उत्तर प्रदेशः परदे के पीछे आलोक
आलोक रंजन पिछली सपा सरकार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी अधिकारियों में शुमार थे.

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन पिछले तीन महीनों से समाज के अलग-अलग तबकों से बातचीत करके अपने 'मिशन’ को पूरा करने में जुटे थे. 8 फरवरी को आलोक का 'मिशन’ समाजवादी पार्टी के ''वचन पत्र’’ के रूप में सामने आया.
लखनऊ में सपा मुख्यालय में दोपहर साढ़े तीन बजे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ आलोक रंजन ने 88 पेज का ''वचन पत्र’’ जारी किया. आलोक रंजन पिछली सपा सरकार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी अधिकारियों में शुमार थे.
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव के करीबी नौकरशाह जावेद उस्मानी से मुख्य सचिव की कुर्सी छीनकर आलोक रंजन को सौंप दी थी. अब एक बार फिर अखिलेश यादव ने आलोक रंजन पर भरोसा जताया है.
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हाथ का सियासी साथ!
एक समाचार चैनल के पॉलिटिकल बहस के दौरान कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी अपना सेशन करके बाहर निकले और अगले सेशन के गेस्ट अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात हो गई. फिर मिलने की बात तय हुई.
और बात क्या हुई, इसका लोगों ने अंदाजा लगा लिया, जब सपा ने ऐलान किया कि वह प्रमोद तिवारी की बेटी और कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा के खिलाफ प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास सीट से उम्मीदवार नहीं उतारेगी. अभी तक इस तरह का सियासी शिष्टाचार कभी-कभार केवल गांधी परिवार के प्रति ही दिखाया जाता था.
अखिलेश यादव के नाम से गफलत
समाजवादी पाटी ने विधानसभा चुनाव के लिए 7 फरवरी को 24 उम्मीदवारों की सूची जारी की. इसमें एक नाम अखिलेश यादव का था, जिन्हें आजमगढ़ की मुबारकपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया था. सूची के जारी होते ही सियासी सरगर्मी बढ़ गई.
लोगों को लगा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मैनपुरी की करहल सीट के अलावा आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट से भी चुनाव लड़ेंगे. सपा समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव को बधाई देने का सिलसिला शुरू कर दिया तो विपक्षी नेता भी सवाल खड़ा करने से नहीं चूके कि आखिर क्यों सपा अध्यक्ष मुबारकपुर से चुनाव लड़ रहे हैं.
कई घंटों की सरगर्मी के बाद सपा समर्थकों को पता चला कि मुबारकपुर से सपा प्रत्याशी अखिलेश यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बल्कि आजमगढ़ के पूर्व जिला अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं. वे 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में मुबारकपुर से सपा उम्मीदवार थे, पर दोनों बार हार गए थे.