तेलंगानाः बुनियादी बदलाव

नई व्यवस्था के तहत तहसीलदार और उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों के पास जमीन के स्वामित्व के मामलों में ज्यादा अधिकार आ जाएंगे. इससे क्या भ्रष्टाचार मिट जाएगा

पहल तेलंगाना विधानसभा के मॉनसून सत्र में भाग लेने पहुंचे मुख्यमंत्री राव
पहल तेलंगाना विधानसभा के मॉनसून सत्र में भाग लेने पहुंचे मुख्यमंत्री राव

तेलंगाना सरकार ने 7 सितंबर को राज्य में जमीन की पंजीकरण सेवाओं को निलंबित करने की घोषणा की और अगले ही दिन इसकी शुरुआत कर दी. करीब चार दशक पहले अविभाजित आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन.टी. रामराव ने निचले स्तर पर प्रशासन में पटेल-पटवारी सिस्टम को खत्म कर दिया था, उसके बाद अब मौजूदा मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव एक नई नीति लागू कर रहे हैं, जो उसके समान ही जमीन के स्वामित्व से संबंधित प्रशासन में व्यापक ढांचागत बदलाव है. इनमें एक बड़ा बदलाव यह है कि नई व्यवस्था में ग्राम राजस्व अधिकारी (वीआरओ) और ग्राम राजस्व सहायक (वीआरए) के पद खत्म कर दिए गए हैं.

फैसले के बाद गांवों में जमीन के रिकॉर्ड के प्रबंधन में करीब 4,800 वीआरओ और 21,000 वीआरए की भूमिका खत्म हो जाएगी. पंजीकरण की सेवाएं निलंबित करने के साथ ही सरकार ने वीआरओ और वीआरए को निर्देश दे दिया है कि वे जमीन के सारे रिकॉर्ड जिला कलेक्टरों के दफ्तर में तब तक के लिए सौंप दें जब तक कि नई व्यवस्था शुरू नहीं हो जाती है. इन दस्तावेजों का रखरखाव तहसीलदारों के संरक्षण में मंडल स्तर पर किया जाएगा.


इस सुधार के लिए विधेयक—वीआरओ और वीआरए के पदों को खत्म करना और जमीन के पंजीकरण के कामकाज को व्यवस्थित करना—राज्य की विधानसभा के चालू मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा. इस सुधार के तहत राज्य सरकार तहसीलदारों को कृषि की जमीन के दाखिल-खारिज का अधिकार देने का विचार कर रही है, वहीं स्टांप और रजिस्ट्रेशन विभाग के पास शहरों में केवल भवनों के पंजीकरण और गैर-कृषि वाली जमीन के रजिस्ट्रेशन का अधिकार रहेगा. जमीन के विवादों को जल्दी निबटाने की व्यवस्था के लिए सरकार अवकाशप्राप्त जजों की अध्यक्षता में जिला स्तर पर राजस्व ट्रिब्यूनल गठित करने की योजना बना रही है.

इसके अलावा सरकार अपने ऑनलाइन जमीन रिकॉर्ड पोर्टल धरनी के जरिए जमीन के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड को राजस्व रिकॉर्ड से जोड़ने का विचार बना रही है. जब तक यह सारी व्यवस्था नहीं बन जाती है तब तक राज्य में जमीन के रजिस्ट्रेशन का काम स्थगित रहेगा. इस व्यवस्था के लागू हो जाने के बाद संपत्ति के खरीदारों को गांवों के रिकॉर्ड में जमीन के दाखिल-खारिज के लिए आवेदन नहीं करना होगा— तहसीलदारों को संपत्ति की बिक्री के बारे में सूचना मिलने के बाद उनकी ओर से यह काम स्वत: ही शुरू हो जाएगा.


इस व्यवस्था के लिए जमीनी काम सितंबर 2017 में ही तब शुरू हो गया था जब तेलंगाना सरकार ने नया भूमि राजस्व प्रबंधन सिस्टम शुरू किया था. उस व्यवस्था में जमीन के रिकॉर्डों, जिनमें पट्टादार पासबुक (पीपीबी) जैसे दस्तावेज शामिल थे, का व्यापक रूप से डिजिटीकरण किया जाना था. इस प्रक्रिया के माध्यम से राज्य के बहुत से किसानों ने पाया कि उनके दस्तावेजों में या तो छेड़छाड़ की गई थी या उनमें गलतियां थीं.


भूमि राजस्व और रजिस्ट्रेशन के डेटा को एक साथ जोडऩे से सरकार को उम्मीद है कि वह भ्रष्ट अधिकारियों के जरिए रिकॉर्डों में होने वाली गड़बड़ी पर रोक लगा पाएगी. मुख्यमंत्री ने हाल ही में कैबिनेट के सहयोगियों और पार्टी के विधायकों के साथ एक बैठक में बताया था, ''हम राजस्व विभाग में सुधार करने जा रहे हैं क्योंकि यह बहुत भ्रष्ट हो चुका है और लोगों को परेशान किया जा रहा है.'' यह बताते हुए कि नए कानून का उद्देश्य लोगों को पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन मुहैया कराना था, उन्होंने वहां एकत्रित विधायकों से कहा कि वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लोगों को इसके बारे में बताएं. उन्होंने इस बात की तरफ भी ध्यान दिलाया कि जमीन के विवादों के कारण राज्य में अपराध बढ़ रहे हैं और हत्याएं तक हो रही हैं. नई व्यवस्था के लागू होने से जमीन हड़पने की घटनाओं पर रोक लगेगी और संपत्ति विवादों में कमी आएगी.


नया कानून जिला कलेक्टरों और मंडल राजस्व अधिकारियों (एमआरओ) को जमीन के मालिकाना हक से संबंधित शिकायतों को दूर करने के लिए ज्यादा अधिकार देगा और एमआरओ को विवादों को सुलझाने के लिए नियमित रूप से गांवों का दौरा करने की जिम्मेदारी देगा. यह नया कानून 100 से ज्यादा मौजूदा कानूनों और राजस्व विभाग के कामकाज से संबंधित आदेशों को मजबूती प्रदान करेगा. अनावश्यक कानून निष्प्रभावी हो जाएंगे और एक-दूसरे को प्रभावित करने वाले कानून एक साथ जुड़ जाएंगे.


नई व्यवस्था के तहत तहसीलदार और उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों के पास जमीन के स्वामित्व के मामलों में ज्यादा अधिकार आ जाएंगे. इससे क्या भ्रष्टाचार मिट जाएगा—या अधिकारियों के स्तर पर बढ़ जाएगा—यह तो वक्त ही बताएगा.

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