गुजरातः त्वरित कार्रवाई
रूपानी गंभीर प्रशासक हैं, इसलिए वे नहीं चाहते थे कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल बलप्रयोग पर ही निर्भर रहें. लोगों की उत्तेजना को शांत करने के लिए उन्होंने अमूल डेयरी कॉपरेटिव के महाप्रबंधक आर.एस. सोढी से इस बात की सार्वजनिक घोषणा करने का अनुरोध किया कि दूध की उपलब्धता में कोई कमी नहीं होगी.

उदय माहूरकर
राष्ट्रव्यापी लॉक डाउन के प्रभावी होने से पहले ही गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी को इसका एहसास हो गया था कि राज्य मुश्किल दिनों की तरफ बढऩे वाला है. इसी की झलक उनके शुरुआती फैसलों में दिखाई भी दी. उन्होंने अहमदाबाद में 1,200 बिस्तरों वाले नए बने सिविल अस्पताल को विशेष कोविड-19 अस्पताल में तब्दील कर दिया.
इसी तरह के विशेष अस्पताल फिर वडोदरा, सूरत और राजकोट में भी तैयार कर दिए गए. कोविड-19 की मार का मुकाबला करने के लिए तिहरी रणनीति तैयार की गई, जिसमें चिकित्सा ढांचे का सुधार, रोकथाम के कदमों को प्राथमिकता और खाद्य आपूर्ति की उपलब्धता शामिल थे. जैसे ही लॉकडाउन का ऐलान हुआ तो कार्रवाई का चौथा इलाका भी चिन्हित कर लिया गया—इस खास स्थिति से निबटने के लिए पुलिस प्रशासन को संवेदनशील बनाना.
रूपानी गंभीर प्रशासक हैं, इसलिए वे नहीं चाहते थे कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल बलप्रयोग पर ही निर्भर रहें. लोगों की उत्तेजना को शांत करने के लिए उन्होंने अमूल डेयरी कॉपरेटिव के महाप्रबंधक आर.एस. सोढी से इस बात की सार्वजनिक घोषणा करने का अनुरोध किया कि दूध की उपलब्धता में कोई कमी नहीं होगी.
इसी तरह की घोषणाएं बाकी जरूरी चीजों के बारे में भी की गईं. इसका काफी असर लोगों में घबराकर खरीदारी करने की प्रवृत्ति को काबू करने पर पड़ा. इसके अलावा अफवाहों और फर्जी खबरों को काबू में करने के लिए मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया है कि लोगों को संकट से वाकिफ रखने के लिए रोजाना चार प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएं.
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