग्रेस सरीखे अहम गैर-एनडीए दलों ने मुर्मू को समर्थन देने का फैसला किया है.
द्रौपदी मुर्मू
6,32,669
राज्यसभा
94,164
(सांसद: भाजपा 92, एनडीए सहयोगी 18, अन्य दल 23)
लोकसभा
2,71,164
(सांसद: भाजपा 303, एनडीए सहयोगी 33, अन्य दल 47)
विधानसभाएं
2,67,341
यशवंत सिन्हा
4,57,995
राज्यसभा
71,508
(सांसद: कांग्रेस 31, यूपीए सहयोगी 17, अन्य दल 53)
लोकसभा
1,10,448
(सांसद: कांग्रेस 53, यूपीए सहयोगी 56, अन्य दल 47)
विधानसभाएं
3,76,039
राज्यसभा
कुल सीटें: 234
वोट मूल्य/सीट: 708
कुल वोट मूल्य: 1,65672
लोकसभा
कुल सीटें: 543
वोट मूल्य/सीट: 708
कुल वोट मूल्य: 3,8,4,444
विधानसभाएं
कुल सीटें: 4,120
कुल वोट मूल्य: 5,43,380
लोकसभा में वे दल जिन्होंने अभी फैसला नहीं किया है 3,540
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नोट: ये आंकड़े दोनों पक्षों को विभिन्न दलों के मौजूदा घोषित समर्थन पर आधारित हैं. उनके फैसले में किसी भी तरह का बदलाव समीकरण को बदल सकता है.