बूस्टर क्यों है जरूरी
ओमिक्रॉन के एक वेरिएंट से कोविड संक्रमण में इजाफा, लेकिन करोड़ों लोगों ने बूस्टर टीका लगवाने से परहेज किया, जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक, यही बेहतर विकल्प

सोनाली आचार्जी
चाहे इसे लहर कहें या संक्रमण में इजाफा, इतना तो तय है कि देश में कोविड संक्रमण के मामले फिर बढ़ने लगे हैं. भारत में 27 जून को एक दिन में कोविड के 17,073 नए मामलों के साथ 45 फीसद संक्रमण के मामले दर्ज हुए. 26 जून को खत्म हुए हफ्ते में देश भर में 1,00,000 नए मामले और 100 मौतें दर्ज हुईं, जो तीन महीने में सबसे ज्यादा थीं. जिन राज्यों में हालात चिंताजनक बन रहे हैं, उनमें दिल्ली, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं. दिल्ली में लगातार संक्रमण बढ़ रहा है. 14 जून से रोजाना मामले 1,000 से ऊपर बढ़ रहे हैं. राजघानी में 27 जून को संक्रमण की पॉजिटिविटी दर 7.8 फीसद जितनी ऊंची थी. फिर भी, लाखों लोग बूस्टर टीका लगवाने से बच रहे हैं. मास्क पहनना कम हो गया है और एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने के तरीके पर भी गौर नहीं किया जा रहा है.
एम्स के मुखिया डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, ''कोविड हमारे इर्द-गिर्द अभी भी मौजूद है और कोविड की सावधानियों का पालन न करना और बूस्टर टीका कम से कम लगवाने की वजह से फिर संक्रमण फैल रहा है. लेकिन गंभीर मामले कम हैं और अस्पताल में दाखिले अभी कम हैं. हमें मास्क पहनने और उचित दूरी बनाए रखने की जरूरत है.'' असल में दिल्ली के अस्पतालों में कुल 9,497 बिस्तरों में सिर्फ 291 ही भरे हैं. राजीव गांधी सुपर-स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल, धर्मशिला नारायणा हेल्थकेयर, जेपी हॉस्पिल्स और कुछ दूसरों ने तो अपने कोविड वार्ड बंद कर दिए हैं.
लेकिन विशेषज्ञों को अभी भी वायरस के फैलने की चिंता है, क्योंकि बेरोकटोक महामारी ज्यादा संक्रामक हो सकती है और शायद घातक म्युटेशन हो सकता है. कोविड संक्रमण के शुरू होने के बाद उसके पांच वेरिएंट आ चुके हैं—अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और ओमिक्रॉन. उनमें ओमिक्रॉन सबसे ज्यादा संक्रामक है, लेकिन उसका संक्रमण और लक्षण हल्के हैं. इसी वजह से लोग मास्क पहनने में लापरवाही बरतने लगे और कोविड को गंभीरता से लेना छोड़ने लगे. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ जेनोमिक्स के डॉ. राकेश मिश्र कहते हैं, ''ओमिक्रॉन के ज्यादा सब-वेरिएंट की संभावना की एक वजह यह है कि जैसे यह वेरिएंट फैल रहा और लगातार फैल रहा है, उससे उसमें म्युटेशन के मौके ज्यादा मिल रहे हैं.''
ओमिक्रॉन के ताजा सब-वेरिएंट बीए.4 और बीए.5 को ही संक्रमण के मामलों में हाल की बढ़ोतरी की वजह माना जा रहा है. अप्रैल में दक्षिण अफ्रीका में पहली दफा पहचाने जाने और उसके बाद कोविड की लहर से इसके मामले दर्जनों देशों में पाए गए और अमेरिका में करीब 25 फीसद मामले इसी के हैं. इन दो वेरिएंट के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में पाए गए हैं. मौजूदा संख्या 49 है.
हालांकि बीए.4 और बीए.5 से हुई बीमारी अभी तक हल्की ही हुई है, लेकिन उनमें एकदम अलग किस्म का म्युटेशन हुआ है और स्पाइक प्रोटीन एल452आर और एफ486वी में बदलाव हुए हैं. इससे यह ज्यादा संक्रामक है और पहले के संक्रमण और टीकों से बने इम्यून से बच निकलता है. एनसीडीसी (नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल) के आकलन के मुताबिक, बीए.4 और बीए.5 की वजह से मई के पहले हफ्ते में देश भर में 1 फीसद नए कोविड-19 के मामले हुए लेकिन जून 11 को खत्म हुए हफ्ते में 22 फीसद तक नए मामले आने लगे. इम्यूनाइजेशन पर राष्ट्रीय टेक्निकल सलाहकार समूह (एनटीएजीआइ) के वर्किंग ग्रुप के प्रमुख डॉ. एन.के. अरोड़ा कहते हैं, ''यात्राओं और आर्थिक गतिविधियों के खुलने से संक्रमण बढ़ा है...भारत में कोई चिंताजनक नया वेरिएंट नहीं है लेकिन ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट का संक्रमण है. हमें मास्क पहनने और उचित दूरी बनाए रखने के अलावा बूस्टर टीका लगवाने की जरूरत है, जो इम्यूनिटी पैदा करेगा और गंभीर बीमारी का खतरा कम करेगा.''
बूस्टर पर बहस
कौन-सा बूस्टर टीका लगाएं, इसकी उलझन के अलावा ऐसे लोग भी हैं, जो यह नहीं जानते कि उसे लेना फायदेमंद है भी या नहीं. अभी तक, देश में बूस्टर टीका 5 फीसद से भी कम वयस्कों को ही लगा है. रोटरी क्लब ऑफ मद्रास नेक्स्ट जेन के कोविड टास्क फोर्स की डायरेक्टर डॉ. पवित्रा वेंकटगोपालन कहती हैं, ''जैसे लोग चिकन पॉक्स का टीका लेने के पहले दो बार नहीं सोचते, तो कोविड के टीके को लेकर आशंका क्यों होनी चाहिए?'' एलएनजेपी के मेडिकल डायरेक्टर सुरेश कुमार भी कहते हैं, ''बूस्टर टीका कोविड-19 के खिलाफ आपकी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए जरूरी है. उससे गंभीर संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत और मृत्यु की आशंका पर रोक लगती है.'' मुंबई में वासी के फोर्टिस हॉस्पिटल के इंटर्नल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. टी. चंद्रशेखर कहते हैं कि जिन्हें पहले से कुछ बीमारियां हैं या जो बुजुर्ग हैं, उनके लिए बूस्टर टीका अनिवार्य है.
कई शंकाएं उन अध्ययनों से भी पैदा हो सकती हैं, जो संकेत देती हैं कि टीके नए ओमिक्रॉन सब-वेरिएंट पर मोटे तौर पर बेअसर हैं. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक नए अध्ययन के दावे के मुताबिक, ऐसा लगता है कि बीए.4 और बीए.5 ऐंटीबॉडी की प्रतिक्रिया से उन दोनों ही स्थिति में पार पा लेता है, जिन्हें कभी संक्रमण हुआ है और जिन्हें पूरे टीके और बूस्टर टीका लग चुका है. उस अध्ययन में पाया गया कि ऐंटीबॉडी का स्तर बीए.1 के खिलाफ 6.4 फैक्टर, बीए.2 के खिलाफ 7 फैक्टर, बीए.2.12.1 के खिलाफ 14.1 फैक्टर और बीए.4 या बीए.5 के खिलाफ 21 फैक्टर कम है. हालांकि इसमें यह दर्ज किया गया कि टीके इसके बावजूद गंभीर कोविड और मृत्य से बचाव करते हैं. अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि जिनमें पहले के ओमिक्रॉन संक्रमण और टीके की वजह से इम्यूनिटी तैयार हुई है, वह भी बीए.4 और बीए.5 को रोकने के लिए संघर्ष करती है.
अभी तक भारत में किसी को अलग-अलग तरह के टीके नहीं लगाए गए हैं. यह भी एक वजह है कि कई लोग शिकार हुए हैं, क्योंकि कई अध्ययन अलग-अलग टीकों के मिश्रण को ज्यादा असरकारी मानते हैं. सीएमसी वेल्लोर के 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि कोवैक्सिन के दोहरे टीकों के बाद कोविशील्ड के बूस्टर से दो कोविशील्ड टीकों और कोवैक्सिन के बूस्टर के मुकाबले ज्यादा इम्यूनिटी तैयार होती है. कोवैक्सिन के दो टीकों के बाद कोविशील्ड का बूस्टर (तीसरा टीका) लगाने से ऐंटीबॉडी छह गुना बढ़ जाती है. हालांकि कोविशील्ड के दो टीकों के बाद कोवैक्सिन का बूस्टर लगाने वालों में ऐंटीबॉडी इतनी नहीं बढ़ती. नवी मुंबई के अपोलो हॉस्पिटल्स के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. रोहन औरंगाबादवाला कहते हैं, ''असली बात यह है कि टीका लगा होना चाहिए. बूस्टर के तौर पर दूसरे टीके का इंतजार फिलहाल रक्षा नहीं कर सकता.''
वाकई, कई लोग मिक्स-मैच विकल्प का इंतजार कर रहे हैं. पुणे स्थित इंजीनियर अनुराग भाटिया कहते हैं कि वे बूस्टर के लिए एमआरएनए टीके का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने ऑनलाइन उसके असर के बारे में पढ़ा है. उनका इंतजार इस महीने के शुरू में खत्म हो सकता था, जब वैक्सीन निर्माता बायोलाजिकल ई की प्रोटीन सब-यूनिट को कोविड-19 टीका कॉर्बेक्स का टीका डीजीसीआइ ने मंजूर किया और उसे वयस्कों के लिए पहला हेट्रोलोगस बूस्टर टीका कहा. अध्ययनों के मुताबिक, कॉर्बेक्स के बूस्टर के बाद कोविशील्ड लगवा चुके लोगों में 91 फीसद और कोवैक्सिन लगवा चुके लोगों में 75 फीसद ओमिक्रॉन के खिलाफ ऐंटीबॉडी तैयार हो जाती है. लेकिन मंजूरी के बावजूद उस टीके के लिए एजटीएजीआइ से स्वीकृति का इंतजार है, जो टीकों के डेटा का आकलन करने वाली अंतिम संस्थान है.
डॉक्टरों का कहना है कि टीके कोविड से गंभीर बीमारियों और मृत्यु से बचाव के लिए अनिवार्य हैं. गुड़गांव में मेदांता हॉस्पिटल्स में इंटर्नल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. सुशीला कालरा कहती हैं, ''ऐसी धारणा है कि कोविड अब घातक नहीं है और कई लोगों को लांग कोविड के लक्षण नहीं दिख रहे हैं. मसलन, थकान, दिमागी उलझन, सांस लेने में तकलीफ वगैरह.'' संक्रमण में मौजूदा इजाफे से भले जिंदगियां न जा रही हों, मगर उसके दुष्प्रभाव बने रह सकते हैं. विशेषज्ञों को उम्मीद है कि बूस्टर से किसी नए घातक वेरिएंट का भी प्रसार नहीं हो सकता.