शिक्षाः उजियारा फैलाने के कुछ बड़े उपाय
शिक्षा बजट में ई-विद्या स्कीम पर खासा जोर दिया गया है. पर क्या इससे समर्थ-असमर्थ के बीच की खाई पट सकेगी?

केंद्रीय बजट 2022 शिक्षा
शैली आनंद
शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट 2022-23 की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वीकारा कि महामारी के असर से स्कूल बंद होने के कारण विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर तबके के बच्चे दो साल से औपचारिक शिक्षा नहीं पा सके हैं.
उन्होंने ऐलान किया कि ''सभी तक शिक्षा पहुंचाने का लचीला तंत्र बनाने के लिए पीएम ई-विद्या स्कीम के 'एक कक्षा-एक टीवी चैनल’ कार्यक्रम को 12 से बढ़ाकर 200 टीवी चैनलों तक ले जाया जाएगा. इससे सभी राज्य कक्षा 1 से 12 तक की पूरक शिक्षा क्षेत्रीय भाषाओं में मुहैया करने में सक्षम होंगे.’’
तालीम में एक बड़ी खाई को पाटने के लिए डिजिटल शिक्षा को संभव बनाने पर विशेष जोर देते हुए वित्त मंत्री ने शिक्षा क्षेत्र के लिए वित्तीय आवंटन में 11.9 फीसद वृद्धि का ऐलान किया. इससे 2021-22 में 93,234 करोड़ रु. का बजट 2022-23 में 1.04 लाख करोड़ रुपए का हो गया. वित्त मंत्री ने गुणवत्तापूर्ण सार्वभौमिक शिक्षा और स्किल्ड ई-प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए एक डिजिटल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की भी घोषणा की.
बजट में 'एक कक्षा, एक टीवी चैनल’ कार्यक्रम का विस्तार करने के फैसले ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है. मूल रूप से मई 2020 में शुरू की गई इस पहल को विस्तार दिए जाने से हर राज्य समर्पित टीवी चैनलों के जरिए क्षेत्रीय भाषाओं में कक्षाएं आयोजित कर सकेगा. इन चैनलों पर पूरे पाठ्यक्रम को स्कूल की तरह ही कवर किया जाएगा और हर विषय की कक्षा की
अपनी टाइमिंग और क्यूआर-कोडेड किताबें होंगी. अभी एनसीईआरटी और अन्य शैक्षणिक एजेंसियों की ओर से तैयार 12 चैनल (1 से 12 तक हर कक्षा के लिए) हिंदी और अंग्रेजी में पाठ्यक्रम-आधारित शैक्षिक सामग्री का प्रसारण करते हैं. इनके लिए छात्रों को इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता नहीं है और वे अन्य टीवी चैनलों की तरह ही इस सामग्री को देख-सुन सकते हैं.
बुनियादी ढांचे के रूप में इंटरनेट सुविधाओं की कमी और डिजिटल प्रौद्योगिकी से शिक्षकों-छात्रों के अल्प परिचय को देखते हुए महामारी भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हुई है और स्कूल जाने वाले, खासकर ग्रामीण इलाकों के बच्चे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.
सुचित्रा अकादमी के संस्थापक तथा फिक्की अराइज के सह-अध्यक्ष प्रवीण राजू कहते हैं, ''ई-विद्या कार्यक्रम का सबसे सराहनीय हिस्सा उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा सामग्री है, जो टीवी के अलावा मोबाइल फोन, लैपटॉप और रेडियो से भी ग्रहण की जा सकती है. इससे उन अविकसित क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों को लाभ होगा जहां ऑनलाइन शिक्षा अभी भी एक सपना है. किसी भी छात्र को न छोड़ने के आदर्श वाक्य के साथ सभी भाषाओं में ई-सामग्री को छात्रों तक पहुंचाया जाएगा.
बजट की कुछ आलोचना भी हुई है. लड़कियों को प्रोत्साहित करने की राष्ट्रीय योजना तथा अनुसूचित जाति/जनजाति समुदायों और ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति योजना को इस वर्ष कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली है. इसी तरह, वयस्कों की बुनियादी साक्षरता योजना, 'पढ़ना लिखना अभियान’ को भी कोई रकम नहीं दी गई है. इससे भी बड़ी बात, प्रधानमंत्री पोषण (मिड-डे मील योजना का नया नाम) योजना की रकम में भी कटौती हुई है. इस मद में पिछले साल की तुलना में 750 करोड़ रु. कम, कुल 10,233.7 करोड़ रु. ही दिए गए हैं.
1.04 लाख करोड़ रु.
आवंटित किए गए हैं 2022-23 के बजट में, शिक्षा क्षेत्र के लिए. पहले से 11.9 % ज्यादा
10,233.7 करोड़ रु.
का फंड 2022-23 में पीएम पोषण (मिड-डे मील का बदला नाम) योजना के लिए आवंटित. यह पिछले साल के मुकाबले 750 करोड़ रुपए कम है.