''कम कोरोना संक्रमण वाले जिलों से डाक्टर अधिक संक्रमण वाले जिलों में भेजे जाएंगे''
जिन जिलों में कोरोना संक्रमण कम है वहां से डॉक्टरों को अधिक संक्रमण वाले जिलों में अस्थाई तौर पर तैनात कर दें. इन जिलों में आइसीयू के बेड भी बढ़ाए जाएंगे

यूपी के चिकित्सा महानिदेशक डॉ. डी.एस. नेगी ने इंडिया टुडे केअसिस्टेंट एडिटर आशीष मिश्र से बातचीत में कोरोना के बढ़ते संक्रमण से निबटने की जानकारी दी. पेश है प्रमुख अंश.
यूपी में कोरोना संक्रमण बढऩे की क्या वजह मानते हैं आप?
मुख्य रूप से दो वजहें हैं: देश में कोविड की जांच सबसे ज्यादा यूपी में हो रही है. ऐसे में एसिम्टोमैटिक यानी बीमारी के कोई लक्षण जाहिर न करने वाले मरीज भी पॉजिटिव आ रहे हैं. इससे मामले बढ़े हैं. दूसरा, लोग अब भी सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने के नियम नहीं मान रहे. बीमारी से निबटने के लिए सरकार तो प्रयास कर रही है लेकिन लोगों की भी एक सामाजिक जिम्मेदारी तो है न. फिर भी जितने पॉजिटिव केस आ रहे हैं उस अनुपात में कोरोना से मरने वालों की संख्या बहुत कम है.
जांच में पॉजिटिव आने के बाद भी लोग गायब हो जा रहे हैं. इसमें स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आ रही है.
कई जगहों पर ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें कोरोना जांच कराने वाले लोगों ने पता और मोबाइल नंबर गलत लिखाया है. इससे जांच में पॉजिटिव आने के बाद वे पकड़ में नहीं आए. ऐसी घटनाओं से निबटने के लिए अब जांच के साथ लोगों के आइडी प्रूफ की फोटो लेने के साथ उनके मोबाइल पर मिस्ड कॉल देकर सही नंबर की पड़ताल की जा रही है.
यूपी में बहुत सारे जिलों में अस्पताल बंद पड़े हैं.
सभी जिलों में बंद पड़े अस्पतालों की मैंने सूची मांगी है. बंद पड़े होने की वजह भी पूछी है. इन्हें प्राथमिकता के साथ फौरन शुरू कराया जाएगा. इन्हें क्वारंटीन सेंटर में भी बदला जा सकता है.
कई जिलों में कोविड नियंत्रण में लगे स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों और अधिकारियों में झड़प की घटनाएं सामने आ रही हैं.
कई डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कोराना के चलते मृत्यु हो चुकी है. अधिकारियों को उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण रवैया दिखाना पड़ेगा.
आपके विभाग में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ की बड़ी कमी है.
हम डॉक्टरों की तैनाती के लिए 'वॉक इन इंटरव्यू' कर रहे हैं. डॉक्टरों की कमी को फौरी तौर पर दूर करने के लिए संविदा पर तैनाती की जा रही है. विभाग यह योजना बना रहा है कि जिन जिलों में कोरोना संक्रमण कम है वहां से डॉक्टरों को अधिक संक्रमण वाले जिलों में अस्थाई तौर पर तैनात कर दें. इन जिलों में आइसीयू के बेड भी बढ़ाए जाएंगे.
आपके विभाग पर वेंटिलेटर न खरीद पाने का आरोप लग रहा है.
यह गलत है. हर जिले में 6 से 10 वेंटिलेटर पहुंच चुके हैं. विभाग ने 180 वेंटिलेटर खरीदकर जिलों में भेजा है. पीएम केयर फंड से भी 140 वेंटिलेटर मिले हैं पर वे पुराने हैं, उनमें नया सॉफ्टवेयर डलवाया जा रहा है.
इतने वेंटिलेटर चलाने के लिए स्टाफ कहां से लाएंगे?
'नॉन इनवैसिव वेंटिलेशन' में बहुत ज्यादा मैनपावर की जरूरत नहीं होती. कुछ समय में स्टाफ नर्स भी इसे चलाने में प्रशिक्षिात हो जाती हैं. इससे कम मैनपावर में भी ज्यादा से ज्यादा वेंटिलेटर चला सकते हैं.